गणेश जी निमंत्रण के गीत / 1 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Ganesh Ji Nimantran Ke Geet 1 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics
गढ़ रणत भंवर से आवो बिंदायक, आय पवास्यो सीला बड़ तलै जी।
पूछत-पूछत नगर पवास्यो, घर ये बताओ लाडली-रा (लाडला-रा) बाबा का।
ऊंची सी मैढ़ी लाल किंवाड़ी, केल झबुक बांकै बारने।
अली ये गली मत जाओ बिंदायक,
सुदोय ओ जो सामी साल में।
आवै गूगल की बास वो बिंदायक, कौन सपूती गणपत पूजीयो।
गणपत पूजे लाड़ लाड़ री मांय ओ बिंदायक, जा घर बिरद उतावलो।
गढ़ रणत भंवर से आवो बिंदायक, आय पवास्यो सीला बड़ तलै जी।
पहलो तो बासो सरवर बसियो, सरवर भरियो ठंडा नीर को।
दूजो तो बासो, बागा में बसियो, बागा में उपजो मरवो, केवड़ो।
अगलो तो बासो शहरां में बसिया, काकंड़ में बैठ्या, बामण बनिया।
चौथो तो बासो काकंड़ बसिया, काकंड़, में बैठया, ग्वाला ग्वालनी।
पांचवो तो बासो, तोरण बसियो, तोरन ताई रुड़ी चिड़कली।
एवड़ छेवड़ चार चिड़कली, इमरत बानी हरियो सूवटो।
छट्ठो तो बासो फेरा में बेसियो, फेरा में बैठा बींद बींदणी।
एक लाड़ली रो चीर बढ़ जो, राइबर की बड़जो बोटली
बढ़ जो हो लाड़ा, गोत्र तुम्हारो, एक पीहर दूजो सासरो।
सातवो तो बासो मांया में बेसियो, मांया में मंगल गाईयां।
एक मांड्यो चूंडयो आइयो बिंदायक, सर्वं सुहागन रा शीश जी।
भरोयो भूतल्यो आई यो बिंदायक,बिनजारा रा बैल जूं जी।
एक पापड़ा की जेट बढ़ जो, मंगोड्या का बढ़ जो माटला।
एक थैली देइयो बिंदायक, लाड़ला रा बाप नै।
एक खर्चे तो बरतै एक मन चीज, रंग खेलो वाकां ब्याव में।
एक जीव को दस देवो बिंदायक, लाड़ला री मांय नै।
वा तो झीनी सी बोलै, मंदरी सी चालै, रंग खेलो वाकां ब्याव में।
एक भात पोत जस देवो बिंदायक, लाड़ला रा नाना माम नै।
पहरावै, उड़ावै एक मन चीत रंग खेलो वाकां ब्याव में।
एक आरतो जस, देवो बिंदायक, लाड़ला री भूवा बेण नै।
गावै बजावै आरतो गावै, रंग खेलो बांका ब्याव में।
गढ़ रणत भंवर से आवो बिंदायक, आय पवास्यो सीला बड़ तलै जी।
folk song lyrics rajasthani, Lokgeet, Rajasthani Lokgeet Lyrics, Rajasthani lyrics, Rajasthani song lyrics in hindi
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें