कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

हमको जग ने ख़ुद ही छोड़ा बिन्दु जी भजन

 Humko Jag Ne Khud Hi Chhoda Bindu JiBhajan

हमको जग ने ख़ुद ही छोड़ा,
हमने तो जग में रहने का किया प्रयत्न न थोड़ा।
समझाने पर कभी न माना ये मस्ताना घोड़ा,
गई हेकड़ी भूल गया जब तिरस्कार का कोड़ा।
जिनसे सम्बन्ध कठिन पर्ण और प्रेम का जोड़ा,
स्वार्थ निकल जाने पर सबने हमसे नाता तोड़ा।
जिनके हित धन धाम धर्म, ईश्वर से भी मुख मोड़ा,
उन सबने सुखमय जीवन के पथ में अटकाया रोड़ा।
पीड़ा देता था विषयों का पका हुआ था फोड़ा,
अश्रु ‘बिन्दु’ विष निकल पड़ा जब अन्त:करण निचोड़ा॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *