भगवान् आदिनाथ चालीसा (चाँदखेड़ी) – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में (Lyrics व Video सहित)

भगवान् आदिनाथ चालीसा (चाँदखेड़ी) 🎬 वीडियो देखें

भगवान् आदिनाथ चालीसा (चाँदखेड़ी) एक अत्यंत पावन एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण स्तुति है। श्रद्धालु प्रतिदिन इस चालीसा का पाठ करके मन की शांति, सुख-समृद्धि और सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। नीचे दी गई सम्पूर्ण चालीसा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और साथ ही ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करके इसका भक्ति वीडियो भी देखें।

(छंद: दोहा)

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूँ प्रणाम ।
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ।।
सर्व साधु और सरस्वती जिनमंदिर सुखकार ।
आदिनाथ भगवान् को मन-मंदिर में धार ।।
(चौपाई छन्द)
जै जै आदिनाथ जिन स्वामी, तीन-काल तिहुँ-जग में नामी ।
वेष-दिगम्बर धार रहे हो, कर्मों को तुम मार रहे हो ।।१।।

हो सर्वज्ञ बात सब जानो; सारी दुनियाँ को पहचानो ।
नगर अयोध्या जो कहलाये, राजा नाभिराज बतलाये ।।२।।

मरुदेवी माता के उदर से, चैत-वदी-नवमी को जन्मे ।
तुमने जग को ज्ञान सिखाया, कर्मभूमि का बीज उपाया ।।३।।

कल्पवृक्ष जब लगे बिछरने, जनता आई दु:खड़ा कहने ।
सब का संशय तभी भगाया, सूर्य-चंद्र का ज्ञान कराया ।।४।।

खेती करना भी सिखलाया, न्याय-दंड आदिक समझाया ।
तुमने राज किया नीति का, सबक आपसे जग ने सीखा ।।५।।

पुत्र आपका भरत बताया, चक्रवर्ती जग में कहलाया ।
बाहुबलि जो पुत्र तुम्हारे, भरत से पहले मोक्ष सिधारे ।।६।।

सुता आपकी दो बतलाई, ‘ब्राह्मी’ और ‘सुन्दरी’ कहलाई ।
उनको भी विद्या सिखलाई, अक्षर और गिनती बतलाई ।।७।।

एक दिन राजसभा के अंदर, एक अप्सरा नाच रही थी ।
आयु उसकी बची अल्प थी, इसीलिए आगे नहिं नाच सकी थी ।।८।।

विलय हो गया उसका सत्वर, झट आया वैराग्य उमड़कर ।
बेटों को झट पास बुलाया, राजपाट सब में बँटवाया ।।९।।

छोड़ सभी झंझट संसारी, वन जाने की करी तैयारी ।
राजा हजारों साथ सिधाए, राजपाट-तज वन को धाये ।।१०।।

लेकिन जब तुमने तप कीना, सबने अपना रस्ता लीना ।
वेष-दिगम्बर तजकर सबने, छाल आदि के कपड़े पहने ।।११।।

भूख-प्यास से जब घबराये, फल आदिक खा भूख मिटाये ।
तीन सौ त्रेसठ धर्म फैलाये, जो अब दुनियाँ में दिखलाये ।।१२।।

छै: महीने तक ध्यान लगाये, फिर भोजन करने को धाये ।
भोजन-विधि जाने नहिं कोय, कैसे प्रभु का भोजन होय ।।१३।।

इसी तरह बस चलते चलते, छै: महीने भोजन-बिन बीते ।
नगर हस्तिनापुर में आये, राजा सोम श्रेयांस बताए ।।१४।।

याद तभी पिछला-भव आया, तुमको फौरन ही पड़घाया ।
रस-गन्ने का तुमने पाया, दुनिया को उपदेश सुनाया ।।१५।।

तप कर केवलज्ञान उपाया, मोक्ष गए सब जग हर्षाया ।
अतिशययुक्त तुम्हारा मंदिर, चाँदखेड़ी भँवरे के अंदर ।।१६।।

उसका यह अतिशय बतलाया, कष्ट-क्लेश का होय सफाया ।
मानतुंग पर दया दिखाई, जंजीरें सब काट गिराई ।।१७।।

राजसभा में मान बढ़ाया, जैनधर्म जग में फैलाया ।
मुझ पर भी महिमा दिखलाओ, कष्ट भक्त का दूर भगाओ ।।१८।।

(सोरठा)
पाठ करे चालीस दिन, नित चालीस ही बार ।
चाँदखेड़ी में आय के, खेवे धूप अपार ।।
जन्म दरिद्री होय जो, होय कुबेर-समान ।
नाम-वंश जग में चले, जिनके नहीं संतान ।।

भगवान् आदिनाथ चालीसा (चाँदखेड़ी) पाठ का महत्व

नियमित रूप से इस चालीसा के पाठ से भक्तों के दुःख-दारिद्र दूर होते हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन पढ़ें।

सभी जैन चालीसा एक साथ पढ़ने के लिए हमारा संग्रह पेज देखें: जैन चालीसा संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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