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गुरु नानक के सबद : Guru Nanak Ke Sabad

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हम घरि साजन आए

हम घरि साजन आए। साचै मेलि मिलाए॥

सहजि मिलाए हरि मनि भाए पंच मिले सुख पाइआ।

साई वसतु परापति होई जिसु सेती मनु लाइआ॥

अनुदिनु मेलु भइआ मनु मानिआ घर मंदर सोहाए।

पंच सबद धुनि अनहद वाजे हम घरि साजन आए॥

आवहु मीत पिआरै। मंगल गावहुना रे॥

सचु मंगलु गावहु ता प्रभु भावहु सोहिलड़ा जुग चारे।

अपनै घरि आइआ थानि सुहाइआ कारज सबदि सवारे॥

गिआन महारसु नेत्री अंजनु त्रिभवण रूपु दिखाइआ।

सखी मिलहु रसि मंगलु गावहु हम घरि साजनु आइआ॥

मनु तनु अंमृति भिंना। अंतरि प्रेम रतंना॥

अंतरि रतनु पदारथु मेरै परम ततु वीचारो।

जंत भेख तू सफलिओ दाता सिरि सिरि देवणहारो॥

तू जानु गिआनी अंतरजामी आपे कारणु कीना॥

सुनहु सखी मनु मोहनि मोहिआ तनु मनु अंमृति भीना॥

आतम रामु संसारा। साचा खेलु तुम्हारा॥

सचु खेलु तुम्हारा अगम अपारा तुधु बिनु कउणु बुझाए।

सिध साधिक सिआणे केते तुझ बिनु कवणु कहाए॥

कालु बिकालु भए देवाने मनु राखिआ गुरि ठाए।

नानक अवगण सबदि जलाए गुण संगमि प्रभु पाए॥

सभना मरणा आइआ

सभना मरणा आइआ वेछोड़ा सभनाइ।

पुछहु जाइ सिआणिआ आगै मिलणु कि नाह॥

जिन मेरा साहिबु वीसरै वडड़ी वेदन तिनाह॥

भी सालाहिहु साचा सोइ।

जाकी नदरि सदा सुखु होइ॥ ॥रहाउ॥

वडा करि सालाहणा है भी होसी सोइ।

सभना दाता एकु तू माणस दाति न होई॥

जो तिसु भावै तो थीऐ रंन कि रुनै होइ॥

धरती उपरि कोट गड़ केती गई वजाइ।

जो असमानि न मावनी तिन नकि नथा पाइ॥

जे मन जाणहि सूलीआ काहे मिठा खाहि॥

नानक अउगुण जेतड़े तेते गली ज़ंजीर।

जे गुण होनि त कटीअनि से भाई से वीर॥

अगै गए न मंनीअनि मारि कढहु वे पीर॥

आपे सबदु आपे नीसानु

आपे सबदु आपे नीसानु। आपे सुरता आपे जानु॥

आपे करि करि वेखै ताणु। तू दाता नामु परवाणु॥

ऐसा नामु निरंजन देउ। हउ जाचिकु तू अलख अभेउ॥ रहाउ॥

माइआ मोहु धरकटी नारि। भूंडी कामणि कामणिआरि॥

राजु रूपु झूठा दिन चारि। नामु मिलै चानणु अंधिआरि॥

चखि छोडी सहसा नही कोइ। बापु दिसै बेजाति न होई॥

एके कउ नाही भउ कोइ। करता करै करावै सोइ॥

सबदि मुए मनु मन ते मारिआ। ठाकि रहे मनु साचै धारिआ॥

अवरुन सूझै गुर कउ वारिआ। नानक नामि रते निसतारिआ॥

जप तप का बंधु बेड़ला

जप तप का बंधु बेड़ला जितु लंघहि वहेला।

ना सरवरु ना ऊछलै ऐसा पंथु सुहेला॥

तेरा एको नामु मंजीठड़ा रता मेरा चोला सद रंग ढोला॥ रहाउ॥

साजन चले पिआरिआ किउ मेला होई।

जे गुण होवहि गंठड़ीऐ मेलेगा सोई॥

मिलिआ होइ न वीछुड़ै जे मिलिआ होई।

आवागउणु निवारिआ है साचा सोई॥

हउमै मारि निवारिआ सीता है चोला॥

गुरबचनी फलु पाइआ सह के अंमृत बोला॥

नानकु कहै सहेली हो सहु खरा पिआरा।

हम सह केरीआ दासी साचा खसमु हमारा॥

धृगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ

धृगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ।

कलर केरी कंध जिउ अहिनिसि किरि ढहि पाइ॥

बिनु सबदै सुखु ना थीऐ पिर बिनु दूखु न जाइ॥

मुंधे पिर बिनु किआ सीगारु।

दरि घरि ढोई ना लहै दरगह झूठ खुआरु॥ ॥रहाउ॥

आपि सुजाण न भुलई सचा वड किरसाणु।

पहिला धरती साधि कै सचु नामु दे दाणु॥

नउ निधि उपजै नामु एकु करमि पवै नीसाणु॥

गुर कउ जाणि न जाणई किआ तिसु चजु अचारु।

अंधुलै नामु विसारिआ मनमुखि अंध गुबारु॥

आवणु जाणु न चुकई मरि जनमै होइ खुआरु॥

चंदनु मोलि अणाइआ कुंगू मांग संधूरु।

चोआ चंदनु बहु घणा पाना नालि कपूरु॥

जे धन कंति न भावई त सभि अडंबर कूड़ु॥

सभि रस भोगण बादि हहि सभि सीगार विकार।

जब लगु सबदि न भेदीऐ किउ सोहै गुरदुआरि॥

नानक धंनु सुहागणी जिन सह नालि पिआरु॥

मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु

मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु घट ही तीरथि नावा।

एकु सबदु मेरै प्रानि बसतु है बाहुड़ि जनमि न आवा॥

मनु बेधिआ दइआल सेती मेरी माई।

कउण जाणै पीर पराई। हम नाही चिंत पराई॥ रहाउ।

अगम अगोचर अलख अपारा चिंता करहु हमारी।

जलि थलि महीअलि भरिपुरि लीणा घटि घटि जोति तुम्हारी॥

सिख मति सभ बुधि तुम्हारी मंदिर छावा तेरे।

तुझ बिनु अवरु न जाणा मेरे साहिबा गुण गावा नित नेरे॥

जीअ जंत सभि सरणि तुम्हारी सरव चिंत तुधु पासे।

जो तुधु भावै सोई चंगा इक नानक की अरदासे॥

जोगी अंदरि जोगीआ

जोगी अंदरि जोगीआ। तूं भोगी अंदरि भोगीआ।

तेरा अंतु न पाइआ सुरगि मछि पइआलि जीउ॥

हउ वारी हउ वारणै कुरबाणु तेरे नाव नो॥ ॥रहाउ॥

तुधु संसारु उपाइआ। सिरे सिरि धंधे लाइआ॥

वेखहि कीता आपणा करि कुदरति पासा ढालि जीउ॥

परगटि पाहारै जापदा। सभु नावै नो परताप दा॥

सतिगुर बाझु न पाइओ सभ मोही माइआ जालि जीउ॥

सतिगुर कउ बलि जाईऐ। जितु मिलिऐ परमगति पाईऐ॥

सुरि नर मुनि जन लोचदे सो सतिगुर दोआ बुझाइ जीउ॥

सतसंगति कैसी जाणीऐ। जिथै एको नामु वखाणिऐ॥

एको नामु हुकमु है नानक सतिगुरि दीआ बुझाइ जीउ॥

गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि

गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि धावै करि करणी कसु पाईए।

भाठी भवनु प्रेम का पोचा इतु रसि अमिउ चुआईऐ॥

बाबा मनु मतवारो नाम रस पीवै सहज रंग रचि रहिआ।

अहिनिसि बनी प्रेम लिव लागी सबदु अनाहद गहिआ॥ ॥रहाउ॥

पूरा साचु पिआला सहजे तिसहि पीआए जा कउ नदरि करे।

अंमृत का वापारी होवै किआ मदि छूछै भाउ धरे॥

गुर की साखी अंमृत बाणी पीवत ही परवाणु भइआ।

दर दरसन का प्रीतमु होवै मुकति बैकुंठे करै किआ॥

