कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

वे रघुवर को जानत मन की संत जूड़ीराम भजन / Ve Raghubar Ko Jaanat Man Ki Sant Joodiram Bhajan

 

वे रघुवर को जानत मन की।
जानत हैं रघुवीर कृपा निधि प्रीति प्रतीति देख निज जन की।
ऐसी प्रीति रीति के कारण पावन करी भीलनी वन की।
पीपा की परतीत बड़ाई गई भक्त सुगति भई तिन की।
राना जिहर दियो मीरा को नाम प्रताप ताप गई तन की।
कहत पुकार-पुकार दीन हों नाम लेत तर गई गनका सी।
ऐसों प्रबल काल नहिं दीसत सीमाराम भजन रति तिन की।
प्रनत पाल करनानिधान हर पल-पल खबर करत दासन की।
जूड़ीराम गरीब निबाजो भारी तपन बुझावत तन की।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *