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बंसीवारा आज्यो म्हारे देस, सांवरी सुरत मीराबाई भजन / Bhajan Bansiwara Aajyo Mhare Des Meerabai Bhajan

 

बंसीवारा आज्यो म्हारे देस। सांवरी सुरत वारी बेस॥

आऊं-आऊं कर गया जी कर गया कौल अनेक।
गिणता-गिणता घस ग म्हारी आंगलिया री रेख॥

मैं बैरागिण आदिकी जी थांरे म्हारे कदको सनेस।
बिन पाणी बिन साबुण जी होय ग धोय सफेद॥

जोगण होय जंगल सब हेरूं छोड़ा ना कुछ सैस।
तेरी सुरत के कारणे जी म्हे धर लिया भगवां भेस॥

मोर-मुकुट पीताम्बर सोहै घूंघरवाला केस।
मीरा के प्रभु गिरधर मिलियां दूनो बढ़ै सनेस॥ 

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