फौजी मेहर सिंह की रागनियां भजन व मुक्तक : Fauji Mehar Singh Ki Ragini Likhit 1
फौजी मेहर सिंह हरियाणवी लोकसाहित्य और रागनी परंपरा के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनका संबंध हरियाणा की लोकभाषा और ग्रामीण जीवन से था। उनकी रचनाओं में सामाजिक जीवन, देशभक्ति, वीरता, नीति, प्रेम और आम लोगों से जुड़े विषय देखने को मिलते हैं। उन्होंने रागनी और मुक्तक जैसी लोकविधाओं के माध्यम से अपनी बात सरल और प्रभावशाली ढंग से लोगों तक पहुँचाई। लोकभाषा में लिखी उनकी रचनाएं आज भी हरियाणवी लोकसाहित्य की परंपरा में याद की जाती हैं।
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| Fauji Mehar Singh hariyana |
खूनी पकड़ रहया सरकार नै छन्द समझणियां नै टोहवै : मेहर सिंह
खूनी पकड़ रहया सरकार नै छन्द समझणियां नै टोहवै।टेकमींह बरसै जब सुकै गारा, शेर घेर बकरी नै मारया,
छिपग्या सुरज होया दोफारा,
चाकी दली गवार नै पीसण आली भी सौवै।
धेनु गाय लिकड़ी थी घी मैं
रोटी ठा माणस नै जीमैं
सुई भी दर्जी नै सीमै
घोड़ा पीट रहा असवार नै बीज हाली नै बोवै।
धरती तलै एक बादल गरज्या
अन्न खा ले तै माणस मरज्या
चोर नै धन गाड कै धर ज्या
पापी सजा दे करतार नै यमराज खड़या हो रोवै।
पिता के संग एक पुत्री ब्याही
उस पुत्री नै माता जाई
मरग्या पिता मौत न आई
मेहर सिंह मूढ़ गंवार नै छन्द तार दिया कती चौवै।
होगे मर्द गुलाम बीर के घर मैं राज लुगाई का : मेहर सिंह
मां का राज ना बाप की चौधर प्यार रहा ना भाई काहोगे मर्द गुलाम बीर के घर मैं राज लुगाई का।टेक
मां का राज बहूं नै ले लिया चार्ज घर की ताली का
आच्छी भूण्डी छोरा बक दे कह्या मान कै चाली का
घर के धन नै साले बरतैं कुड़ता सिमता ना हाली का
खाली हाथ बहाण चाली जा सूट सिमा दें साली का
सास ससुर भी निस्तरगे जो खाज्यां माल जमाई का।
भाई का भाई बैरी होग्या नाड़ काट ले सूते की
बहु जेठ नै कैह लिकड़ज्या ना पाडुं मुंछ अनपूते की
मात पिता की कद्र इसी जणुं टूक चुगाऊं कुत्ते की
इसी बीर को मर्द फेर भी नौंक चाट ले जूते की
ये सांझै सिर नै बांध कै पड़ज्यां ले ओडा ताप नबाई का।
मां बापां कै तोहमद ला दें बोलैं झूठ डरैं कोन्या
खून पी लिया घर खा लिया फिर भी कितै मरै कोन्या
मां बापां का कह्या काम ये बेटा बेटी करैं कोन्या
बहु और छोरा कदे भूल कै चरणां शीश धरैं कोन्या
घर का मन्दिर छोड़ कै पूजैं मन्दिर देवी माई का।
आज काल के छैल गाबरू किसे बणे ठणे हांडैं सैं
घर में भूसे कला करैं ये साहब तणे हांडैं सैं
दारू सुलफा गांझा पीवै घणे जणे हांडैं सैं
मेहर सिंह तू के गावैगा ये कवि घणे हांडैं सैं
लखमीचन्द बणे हांडैं सैं पर बेरा ना कविताई का।
कर कै नेत्र लाल द्रोपद बात कह मत बोदी : मेहर सिंह
घरां बिराणै लड़न लागगी तनै कती करी ना सोधीकर कै नेत्र लाल द्रोपद बात कह मत बोदी।टेक
आज पति नै शाल बतावै तनै कती शर्म ना आई
उस दिन नै गई भूल द्रोपद चीर बांध कै ब्याही
दुर्योधन को अन्धा कैह कै पाणी में आग लगाई
तेरे कारण पांचों पांडों भरते फिरै तवाई
करी जेठ संग तनै अंघाई या तै इज्जत म्हारी खो दी।
दुर्योधन कै ताना मार्या कैहकै कड़वा बोल परी
मन मैं जाल जूए का बण कै कर दिया बिस्तर गोल परी
