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कन्हैया तुझे एक नज़र देखना है बिन्दु जी भजन

  Kanhaiya Tujhe Ek Nazar DekhnaHai Bindu Ji Bhajan 

कन्हैया तुझे एक नज़र देखना है।
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है॥
अगर तुम हो दोनों की आहों के आशिक।
तो आहों को अपना असर देखना है॥
सँवारा था जिस हाथ से गीध गज को,
उसी हाथ का अब हुनर देखना है॥
बिदुर भीलनी के जो घर तुमने देखे।
तो हमको तुम्हारा भी घर देखना है॥
टपकते हैं दृग ‘बिन्दु’ तुझे ये कहकर।
तुम्हें अपनी उल्फ़त में डर देखना है॥ 

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