कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

रुलाकर चल दिए इक दिन / Rulakar Chal Diye Ek Din

 रुला कर चल दिये इक दिन

हँसी बन कर जो आये थे

चमन रो-रो के कहता है

कभी गुल मुस्कुराये थे


अगर दिल के ज़ुबां होती तो

ग़म कुछ कम तो हो जाता

उधर वो चुप इधर सीने में

हम तूफ़ां छुपाये थे

चमन रो-रो के कहता है ...


ये अच्छा था न हम कहते

किसी से दास्तां अपनी

समझ पाये न जब अपने

पराये तो पराये थे

चमन रो-रो के कहता है ...

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