शकुनि धोरै धर्मराज की खुलवा दी कती पोल परी
उसी तरह से आज मेरा तूं रही कालजा छोल परी
ईब दिखा द्यूं खोल परी जो या बेल नाश की बो दी।
कस कस ताने मत मारै ना बोल सह्या जावैगा
जिस नै कैह सैं आज हिजड़ा वो रण मैं धूम मचावैगा
धनुष बाण ले अपने कर तै शीश काट कै ल्यावैगा
पहल्यां केश धुलां दे तेरे फेर बेटे ने ब्याहवैगा
आकै तनै दिखावैगा थारी कितनी खाली गोदी।
बिगड़ी मैं ज्ञानी माणस भी मुर्ख पै कान कटा ले
कैह कै कड़वे बोल द्रोपद अपणी हवस मिटा ले
टैम आए पै तनै दिखा द्यू बाणैं सैकड़ों साले
लखमीचन्द की कृपा तै तू काट जाप के ना ले
जाट मेहर सिंह औम मना ले या तै रांड़ भतेरी झोली।
भई की आब शिखर मैं हो तै जल्या नहीं करते : मेहर सिंह
खरे आदमी मुहे पै कैह दें टल्या नहीं करते।भई की आब शिखर मैं हो तै जल्या नहीं करते।टेक
ईज्जत मान पुत्र धन मिलता कर्मां के बांटे तै
गृहस्थी जन्म सफल होज्या सै अतिथि डाटे तै
कुल की आन रेत मैं रल ज्या कुणबे के पाटे तै
घरबारी कै बट्टा लागै सै भूखे नै नाटे तै
औरां का गल काटे तै कदे फल्या नहीं करते।
ये तीनों चीज मर्द बिन सुनी धरती, धन और घोड़ी
दुनियां में कितै मिलती कोन्या काग हंस की जोड़ी
जो अपणी आप बड़ाई करते हो उन की ईज्जत थोड़ी
बैरी कांटा रड़कै रात नै जैसे आंख में रोड़ी
पत्थरां कै म्हां लाल किरोड़ी कदे रला नहीं करते।
जिन की रयत सुख पावै हो भक्ति सफल नृप की
शुद्ध बाणी के बाल उच्चारण हो सै पकड़ हरफ की
जो मिल कै दगा करै प्यारे तै भोगै जगह सर्प की
ये पांडव रोज जिक्र करते हैं दुर्योधन तेरे तरफ की
हो राजा पाझार ढ़ाल बर्फ की गल्यां नहीं करते।
कर्मां के अनुसार करैं सब अपणे अपणे धन्धे नै
किसै की जिनस मंहगी बिकज्या कोए रोवै मन्दे नै
बड़े बड़यां के मन मोह लिए इस माया के फन्दे नै
कह मेहर सिंह वो पणमेशर नेत्र दे अन्धे नै
अपणे तै हिणे बन्दे नै कदे दल्या नहीं करते।
बैरक कै म्हां पड़े पड़े कै याद अंगुरी आगी : मेहर सिंह
के सुपने का जिक्र बात एक याद जरूरी आगीबैरक कै म्हां पड़े पड़े कै याद अंगुरी आगी।टेक
सुपने में सुसराड़ डिगरग्या मन मैं घणा उम्हाया
ताता पाणी करवा कै नै बैठ पाटडै़ न्हाया
छोटा साला न्यूं बोल्या जीजा रोटी खाया
मेरी सासू ने प्रेम मैं भर कै जड़ में बैठ जमाया
मेरे खाण नै थाली कै म्हां हलवा पुरी आगी।
जीजा तै बतलावण खातर कट्ठी होगी साली
कोए गोरी कोए स्याम वर्ण की कोए भूरी कोए काली
भटक भटक कै बतलावैं थी कर कै नजर कुढ़ाली
मनै घूर घूर कै देखण लागी कर कै नजर निराली
रूकमणी प्यारी और चन्दुई वा झट कस्तूरी आगी।
एक जणी नै करी नमस्ते एक नै करी प्रणाम
दिल का भेद बता दे जीजा खोल कै तमाम
मीठी मीठी बात करैं थी कर कै जिगर मुलाम
हाथ जोड़ कै न्यू बोली हो म्हारे गोचरी काम
बोल पडै नै धरसी के के इसी जरूरी आगी।
सुपने कै म्हां तरहां तरहां के दे ज्यां ठाठ दिखाई
मेरे साला साली कट्ठे होा रे कुछ ठोले की लुगाई
आंख खुली जब कुछ ना दिखा कुछ ना दिया दिखाई
मेरे चौगरदे कै लडधु सोवैं वाहे बैरक पाई
कैह मेहर सिंह सतगुरु की दया तै शर्म हजूरी आगी।
बिन भूमि जमीदारा सूना बिन बालम के गौरी : मेहर सिंह
बिना बाप का बेटा सूना बिन माता के छोरीबिन भूमि जमीदारा सूना बिन बालम के गौरी।टेक
बिना बाप के बेटे नै कोए आछी भूण्डी कैहज्या
थप्पड़ घुस्से लात मार दे वो बैठ्या बैठ्या सैहज्या
मन मैं उठैं झाल समन्दर आख्यां कै म्हा बैहज्यां
जिस का मरज्या बाप वो बेटा चन्दा की ज्यूं गहज्या
कर कै याद पिता नै रोवै या काया काची कोरी।
बिन माता की छोरी की तै रहज्या मन की मन मैं
ओढ़ण पहरण खाण पीण तै कती रहती मैले तन मैं
के जीणा उस बालक का जिसकी मां मरज्या बचपन में
साबत रात आंख ना लागै सपने आवै दिन मैं
मात बिना रै ऐसी लागै जैसे चन्दा बिना चकोरी।
तीसरी कली नहीं मिली
बिन बालम की गौरी का तै फिकाए बाणा हो सै
आछी भूण्डी कैह कै उस तै पाप कमाणा हो सै
मनै जाट के घर में जन्म लिया घणा न्यूं शर्माणा हो सै
जाट मेहर सिंह साज बिना तै कुछ ना गाणा हो सै
साची बात बखत में कह दे उस साची मैं के चोरी।
गरीब किसान की जिन्दगी क्युकर बितै सै मर पड़कै : मेहर सिंह
देख रोंगटे खड़े होगे या मेरी छाती धड़कैगरीब किसान की जिन्दगी क्युकर बितै सै मर पड़कै।टेक
गर्मी म्हं आकाश तपै सै कोरी आग बरसती
निचै धरती आग उगलती दुनिया पड़ै तरसती
पाट्टी धोती टूट्टे लित्तर पेट म्हं आग सिलगती
शिखर दुफारी पड़े पसीना छातां कैड ना दिखती
आधी रात तक पाणी बाहवै फेर भी उठै तड़कै।
सामण भादवा और क्यार म्हं बादल जोर के छारे
बिजली चमकै बादल गरजै सारे शोर मचारे
गेंड़वे मिंढ़क कान सुलाई फिरै खेत म्हं सारे
सांप संपोलिया बिच्छू बिसीयर फन ऊपरनै ठारे
कांधै कस्सी हाथ म्हं रस्सी चालै गोडयां पाणी म्हं बड़कै।
मंगसर पोह म्हं बर्फ पड़ै सै आक तलक मुरझावै
पाट्या कुड़ता दोहर पुराणी खेतां म्हं पैदल जावै
ऊपर पाला निचै पाणी हाथ म्हं कस्सी ठावै
थर-थर कांपैं जाड़ी बाजै जाड्डा पाड़ के खावै
सुख का सांस कदे ना आवै खाट म्हं पड़ै अकड़ कै।
राज काज सब इसके ऊपर जो शासन सरकार करै
सारी मण्डी मील तिजारत छोटा बड़ा व्यापार करै
कपड़ा लत्ता नाज दाल और धनियां मिर्च तैयार करै
एक मिनट बी सरै ना इस बिन फेर बी ना कोए प्यार करै
जाट मेहर सिंह सोच फिकर म्हं तेरी अंखियां फड़कै।
कुछ जाणता हो तै हाथ देखीऐ मेरा : मेहर सिंह
कुछ जाणता हो तै हाथ देखीऐ मेरा।टेकक्यूं सूर्य कै गैहण लाग्या क्यूं चन्द्रमा के लागी स्याई
ऋतुभान ग्यारह रुद्र कर कै बैठे सात सभाई
समझ सकै तै पड़वा दोज सोमवती मावस कैसे आई
काणे के घरां जाकै ईद मनावण चाली
तेरह महीने वर्ष समझ सका ना छली
मूढ़ कति दती द्वार किले की पाईना तानी
मेरे प्रश्न का उत्तर दे क्यों फीका पड़ग्या चेहरा।
सीता ठाई किस तारिख नै वा तिथी खोल कै लिखदे वार
कै महीने कै दिन रही वा रावण के दरबार
मारीच बण्या था मृग स्वर्ण का कोणसा था वो दिन और वार
रेखा तै देख मेरी जै कुछ तेरी बुद्धि मैं विचार हो
संगत कुणसी आछी जहां देवत्यां का प्रचार हो
इस का उत्तर नहीं तै इस गंगा जी तै बाहर हो
इस ज्योतिष का ज्ञान लगा दे तरै बन्ध ज्यागा सेहरा।
चार वेद छः शास्त्र तूं ठा रहा तै गिणा दे पुराण
ऐसा देव कुणसा है जो सृष्टि को लाग्या खाण
ये पोथी पतरे बन्द कर दे ना तन्नै क्यांहे की जाण
तीज तै मनाई क्यूं सामण का व्यवहार क्या
मद में हो कै मोर नाचै ऋतु की बहार क्या
कितने मौसम साल मैं कितने हैं त्यौहार क्या
ना मैं तेरी गंगा जी तै कती ठा द्यूंगा डेरा
तम कितना कौम के ब्राहमण सो कितनी है थारी नस्ल बता
सारी सोच सोच कै असल बता
इस ज्योतिष का ज्ञान लगादे कर कै नै कुछ अकल बता
उड़ै दहिया कै म्हां आ जाईए जड़ै बसै सै गाम बरोना
तेरी ज्योतिष का भेद बता द्यूं जणुं टाली मैं रोना
बखत डूब ज्या कदे हंसा दे कदे पड़ज्या सै रोना
मेहर सिंह तूं बूझ लिए जड़ै बंधै गुरु के सेहरा।
आड़ै डर डर कै मर ज्यांगी पिया देख कै घटा घन घोर नै : मेहर सिंह
फौज मैं जाकै भूल मत जाईये अपणी प्रेमकौर नैआड़ै डर डर कै मर ज्यांगी पिया देख कै घटा घन घोर नै।
तेरे बिना पिया इस घर मैं लागै घोर अन्धेरा
ग्राम बरोणे मैं तेरे बिना म्हारा होजया उजड़ डेरा
जैसे चन्दा बिना चकोरी सूनी न्यूं सूना घर मेरा
रही ठाण पै कूद बछेरी कित चाल्या गया बछेरा
मेरा फिका पड़ग्या चेहरा क्यूं लूटै मेरे त्यौर नै।
शाम सवेरी मनै अकेली नै खेतां कै म्हां जाणा हो
बदमाशां की टोली घूमैं मुश्किल गात बचाणा हो
नहीं मौत का कोए भरोसा घटज्या माल बिराणा हो
तेरी खातिर में रहूं जींवती जब लग पाणी दाणा हो
बिना मोरनी कूण नचावै इस रंग रंगीले मोर नै।
पतला गात बैत ज्यूं लरजै जणुं बाड़ी खिलरी जोर की
सूए बरगी नाक पिया की गर्दन मेरी मोर की
काली गऊ सूं पिया मैं देखुं बाट खोर की
होट गुलाबी चमकैं सैं जणुं बिजली घन घोर की
कठ पुतली की तरियां नाचूं जब तूं हिलावै डोर नै।
दर्जी पै सिमवाइये मेरा लेडी मैटर सूट पिया
पायां कै म्हां पहरादे उंची ऐडी के बूट पिया
दम दम कर कै चालूंगी जणुं कोए फौजी रंगरूट पिया
तेरे बिना क्यूंकर जीऊं भरूं सबर की घूंट पिया
मेहर सिंह तू भूल मत जाइये अपणी चित चोर नै।
हल छूटग्या तै सब मिट ज्यांगे जितने फैल लागरे : मेहर सिंह
राजा रईयत लखपति सब देख तेरी गैल लागरेहल छूटग्या तै सब मिट ज्यांगे जितने फैल लागरे।टेक
तनैं भोले पन म्हं धन खोया तेरी मिचगी आंख जाग म्हं
पाट्टे कपड़े टूट्टे लित्तर गन्ठा रोटी भाग म्हं
साहूकार कै छौंक लगै तेरै आलण पड़ै ना साग म्हं
तेरी बीर ज्वारा ढोवै सिठाणी सूंघै फूल बाग म्हं
तनैं सोवण नै खाट थ्यावै ना उनकै रूई के सैं पहल लागरे।
घर घर वेद उचारण तनै फूट बिमारी खोगी
बैलां ऊपर फैल भारत की किस्मत सोगी
तनैं रोटी तक ना मिलै खाण नै इसी दुर्गती होगी
टोटे म्हं फेर करी नौकरी उड़ै ये मुसीबत भोगी
बिन आई मौत फौज म्हं तेरे मरण छैल लागरे।
आवै साढ़ फेर माणस मिलै ना तम हाली खातर दौड़ो
के कागज नै फुक्कोगे के आपणी किसमत फोड़ो
ऐड़ी तक थारै आवै पसीना बल्दां की पूंछ मरोड़ो
पुंजीपति ना हल बहावै कर सेठाणी नै जोड़ो
90 रुपये मण तोल तुला तम बेचण बैल लागरे
सत के बैल प्रेम तैं जोड़ों स्वर्ग म्हं बास करोगे
गऊ माता की सेवा तज कै आपणा नास करोगे
ज्यादा दुखी करोेगे तो तम बी दुःख के सांस भरोगे
घी दूध दही अन्न किततै आवै फेर के घास चरोगे
गुरु ज्ञान का सामण ल्याया मेहर सिंह काटण मैल लागरे।
दिन ढलज्या जब फेर खेत नै बाह लिए हाली : मेहर सिंह
मैं कदकी रूक्के दे रही तूं रोटी खा लिए हालीदिन ढलज्या जब फेर खेत नै बाह लिए हाली।टेक
बोल दिये जब बोल्या कोन्या दे लिए बोल हजार मनैं
रोटी पाणी भर्या छाबड़ा मुश्किल तार्या न्यार मनैं
बारा बज कै दो बजगे जाणें नै हो सै बार मनैं