सिफती रता सद बैरागी जूऐ जनमु न हारै।

कहु नानक सुणि भरथरि जोगी खीवा अंमृत धारै॥

एको सरवरु कमल अनूप

एको सरवरु कमल अनूप। सदा बिगासै परमल रूप॥

ऊजल मोती चूगहि हंस। सरब कला जगदीसै अंस॥

जो दीसै सो उपजै बिनसै। बिनु जल सरवरि कमलु न दीसै॥ ॥रहाउ॥

बिरला बूझै पावै भेदु। साखा तीनि कहै नित बेदु॥

नाद बिंद की सुरति समाइ। सतिगुरु सेवि परमपदु पाइ॥

मुकतो रातउ रंगि रवांतउ। राजन राजि सदा बिगसांतउ।

जिसे तूं राखहि किरपा धारि। बूडत पाहन तारहि तारि॥

त्रिभवण महि जोति त्रिभवण महि जाणिआ। उलट भई घरु घर महि आणिआ॥

अहिनिसि भगति करे लिव लाइ। नानकु तिनकै लागै पाइ॥

इहु तनु धरती बीजु करमा करो

इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपउ सारिंगपाणी।

मनु किरसाणु हरि रिदै जंमाइ लै इउ पावसि पद निरबाणी॥

काहे गरबसि मूड़े माइआ।

पित सुतो सगल कालत्र माता तेरे होहि न अंति सखाइआ॥ ॥रहाउ॥

बिखै बिकार दुसट किरखा करे इन तजि आतमै होइ धिआई।

जप तप संजमु होहि जब राखे कमलु बिगसै मधु आस्रमाई॥

बीस सपताहरो बासरो संग्रहै तीनि खोड़ा नित कालु सारै।

दस अठार मै अपरंपरो चीनै कहै नानकु इव इक तारै॥

गुणवंती सहु राविआ

गुणवंती सहु राविआ निगुणि कूके काइ।

जे गुणवंती थी रहै ता भी सहु रावण जाइ॥

मेरा कंतु रासालू की धन अवरा रावे जी॥ ॥रहाउ॥

करणी कामण जे थीऐ जे मनु धागा होइ।

माणकु मुलि न पाईऐ लीजै चिति परोइ॥

राहु दसाई न जुलां आखां अंबड़ीआसु।

तै सह नालि अकूअणा किउ थीवै घर वासु॥

नानक एकी बाहरा दूजा नाही कोइ।

तै सह लगी जे रहै भी सहु रावै सोइ॥

अंतरि वसै न बाहरि जाइ

अंतरि वसै न बाहरि जाइ। अंमृतु छोडि काहे बिखु खाइ॥

ऐसा गिआनु जपहु मन मेरे। होवहु चाकर साचे केरे॥ ॥रहाउ॥

गिआनु धिआनु सभु कोई रवै। बांधनि बांधिआ सभु जगु भवै॥

सेवा करे सुचाकरु होइ। जलिथलि मही अलि रवि रहिआ सोइ॥

हम नही चंगे बुरा नहीं कोई। प्रणवति नानकु तारे सोइ॥

मनु हाली किरसाणी करणी

मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु।

नामु बीजु संतोखु सुहागा रखु गरीबी वेसु॥

भाउ करम करि जंमसी से घर भागठ देखु॥

बाबा माइआ साथि न होइ।

इनि माइआ जगु मोहिआ विरला बूझै कोइ॥ ॥रहाउ॥

हाणु हटु करि आरजा सचु नामु करि वथु।

सुरति सोच करि भांडसाल तिसु विचि तिसनो रखु॥

वणजारिआ सिउ वणजु करि लै लाहा मन हसु॥

सुणि सासत सउदागरी सतु घोड़े लै चलु।

खरचु बनु चंगिआईआ मतु मन जाणहि कलु॥

निरंकार कै देसि जाहि ता सुखि लहहि महलु॥

लाइ चितु करि चाकरी मंनि नामु करि कंमु।

बनु बदीआ करि धावणी ताको आखै धंनु॥

नानक वैखै नदरि करि चढ़े चवगण वंनु॥

रैणि गवाई सोइ कै

रैणि गवाई सोइ कै दिवस गवाइआ खाइ।

हीरे जैसा जनमु है कउड़ी बदले जाइ।

नामुन जानिआ राम का मूड़े फिरि पाछै पछुताहि रे॥ ॥रहाउ॥

अनता धनु धरणी धरे अनत ने चाहिआ जाइ।

अनत कउ चाहन जो गए से आए अनत गवाइ॥

आपण लीआ जे मिलै तो सभु को भागठु होइ।

करमा उपरि निबड़ै जे लोचै सभु कोइ॥

नानक करणा जिनि की सोई सार करे।

हुकमु ने जापी खसम का किसै वडाई देइ॥

जोगु न खिंथा जोगु न डंडै

जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ।

जोगु न मुंदी मूंडि मुडाईऐ जोगु न सिंङी वाईऐ॥

अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति इव पाईऐ॥

गली जोगु न होई।

एक दृसटि करि समसरि जाणै जोगी कहीऐ सोई॥ रहाउ॥

जोगु न बाहरि मड़ी मसाणी जोगु न ताड़ी लाईऐ।

जोगु न देसि दिसंतरि भविऐ जोगु न तीरथि नाईऐ॥

अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगतिइव पाईऐ॥

सतिगुरु भेटै ता सहसा तूटै धावतु वरजि रहाईऐ।

निझरु झरै सहज धुनि लागै घर ही परचा पाईऐ॥

अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोगति इव पाईऐ॥

नानक जीवति मरि रहीऐ ऐसा जोगु कमाईऐ।

वाजे बाइबहु सिंङी वाजै तउ निरभउ पद पाईऐ॥

अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति तउ पाईए॥

माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ

माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ।

मनु तनु होइ चुलंभु जे सतगुर भाइआ॥

चलै जनमु सवारि बखरु सच लै।

पति पाए दरबारि सतिगुर सबदि भै॥ रहाउ॥

मनि तनि सचु सलाहि साचे मनि भाइआ।

लालि रता मनु मानिआ गुरु पूरा पाइआ॥

हउ जीवा गुण सारि अंतरि तू वसै।

तूं वसहि मन माहि सहजे रसि रसै॥

मूरख मन समझाइ आखउ केतड़ा।

गुरमुखि हरि गुण गाइ रंगि रंगेतड़ा॥

नित नित रिदै सभालि प्रीतमु आपणा।

जे चलहि गुण नालि नाही दुखु संतापणा॥

मनमुख भरमि भुलाणा ना तिसु रंगु है।

मरसी होइ विडाणा मनि तनि भंगु है॥

गुर की कार कमाइ लाहा घरि आणिआ।

गुर बाणी निरबाणु सबदि पछाणिआ॥

इक नानक की अरदासि जे तुधु भावसी।

मै दीजै नाम निवासु हरि गुण गावसी॥

तू सुलतानु कहा हउ मीआ

तू सुलतानु कहा हउ मीआ तेरी कवन वडाई।

जो तू देहि सु कहा सुआमी मै मूरख कहणु न जाई॥

तेरे गुण गावा देहि बुझाई। जैसे सच महि रहउ रजाई॥ रहाउ॥

जो हउ होआ सभु किछु तुझ ते तेरी सभ असनाई।

तेरा अंतु न जाणा मेरे साहिब मैं अंधुले किआ चतुराई॥

किआ उह कथी कथे कथि देखा मै अकथुन कथना जाई।

जो तुधु भावै सोई आखा तिलु तेरी वडिआई॥

एते कूकर हउ बेगाना भउका इसु तन ताई।

भगति हीणु नानकु जे होइगा ता खसमै नाउ न जाई॥

हम आदमी हां इक दमी मुहलति

हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा।

नानकु बिनवै तिसै सरेवहु जाके जीअ पराणा॥

अंधे जीवना वीचारि देखि केते के दिना॥ रहाउ॥

सासु मासु सभु जीउ तुमारा तू मै खरा पिआरा।

नानकु साइरु एव कहतु है सचे परवरदगारा॥

