श्री मुनिसुव्रतनाथ जी आरती (दो रूप) – Munisuvratnath Aarti in Hindi

श्री मुनिसुव्रतनाथ जी आरती (दो रूप)

राजगृही में जन्मे बीसवें तीर्थंकर श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान की आरती के दो थोड़े अलग रूप प्रचलन में मिलते हैं, दोनों यहाँ क्रमांक देकर साथ रखे गए हैं।

1. श्री मुनिसुव्रतनाथ जी आरती (रूप 1)

जय मुनिसुव्रतनाथ स्वामी, प्रभु मुनिसुव्रतनाथ स्वामी
जय मुनिसुव्रतनाथ स्वामी, प्रभु मुनिसुव्रतनाथ स्वामी

भक्ति भाव से प्रणमु तुमको, जय अन्तरयामि २
जय मुनिसुव्रतनाथ स्वामी०

राजगृही में जन्म किया प्रभु २, आनन्द भयो भारी ।
सुर नर मुनि गुण गाये तिहारी, आरती करी थारी ॥
जय मुनि सुव्रतनाथ स्वामी०

पिता तिहारे सुमित्र राजा २, शामा के जाया ।
श्याम वर्ण मूरत तेरी हैं, पैठण अतिशय दर्शाया ॥
जय मुनि सुव्रतनाथ स्वामी०

जो ध्यावे सुख पावे सब ही २, सब संकट को दूर करे २।
मंवांचित फल पावे सब ही 2, जो प्रभु चरण हरे २ ॥
जय मुनि सुव्रतनाथ स्वामी०


2. श्री मुनिसुव्रतनाथ जी आरती (रूप 2)

ऊँ जय मुनिसुव्रतस्वामी, प्रभु जय मुनिसुव्रतस्वामी ।
भक्ति भाव से प्रणमूं, जय अंतरयामी ।। ऊँ जय०

राजगृही में जन्म लिया प्रभु, आनन्द भयो भारी ।
सुर नर मुनि गुण गाएँ, आरती कर थारी ।। ऊँ जय०

पिता तिहारे, सुमित्र राजा, शामा के जाया ।
श्यामवर्ण मूरत तेरी, पैठण में अतिशय दर्शाया ।।ऊँ जय०

जो ध्यावे सुख पावे, सब संकट दूर करें ।
मन वांछित फल पावे, जो प्रभु चरण धरें ।। ऊँ जय०

जन्म मरण, दुख हरो प्रभु, सब पाप मिटे मेरे ।
ऐसी कृपा करो प्रभु, हम दास रहें तेरे ।। ऊँ जय०

निजगुण ज्ञान का, दीपक ले आरती करुं थारी ।
सम्यग्ज्ञान दो सबको, जय त्रिभुवन के स्वामी ।। ऊँ जय०

जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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