कविवर श्री भूधरदासजी के भजन लिरिक्स : Kavivar Shri Bhudhardasji ke Bhajan -3
होरी खेलौंगी, घर आये चिदानंद कन्त
(राग धमाल सारंग)
होरी खेलौंगी, घर आये चिदानंद कन्त ।।टेक ।।
शिशिर मिथ्यात गयो आई अब, कालकी लब्धि बसन्त ।।होरी. ।।
पिय सँग खेलनको हम सखियो! तरसीं काल अनन्त ।
भाग फिरे अब फाग रचानों, आयो बिरहको अन्त ।।१ ।।होरी. ।।
सरधा गागरमें रुचिरूपी, केसर घोरि तुरन्त ।
आनँद नीर उमंग पिचकारी, छोड़ो नीकी भन्त ।।२ ।।होरी. ।।
आज वियोग कुमति सौतनिकै, मेरे हरष महन्त ।
`भूधर' धनि यह दिन दुर्लभ अति, सुमति सखी विहसन्त ।।३ ।।होरी. ।।
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