जे तू किसै न देही मेरे साहिबा किआ को कढै गहणा।

नानकु बिनवै सो किछु पाईऐ पुरबि लिखे का लहणा॥

नाम खसम का चिति न कीआ कपटी कपटु कमाणा।

जम दुआरि जा पकड़ि चलाइआ ता चलदा पछुताणा॥

जब लगु दुनीआ रहीऐ नानक किछु सुणीऐ किछु कहीऐ।

भालि रहे हम रहणु न पाइआ जीवतिआ मरि रहीऐ॥

नदरि करे ता सिमरिआ जाइ

नदरि करे ता सिमरिआ जाइ। आतमा द्रवै रहै लिव लाइ॥

आतमा परमातमा एको करै। अंतर की दुबिधा अंतरि मरै॥

गुर परसादी पाइआ जाइ। हरि सिउ चितु लागै फिरि कालु न खाइ॥ रहाउ॥

सचि सिमरिऐ होवै परगासु। ताते बिखिआ महि रहै उदासु॥

सतिगुर की ऐसी वडिआई। पुत्र कलत्र विचै गति पाई॥

ऐसी सेवकु सेवा करै। जिस की जीउ तिसु आगै धरै॥

साहिब भावै सो परवाणु। सो सेवकु दरगह पावै माणु॥

सतिगुर की मूरति हिरदै वसाए। जो इछै सोई फलु पाए॥

साचा साहिबु किरपा करै। सो सेवकु जम ते कैसा डरै॥

भनति नानकु करे वीचारु। साची बाणी सिउ धरे पिआरु॥

ता को पावै मोख दुआरु। जपु तपु सभु इहु सबदु है सारु॥

सभि रस मिठे मंनिऐ

सभि रस मिठे मंनिऐ सुणिऐ सालोणे।

खट तुरसी मुखि बोलणा मारण नाद कीए॥

छतीह अंम्रित भाउ एकु जा कउ नदरि करेइ।

बाबा होरु खाणा खुसी खुआरु॥

जितु खाधै तनु पीडीए मन महि चलहि विकार॥ ॥रहाउ॥

रता पैनणु मनु रता सुपेदी सतु दानु।

नीली सिआही कदा करणी पहिरणु पैर धिआनु॥

कमरबंदु संतोख का धनु जोबनु तेरा नामु॥

बाबा होरु पैनणु खुसी खुआरु॥

जितु पैधै तनु पीड़ीऐ मन महि चलहि विकार॥ ॥रहाउ॥

घोड़े पाखर सुइने साखति बूझण तेरी वाट।

तरकस तीर कमाण सांग तेगबंद गुण धातु॥

वाजा नेजा पति सिउ परगटु करमु तेरा मेरी जाति।

बाबा होरु चड़णा खुसी खुआरू॥

जितु चड़िऐ तनु पीड़ीऐ मन महि चलहि विकार॥ ॥रहाउ॥

घर मंदर खुसी नाम की नदरि तेरी परवारु।

हुकमु सोई तुधु भावसी होरु आखणु बहुतु अपारु॥

नानक सचा पातिसाहु पूछि न करे बीचारु।

बाबा होरु सउणा खुसी खुआरु॥

जितु सुतै तनु पीड़ीऐ मन महि चलहि विकार॥ ॥रहाउ॥

दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी

दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी जल बिनु उतभुज कामि नाही।

किआ सुलतानु सलाम विहूणा अंधी कोठी तेरा नामु नाही॥

की बिसरहि दुखु बहुता लागै। दुखु लागै तूं विसरु नाही॥ ॥रहाउ॥

अखी अंधु जीभ रसु नाही कंनी पवणु न वाजै।

चरणी चलै पजूता आगै विणु सेवा फल लागै॥

अखर बिरख बाग भुइ चोखी सिंचत भाउ करेही।

सभना फलु लागै नामु एकौ बिनु करमा कैसे लेही॥

जेते जीउ तेते सभि तेरे विणु सेवा फलु किसै नाही।

दुखु सुख भाणा तेरा होवै विणु नावै जीउ रहै नाही॥

मति विचि मरणु जीवणु होरु कैसा जा जीवा तां जुगति नही।

कहै नानकु जीवाले जीआ जह भावै तह राखु तुही॥

माइ बाप को बेटा नीका

माइ बाप को बेटा नीका ससुरै चतुरु जवाई।

बाल कंनिआ कौ बापु पिआरा भाई कौ अति भाई॥

हुकमु भइआ बाहरु घरु छोडिआ खिन महि भई पराई।

नामु दानु इसनानु न मनमुखि तितु तनि धूड़ि धुमाई॥

मनु मानिआ नामु सखाई।

पाड़ परउ गुर कै बलिहारै जिनि साची बूझ बुझाई॥ रहाउ॥

जग सिउ झूठ प्रीति मनु बेधिआ जन सिउ वादु रचाई।

माइआ मगनु अहिनिसि मगु जोहै नामु न लेवै मरै बिखु खाई॥

गंधण वैणि रता हितकारी सबदै सुरति न आई।

रंगि न राता रसि नही बेधिआ मनमुखि पति गवाई॥

साध सभा महि सहजु न चाखिआ जिहबा रसु नही राई।

मनु तनु धनु अपुना करि जानिआ दर की ख़बर न पाई॥

अखी मीटि चलिआ अंधिआरा घरु दरु दिसै न भाई।

जम दरि बाधा ठउर न पावै अपुना की कमाई॥

नदरि करे ता अखी वेखा कहणा कथनु न जाई।

कंनी सुणि सुणि सबदि सलाही अमृतु रिदै वसाई॥

निरभउ निरंकारु निरवैरु पूरन जोति समाई।

नानक गुर विणु भरमु न भागै सचि नामि वडिआई॥

तू प्रभ दाता दानि मति पूरा

तू प्रभ दाता दानि मति पूरा हम थारे भेखारी जीउ।

मै किआ मागउ किछु थिरु न रहाई हरि दीजै नामु पिआरी जीउ॥

घटि घटि रवि रहिआ बनवारी।

जलि थलि महीअलि गुपतो वरतै गुर सबदी देखि निहारी जीउ॥ रहाउ॥

मरत पइआल अकासु दिखाइओ गुरि सतिगुरि किरपा धारी जीउ।

सो ब्रह्मु अजोनी है भी होनी घट भीतर देखु मुरारी जीउ॥

जनम मरन कउ इहु जगु बपुड़ो इनि दूजै भगति विसारी जीउ।

सतिगुरु मिलै त गुरमति पाईऐ साकत बाजी हारी जीउ॥

सतिगुर बंधन तोड़ निरारे बहुड़ि न गरभ मझारी जीउ।

नानक गिआन रतनु परगासिआ हरि मनिवसिआ निरंकारी जीउ॥

अमलु करि धरती बीजु सबद करि

अमलु करि धरती बीजु सबद करि सच की आब नित देहि पाणी।

होइ किरसाणु ईमानु जंमाइ लै भिसतु दोजकु मूड़े एव जाणी॥

मतु जाण सहि गली पाइआ।

माल कै भाणै रूप की सोभा इतु बिधी जनमु गवाइआ॥ ॥रहाउ॥

ऐब तनि चिकड़ो इहु मनु मीडको कमल की सार नही मूलि पाई।

भउरु उसतादु नित भाखिआ बोले किउ बूझै जानह बुझाई॥

आखणु सुनणा पउण की बाणी इहु मनु रता माइआ।

खसम की नदरि दिलहि पसिंदे जिनी करि एकु धिआइआ॥

तीह करि रखे पंज करि साथी नाउ सैतानु मतु कटि जाई।

नानकु आखै राहि पै चलणा मालु धनु कितकु संजिआही॥

काइआ कागदु मनु परवाणा

काइआ कागदु मनु परवाणा। सिर के लेखन पड़े इआणा॥

दरगह घड़ीअहि तीने लेख। खोटा कमि न आवै वेखु।

नानक जे विचि रूपा होइ। खरा खरा आखै सभु कोइ॥ रहाउ॥

कादी कूड़ु बोलि मलु खाइ। ब्राहमणु नावै जीआ घाइ॥

जोगी जुगति न जाणे अंधु। तीने ओजाड़े का बंधु॥

सो जोगी जो जुगति पछाणै। गुर परसादी एको जाणै॥

काजी सो जो उलटी करै। गुर परसादी जीवतु मरै॥

सो ब्राहमणुजो ब्रहम बीचारै। आपि तरै सगले कुल तारै॥

दानसबंदु सोई दिलि धोवै। मुसलमाणुसोई मलु खोवै॥

पड़िआ बूझै सो परवाणु। जिसु सिरि दरगह का नीसाणु॥

भांडा धोइ बैसि धूपु

भांडा धोइ बैसि धूपु देवहु तउ दूधै कउ जावहु।

दूधु करम फुनि सुरति समाइणु होइ निरास जमावहु॥

जपहु त एको नामा। अवर निराफल कामा॥ रहाउ॥

इहु मनु ईटी हाथि करहु फुनि नेत्रउ नीद न आवै।

रसना नामु जपहु तब मथीऐ इन बिधि अंमृत पावहु॥

मनु संपटु जितु सतसरि नावणु भावन पाती तृपति करे।

पूजा प्राण सेवकु जे सेवे इन्ह बिधि साहिबु रवतु रहै॥

कहदे कहहि कहे कहि जावहि तुम सरि अवरुन कोई।

भगतिहीणु नानकु जनु जंपै हउ सालाही सचा सोई॥

दीवा मेरा एकु नामु

दीवा मेरा एकु नामु दुखु विचि पाइआ तेलु।

उनि चानणि ओह सोखिआ चुका जम सिउ मेलु॥

लोका मत को फकड़ि पाइ।

लख मड़िआ करि एकठे एक रती ले भाहि॥ ॥रहाउ॥

पिंड पतलि मेरी केसउ किरिआ सचु नामु करतारु।

ऐथै ओथै आगै पाछै एहु मेरा आधारु॥

गंग बनारसि सिफति तुमारी नावै आतम राउ।

सचा नावणु तां थीऐ जां अहिनिसि लागै भाउ॥

इक लोकी होरु छमिछरी ब्राहमणु वटि पिंडु खाइ।

नानक पिंडु बखसीस का कबहूं निखूटसि नाहि॥

करम करतूति बेलि बिसथारी

करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूवा।

तिसु रूपु न रेख अनाहदु बाजै सबद् निरंजनि कीआ॥

करे वखिआणु जाणै जे कोई। अंमृतु पीवै सोई॥ ॥रहाउ॥

जिन्ह पीआ से मसत भए है तूटे बंधन फाहे।

जोती जोति समाणी भीतर ता छोडे माइआ के लाहे॥

सरब जोति रूपु तेरा देखिआ सगल भवन तेरी माइआ।

रारै रूपि निरालमु बैठा नदरि करे विचि छाइआ॥

बीणा सबदु बजावै जोगी दरसनि रूपि अपारा।

सबदि अनाहदि सो सहु राता नानकु कहै विचारा॥

मोती त मंदर ऊसरहि

मोती त मंदर ऊसरहि रतनी त होहि जड़ाउ।

कसतूरि कुंगू अगरि चंदनि लीपि आवै चाउ॥

मतु देखि भूला वीसरै तेरा चिति न आवै नाउ।

हरि बिनु जीउ जलि बलि जाउ॥

मैं आपणा गुरु पूछि देखिआ अवरु नाही थाउ॥ ॥रहाउ॥

धरती न हीरे लाल जड़ती पलघि लाल जड़ाउ।

मोहणी मुखि मणी सोहै करे रंगि पसाउ॥

मतु देखि भूला वीसरै तेरा चिति न आवै नाउ॥

सिधु होवा सिधि लाई रिधि आखा आउ।

गुपतु परगटु होइ बैसा लोकु राखै भाउ॥

मतु देखि भूला वीसरै तेरा चिति न आवै नाउ॥

सुलतानु होवा मेलि लसकर तखति राखा पाउ।

हुकमु हासलु करी बैठा नानका सभ वाउ॥

मतु देखि भूला वीसरै॥

माता मति पिता संतोखु

माता मति पिता संतोखु। सतु भाई करि सहु विसेखु॥

कहणा है किछु कहणु न जाइ। तउ कुदरत की मति नही पाइ॥ ॥रहाउ॥

सरम सुरति दुइ ससुर भए। करणी कामणि करि मन लए॥

साहा संजोगु वीआहु विजोगु। सचु संतति कहु नानक जोगु॥

जेता सबदु सुरति धुनि तेती

जेता सबदु सुरति धुनि तेती जेता रूपु काइआ तेरी।

तू आपे रसना आपे बसना अवरु न दूजा कहउ माई॥

साहिबु मेरा एको है। एको है भाई एको है॥ ॥रहाउ॥

आपे मारे आपे छोड़ै आपे लेवै देइ।

आपे वेखै आपे विगसै आपे नदरि करेइ॥

जो किछु करणा सो करि रहिआ अवरुन करणा जाई॥

जैसा वरतै तैसो कहीऐ सभ तेरी वडिआई॥

कलि कलवाली माइआ मदु मीठा मनु मतवाला पीवतु रहै।

आपे रूप करे बहु भांती नानकु बपुड़ा एव कहै॥

रुति आईले सरस बसंत माहि।

रुति आईले सरस बसंत माहि। रंगि राते रवहिसि तेरै चाइ।

किसु पूज चड़ावउ लगउ पाई॥

तेरा दासनिदासा कहउ राई। जगजीवन जुगति नमिलै काइ॥ रहाउ॥

तेरी मूरति एका बहुतु रूप। किसु पूज चड़ावउ देउ धूप॥

तेरा अंतु न पाइआ कहा पाई। तेरा दासनिदासा कहउ राइ॥

तेरे सठि संबत सभि तीरथा। तेरा सचु नामु परमेसरा॥

तेरी गति अविगति नहीं जाणीऐ। अणजाणत नामु वखाणीऐ॥

नानकु वेचारा किआ कहै। सभु लोकु सलाहे एकसै॥

सिरु नानक लोकापाव है। बलिहारी जाउ जेते तेरे नाव है॥

सोई मउला जिनि जगु मउलिआ

सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारा।

आब खाकु जिनि बंधि रहाई धंनु सिरजणहारो॥

मरणा मुला मरणा। भी करतारहु डरणा॥ ॥रहाउ॥

ता तू मुला ता तू क़ाज़ी जाणहि नामु ख़ुदाई।

जे बहुतेरा पड़िआ होवहि को रहै न भरीऐ पाई॥

सोई क़ाज़ी जिनि आपु तजिआ इकु नामु कीआ आधारो।

है भी होसी जाइ न जासी सचा सिरजणहारो॥

पंज वखत निवाज़ गुज़ारहि पड़हि कतेब कुराणा।

नानकु आखै गोर सदेई रहिओ पीणा खाणा॥

आवहु भैणे गलि मिलह

आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह।

मिलि कै करह कहाणीआ संम्रथ कंत की आह॥

साचे साहिब सभि गुण अउगण सभि असाह॥

करता सभु को तेरै जोरि।

एकु सबदु बीचारीऐ जा तू ता किआ होरि॥रहाउ॥

जाइ पुछहु सोहागणी तुसी राविआ किनी गुणी।

सहजि संतोखि सीगारीआ मिठा बोलणी॥

पिरु रीसालू ता मिलै जा गुर का सबदु सुणी॥

केतीआ तेरीआ कुदरती केवड तेरी दाति।

केते तेरे जीअ जंत सिफति करहि दिनु राति॥

केते तेरे रूप रंग केते जाति अजाति॥

सचु मिलै सचु ऊपजै सचु महि साचि समाइ।

सुरति होवै पति ऊगवै गुर बचनी भउ खाइ॥

नानक सचा पातिसाहु आपे लए मिलाइ॥

विदिओ वीचारी तां परउपकारी

विदिओ वीचारी तां परउपकारी। जां पंच रासी तां तीरथ वासी॥

घुंघरू वाजे जे मनु लागै। तउ जमु कहा करे मो सिउ आगै॥ ॥रहाउ॥

आस निरासी तउ संनिआसी। जांजतु जोगी तां काइआ भोगी॥

दइआ दिगंबरु देह वीचारी। आपि मरै अवरा नह मारी॥

एकु तू होरि वेस बहुतेरे। नानकु जाणै चोज न तेरे॥

चोरु सलाहे चीतु न भीजै

चोरु सलाहे चीतु न भीजै। जे बदी करे ता तसू न छीजै॥

चोर की हामी भरे न कोइ। चोरु कीआ चंगा किउ होइ॥

सुणि मन अंधे कुते कूड़िआर। बिनु बोले बुझीऐ सचिआर॥ रहाउ॥

चोरु सुआलिउ चोरु सिआणा। खोटे का मुलु एकु दुगाणा॥

जे साथि रखीऐ दीजै रलाइ। जो परखीऐ खोटा होइ जाइ॥

जैसा करे सु तैसा पावै। आपि बीजि आपे ही खावै॥

जे वडिआईआ आपे खाइ। जेही सुरति तेहै राहि जाइ॥

जे सउ कूड़ीआ कूड़ कबाड़ु। भावै सभु आखउ संसारु॥

तुधु भावै अधी परवाणु। नानक जाणै जाणु सुजाण॥

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