श्री मुनिसुव्रतनाथ जिन चालीसा – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में (Lyrics व Video सहित)

श्री मुनिसुव्रतनाथ जिन चालीसा 🎬 वीडियो देखें

श्री मुनिसुव्रतनाथ जिन चालीसा एक अत्यंत पावन एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण स्तुति है। श्रद्धालु प्रतिदिन इस चालीसा का पाठ करके मन की शांति, सुख-समृद्धि और सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। नीचे दी गई सम्पूर्ण चालीसा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और साथ ही ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करके इसका भक्ति वीडियो भी देखें।

कविश्री चंद्र
(दोहा)

अरिहंत सिद्ध आचार्य को करूँ प्रणाम ।
उपाध्याय सर्व-साधू करते स्व-पर-कल्याण ।।
जिनधर्म जिनागम जिनमंदिर पवित्र-धाम ।
वीतराग की प्रतिमा को कोटि-कोटि प्रणाम ।।

(चौपाई)

जय मुनिसुव्रत दया के सागर, नाम प्रभू का लोक-उजागर ।
सुमित्रा राजा के तुम नंदा, माँ शामा की आँखों के चंदा ।।१।।

श्यामवर्ण-मूरत प्रभू की प्यारी, गुणगान करें निश-दिन नर-नारी ।
मुनिसुव्रत-जिन हो अंतरयामी, श्रद्धा-भाव-सहित तुम्हें प्रणामी ।।२।।

भक्ति आपकी जो निश-दिन करता, पाप-ताप भय-संकट हरता ।
प्रभु संकटमोचन नाम तुम्हारा, दीन-दु:खी जीवों का सहारा ।।३।।

कोई दरिद्री या तन का रोगी, प्रभु दर्शन से होते हैं निरोगी ।
मिथ्या-तिमिर भयो अतिभारी, भव-भव की बाधा हरो हमारी ।।४।।

यह संसार महादु:खदाई, सुख नहीं यहाँ दु:ख की खाई ।
मोह-जाल में फंसा है बंदा, काटो प्रभु भव भव का फंदा ।।५।।

रोग-शोक-भय-व्याधि मिटावो, भवसागर से पार लगावो ।
घिरा कर्म से चौरासी भटका, मोह-माया-बंधन में अटका ।।६।।

संयोग-वियोग भव-भव का नाता, राग-द्वेष जग में भटकाता ।
हित-मित-प्रिय प्रभु की वाणी, स्व-पर-कल्याण करें मुनि ध्यानी ।।७।।

भवसागर बीच नाव हमारी, प्रभु पार करो यह विरद तिहारी ।
मन-विवेक मेरा अब जागा, प्रभु-दर्शन से कर्म-मल भागा ।।८।।

नाम आपका जपे जो भाई, लोकालोक सुख-सम्पदा पाई ।
कृपा-दृष्टि जब आपकी होवे, धन-आरोग्य सुख-समृधि पावे ।।९।।

प्रभु-चरणन में जो जो आवे, श्रद्धा-भक्ति फल-वाँछित पावे ।
प्रभु आपका चमत्कार है न्यारा, संकटमोचन प्रभु नाम तुम्हारा ।।१०।।

सर्वज्ञ अनंत-चतुष्टय के धारी, मन-वच-तन वंदना हमारी ।
सम्मेद-शिखर से मोक्ष सिधारे, उद्धार करो मैं शरण तिहारे ।।११।।

महाराष्ट्र का पैठण-तीर्थ, सुप्रसिद्ध यह अतिशय-क्षेत्र ।
मनोज्ञ-मंदिर बना है भारी, वीतराग की प्रतिमा सुखकारी ।।१२।।

चतुर्थ-कालीन मूर्ति है निराली, मुनिसुव्रत प्रभु की छवि है प्यारी ।
मानस्तंभ उत्तंग की शोभा न्यारी, देखत गलत मान-कषाय भारी ।।१३।।

मुनिसुव्रत शनिग्रह-अधिष्ठाता, दु:ख-संकट हरे देवे सुख-साता ।
शनि-अमावस की महिमा भारी, दूर-दूर से आते नर-नारी ।
मुनिसुव्रत-दर्शन महा-हितकारी, मन-वच-तन वंदना हमारी ।।१४।।

(चौबोला)

सम्यक् श्रद्धा से चालीसा, चालीस दिन पढिये नर-नार ।
मुक्ति-पथ के राही बन, भक्ति से होवे भव-पार ।।

श्री मुनिसुव्रतनाथ जिन चालीसा पाठ का महत्व

नियमित रूप से इस चालीसा के पाठ से भक्तों के दुःख-दारिद्र दूर होते हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन पढ़ें।

सभी जैन चालीसा एक साथ पढ़ने के लिए हमारा संग्रह पेज देखें: जैन चालीसा संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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