सारे पड़ोसी जा लिए ईब तूं भी चालिए हाली।
एक मील तैं रोटी ले कै बड़ी मुश्किल तैं आई मैं
हाली गेल्या ब्याह करवा कै बहोत घणी दुःख पाई मैं
मत रेते बीच रलावै पिया पन्नेदार मिठाई मैं
तेरे मरते बैल तिसाये तूं पाणी प्या लिए हाली।
बैठ आम कै निचै पिया मैं तेरी सेवा कर द्यूंगी
मिठी-मिठी बातां तै तेरा सारा पेटा भर द्यूंगी
मनैं जी तैं प्यारा लागै सै मैं गात तोड़ कै धर द्यूंगी
तेरी हूर खड़ी मटकै सै तूं गल कै ला लिए हाली।
गर्मी पड़ती लू चालै सैं पड़ै कसाई घाम किसा
दोफारी म्हं भी टीकता कोन्याा जुल्मी सै तेरा काम किसा
फूंक दिया सै गात मेरा जुल्मी सै यो राम किसा
तूं मेहर सिंह की सीख रागनी गा लिए हाली।
शर्म बिन लाज, लाज बिन मतलब, मतलब बिन कोए यार नहीं : मेहर सिंह
अश्क बिना ईश्क, ईश्क बिना, आशिक, आशिक बिना संसार नहींशर्म बिन लाज, लाज बिन मतलब, मतलब बिन कोए यार नहीं।टेक
धन बिन दान, दान बिन दाता, दाता बिन जर सुन्ना है
सत बिन मर्द, मर्द बिना तिरया, तिरया बिन घर सुन्ना है
रण बिना सूरा, सूरे बिना तेगा, तेगे बिन कर सुन्ना है
तप बिन कर्म, कर्म बिन किस्मत, किस्मत बिन नर सुन्ना है
हठ बिन हार, हार बिन हाणी, हाणी बिन हुश्यार नहीं।
शशि बिन रैन, रैन बिन तारे, तारां बिन गगन सुन्ना है
मोह बिन मेर, मेर बिन ममता, ममता बिन मन सुन्ना है
गुल बिन बाग, बाग बिन बुलबुल, ये सब गुलशन सुन्ना है
रंग बिन रूप, रूप बिन जोबन, जोबन बिन तन सुन्ना है
हक बिन हुक्म, हुक्म बिन हाकिम, हाकिम बिन हकदार नहीं।
मन बिन मेल, मेल बिन प्यारा, प्यारे बिन दो बात नहीं
जर बिन जार, जार बिन जारी, जारी बिन उत्पात नहीं
छल बिन द्वेश, द्वेश बिन कातिल, कातिल बिन कुलघात नहीं
सजनी बिन साजन, साजन बिन सजनी, सजनी रह एक साथ नहीं
दुःख बिन दर्द, दर्द बिन दुखिया, दुखिया बिन पुकार नहीं।
मोह बिन काम, काम बिन क्रोध, क्रोध बिन अभिमान नहीं
गुण बिन कदर, कदर बिन शोभा, शोभा बिन सम्मान नहीं
भजन बिन भगत, भगत बिन भगति, भगति बिन कल्याण नहीं
सुर बिन साज, साज बिन गाणा, गाणे बिन तुकतान नहीं
गुरु बिन ज्ञान, ज्ञान बिन मेहरसिंह, दहिया का सत्कार नहीं।
प्रथम उत्तर दे मेरी बात का जो विद्यावन्त कहावै : मेहर सिंह
अगर महफिल मैं कोए गाणा चाहवै।प्रथम उत्तर दे मेरी बात का जो विद्यावन्त कहावै।टेक
पहला प्रश्न सुण मेरा तनै बात सुणाद्यूं सारी
नहीं मात सै जनम लिया नहीं मर्द नहीं नारी
नहीं पति से ग्रहण किया दो सुत जामे बलकारी
वो लड़के महारथी राजा थे जाणैं दुनिया सारी
आड़ै आवण का अधिकार उसे जो इसका अर्थ लगावै।
वही मात वही स्त्री वहीं कंथ वही बेटा
वही गुरु पत्नि वही चेला वही कंथ हुया जेठा
वो नारी जबर जवान पति कुल ग्यारा दिन ना फेटया
एक पिता मां तीन गर्भ म्हं कित कितने दिन लेटया
भौकें तैं ना पार पड़ै क्यूं वृथा गाल बजावै।
वही बहु वही मामा की बेटी वही फुफस वही माता
वही भतीजी वही बुआ यो सास बहु का भी नाता
खड़्या सभा म्हं सहम गया तूं क्यूं ना भेद बताता
अकलबन्द बिन कोण अर्थ लगावै नुगरा पीठ दिखाता
म्हारे कथन पवित्र का भेद किसै मुर्ख नै कोन्या पावै।
एक लड़का एक लड़की जणदी जननी मरगी छन म्हं
उस लड़की के ब्याहवण खातर छतरी फिरे लगन म्हं
नहीं पति का मुंह देख्या नहीं नार के तन म्हं
गुरु लख्मी चन्द जाटी आला पास करै एक छन म्हं
मेहरसिंह के छंद सुणे बिन विद्या मूढ़ लखावै।
जगत म्हं देख्या है अजब तमाशा : मेहर सिंह
दो दिन का जीणा दुनिया म्हं है उनमान जरा साजगत म्हं देख्या है अजब तमाशा।टेक
ज्ञान की कर रोशनी क्यूं जाण कै अंधेर करता
सोच कै न चाल बन्दे घड़ी घड़ी देर करता
कुणबा तेरा प्यारा नहीं जिसकी तू मेर करता
चाचा रोवै ताऊ रोवै चाची रोवै और ताई
मात पिता दोनूं रोवैं पास के म्हां रोवै भाई
सारी जिन्दगी याद आवै घणी रोवै मां की जाई
तीन दिना तेरी त्रिया रोवै फेर करै घरवासा
जगत म्हं देख्या है अजब तमाशा।
उतां के म्हां बैठ कै नै सीख लई बुरी कार
नशे बाजी जुआ बाजी तास बाजी करली त्यार
चोरी और बदमाशी सीखी जब भी नहीं गई पार
जोड़ जोड़ रख लिया यो तेरा धन माल नहीं
सोच कै चाल मूर्ख आज तेरी काहल नहीं
एक दिन सबनै जाणा होगा काल आगै दाल नहीं
महल हवेली सब तेरे छुटज्यां हो शमशाणा म्हं बासा
जगत म्हं देख्या है अजब तमाशा।
भद्दी बातें छोड़कर शुभकर्म का ख्याल कर
पण्मेशर को ज्यान देणी बुरे कर्म की टाल कर
सारी बातें बुझी ज्यां धर्मराज कै चाल कर
बुद्धि है पास तेरे मन को चलाने वाली
सबसे बुरी बेईमानी ईंसा से गिराने वाली
जिसका तूं गुमान करता ये जिन्दगी है जाने वाली
दस इन्द्री और पांच विषय का घल्या गले म्हं फांसा
जगत म्हं देख्या है अजब तमाशा।
परमेश्र का भजन कर शरीर का उद्धार होगा
पापियों की नाव डूबै सत का बेड़ा पार होगा
ओउम-ओउम रटने से ज्ञान का विचार होगा
उसनै भी क्यूं भूल गया जिसनै तूं इंसान किया
मेहरसिंह सच्ची सच्ची बातों का ब्यान किया
गर्भ से निकल कर भुल्या चमड़े का गुमान किया
धर्मराज घर होंगे पापी तेरे बयान खुलासा
जगत म्हं देख्या है अजब तमाशा।
नुगरा माणस आंख बदलज्या समझणियां की मर हो सै : मेहर सिंह
ले कै दे दे करकै खाले उसतैं कोण जबर हो सैनुगरा माणस आंख बदलज्या समझणियां की मर हो सै।टेक
नुगरा चाले धरती हालै हर हंसान डरै उसतैं
महाभारत और भगवत गीता बेद कुरान डरैं उसतैं
धु्रव भगत और सप्तऋषि दीन ईमान डरैं उसतैं
और के ज्यादा जिक्र करूं वो खुद भगवान डरैं उसतैं
खानदान घर के बालक नै जात जाण का डरै हो सै।
परमेश्र नैं दो जात बणा दी एक टोटा एक साहूकारा
एक बेल कै दो फल लागैं एक मीठा एक खारा
जिसकै धोरै पैसे हों वो सबनें लागै प्यारा
जिस माणस कै टोटा आज्या भाई दे दुतकारा
टोटे के म्हं बालक बिकज्या फेर बिकण नै घर हो सै।
एक झुण्ड कै दो सरकण्डे करतब न्यारा-न्यारा
एक सरूबे की कलम बणे एक का घलज्या ढारा
एक माटी के दो बर्तन हों एक नमूना तार्या
एक म्हं घलता गन्दा पानी एक बणैं घी का बारा
बरते पाच्छै तोल पटै सै ना तो किसकै कोण बिसर हो सै।
आदम देह म्हं जनम ले लिया करकै खाणा चाहिये
गिरता गिरता माणस गिरज्या कितै ठिकाणा चाहिये
जिस भाई के काम ओटले वो प्रण निभाणा चाहिये
जाट मेहरसिंह गाया करै इसा दंगली गाणा चाहिये
जड़े घड़वें पै टीप बन्धै तेरा पहलम चोट जिक्र हो सै।
इन्सानां पै करा दिये भाई के-के काम बख्त नै : मेहर सिंह
सत की बांदी मिलै लक्ष्मी मतना छोड़ा सत नैइन्सानां पै करा दिये भाई के-के काम बख्त नै।टेक
एक बख्त म्हं राज मिल्या सुणो हरिशचन्द्र की कहाणी
एक बख्त म्हं रूक्का पड़ग्या कोन्या सत की बाणी
एक बख्त म्हं तीनों बिकगे लड़का राजा राणी
एक बख्त म्हं भरणा पड़ग्या घर भंगी के पाणी
आंसूं तै पड़ैं टूक घुटणे यो इसी बणादे गत नै।
एक बख्त म्हं नल राजा के मन की खिलगी बाड़ी
एक बख्त म्हं पासे बणकै नल की हवा बिगाड़ी
एक बख्त म्हं दमयन्ति के चाले कर्म अगाड़ी
एक बख्त म्हं इसी सुवादी बण म्हं काटी साड़ी
सोचै कुछ और करदे कुछ यो इसी मारदे मतनै।
एक बख्त म्हं तख्त हजारा रांझा पीर बनाया
एक बख्त म्हं पीर की गेल्यां रांझा हीर बनाया
एक बख्त म्हं पाली ला दिया सीर का चीर बनाया
एक बख्त म्हं छूट्या द्वारा परम फकीर बनाया
एक बख्त म्हं महल बना दे यो तलै गिरादे छत नैं।
एक बख्त म्हं पाणा पड़ज्या एक म्हं पड़ज्या खोणा
एक बख्त म्हं हंसणा पड़ज्या एक म्हं पड़ज्या रोणा
एक बख्त म्हं जागू रहणा एक म्हं पड़ज्या सोणा
एक बख्त म्हं मिली बरेली एक म्हं मिल्या बरोणा
यो मेहरसिंह नै भी बख्त सेधग्या पढ़-पढ़ रोया खत नैं।
बेरा ना कद लेवण आवै मेरी मां का खास जमाई हे : मेहर सिंह
हो रही सूं बेमार सखी ना करती असर दवाई हेबेरा ना कद लेवण आवै मेरी मां का खास जमाई हे।टेक
जोबन म्हं भरपूर नूर मेरा बिन साजन के झड़्या हुआ
दिन रात बेचैन रहूं मैं नाग प्रेम का लड़्या हुआ
मैं सूं सोने का गुलदस्ता असल माल का घड़्या हुआ
देखलूं मूंह बालम का होज्या कला सवाई हे।
जिनके बालम धौरे ना उनकी मुश्किल सर्दी हो
गैर बीर के प्रेम म्हं फंसकै आया ना बेदर्दी हो
सासु नणद जेठाणी नै कदै ना चुगली करदी हो
कै किसै सौक राण्ड नै मेरी झूठी गवाही भरदी हो
सुभा का तेज घणा गर्म सै मेरी नणदी का भाई हे।
ठीक नहीं पीहर म्हं रहणा खानदान की छोरी नै
कद चमकैगा चांद मेरा हरदम आस चकोरी नै
खावणियां कद खावैगा इस धौली खाण्ड की बोरी नैं
फोड़नियां कद फोड़ैगा इस माटी की हाण्डी कौरी नैं
बिन बालम के गौरी नै भरनी पड़ै तवाई हे।
मुश्किल होज्या रात काटणी बिन बनड़े के सून्नी सूं
सेज का सोवणियां आज्या तै चमकूं दूणी दूणी सूं
चिकणा गात मेरा मैं असली घी नूणी सूं
आम सरौली पकी डाल की मीठी ना मैं अलूनी सूं
मेहर सिंह तूं रहा चला मेरा जोबन जहाज हवाई हे।
कहै जाट तूं डूम हो लिया बाप मेरा बहकाया : मेहर सिंह
देश नगर घर गाम छूटग्या कितका गाणा गायाकहै जाट तूं डूम हो लिया बाप मेरा बहकाया।टेक
कातिक की पूर्णिमा नै गढ़ गंगा न्हाया करते
सारे छोरे कट्ठे हो कै गाणा गाया करते
जितने छोरे यार बास थे फेटण आया करते
उन दुष्टां नै के मिलग्या जो मनैं बुरा बताया करते
राम करै वो निर्वस जाइयों मैं हत्थे म्हं कटवाया।
रागणियां के बारै बाप नैं हाड़ लिये सब बट्टे
जितणे छोरे यार बास थे ना बैंठण दिये कट्ठे
हांसी मसकरी सब छूटगी मेरे छूटे उडाणे ठठ्ठे
जो दिन थे मेरे ईब नाहण के दिन बरेली मैं कट्टे
छोरे छारे नाहण चले मेरी आंख्या मैं पाणी आया।
अलबत तो मनैं होकै जाट यो गाणा गाणा ना था
बालक पण मैं कार सिखली फेर पछताणा ना था
पहलम तैं मनैं जाण नहीं थी मैं इतना स्याणा ना था
एक गलती खा बैठ्या मनैं ब्याह करवाणा ना था
ब्याह करवाएं पाच्छै लोगों मैं बहोत घणा पछताया।
इस दुनियांदारी म्हं रहकै मनैं मुलक देख लिए सारे
लगा जीभ कै छोड़ दिये ये ना मिठे ना खारे
तूं अधीनि तैं करें जा गुजारा मेहरसिंह जाट बिचारे
तेरी माया का बेरा कोन्या फल कर्मा के न्यारे
राजा तैं कगाल बणा दे हे ईश्वर तेरी माया।
बांध बिस्तरा चाल पड़्या कुछ बाकी रही ना तन म्हं : मेहर सिंह
छुट्टी के दिन पूरे होग्ये न्यू सोचण लाग्या मन म्हंबांध बिस्तरा चाल पड़्या कुछ बाकी रही ना तन म्हं।टेक
छाती कै ला कै माता रोई जिसनै पाल्या पोष्या जाम्यां था
बुआ बाहण पुचकारण लागी भाई भी रोया रांम्भ्या था
दरिया केसी झालउठती मनैं कालजा थांब्या था
छोटे भाई नै घी पीपी म्हं गून्द खाण का बांध्या था
न्यूं बोले दिये छोड़ नौकरी के दब कै मरैगा धन म्हं।
पिताजी खड़े दरवाजे म्हं उनकी कैन्ही चाल्या था
कोलै लागी मेरी बहू रोवै थी सांस सबर का घाल्या था
आँख्या के मैं नीर देख कै मेरा कालजा हाल्या था
न्यूं बोली पिया मेरे नाम का किसनै दिया हवाला था
गम खाकै नै पड़ी घरआली होश रही ना तन म्हं।
हाथ फेर कै पुचकार दई कुछ ना चाल्या जोर मेरा
छः महीने म्हं आल्यूंगा जै ना आया तो चोर तेरा
रस्ते मैं सुसराड़ पड़ै थी उड़ै बी लाग्या दौर मेरा
जीजा आया जीजा आया साला करता आया शौर मेरा
सासू नैं पुचकार दिया मेरै सीलक हुई बदन म्हं।
उड़ै रौटी तक भी खाई कोन्या करी चलण की त्यारी
जीजा जी कद आओगे न्यू बूझै साली प्यारी
म्हारे आंवण का बेरा ना तुम आस छोड़ दियो म्हारी
इतने एदिन की जोड़ी थी या थारे तैं रिश्तेदारी
मेरी लियो आखरी राम राम थारे कर चाल्या दर्शन म्हं।
टेशन ऊपर छोड़न खातर साला संग म्हं आया था
बाबू जी तैं करी नमस्ते बारंट चेंज कराया था
गाड़ी के मैंह बैठ ग्या मनै पाला गस का खाया था
सींगापुर म्हं जा पहोंचा डांगर ज्यूं डकराया था
कर बदली में भेज दिया उस केहरी बाबरी बण म्हं।
यूनिट म्हं दई हाजरी मनैं पक्का देणा पहरा हो
घर की याद बहू की चिन्ता यो भी दुःख गहरा हो
फौज के म्हां वो जाइयो जो बिन ब्याहा रह रह्या हो
फौजियां तै बूझ लियों जे मेहर सिंह गलती कर रह्या हो
कोए बहू आं आला सुणता हो तो मत दियो पैर बिघन म्हं।
प्रेम कौर मनैं तेरे ओड़ की चिन्ता भारी होगी : मेहर सिंह
जब इकतालीस के सन में सिंगहापुर की त्यारी होगीप्रेम कौर मनैं तेरे ओड़ की चिन्ता भारी होगी।टेक
डीपू म्हैं तै चाल पड़े हम टेशन उपर आगे
एक गौरा एक मेम मिली वे दो दो हार पहरागे
कड़ थेपड़ कै दी शाबासी गाड़ी बीच बैठागे
गाड़ी नैं जब सिटी मारी हम बालक थे घबरागे
अठारहा दिन के अरसे म्हं म्हारी तबीयत खारी होगी।
एक जहाज मनैं ईसा देख्या जिस म्हं बसता गाम
एक औड नैं टट्टू घोड़े रंगरूटा का काम
एक ओड़ नैं बिस्तर पेटी माहें माल गोदाम
जहाज के उपर चढ़कै देख्या सिर पै दिख्या राम
बैठे बैठे बतलावै थें घरां रोवंती नारी होगी।
इसे देश म्हं जा छोड़े जड़ै मोटर रेल नहीं सै
कई किसम के मिलै आदमी मिलता मेल नहीं सै
ब्याह करवा कै देख लियो जिसनै देखी जेल नहीं सै
नौकरी का करणा छोर्यो हांसी खेल नहीं सै
साढ़े तीन हाथ की काया थी या भी सरकारी होगी।
हम आये थे लड़न की खातर पहाड़ी ऊपर चढ़गे
दम दम करकै हुई छमा छम आगै सी नै बढ़गे
सी.ओ. साहब नैं सीटी मारी हम मोर्चे म्हं बड़गे
और किसे का दोष नहीं करमां के नक्शे झड़गे
घर कुणबे तैं दूर मेहरसिंह मोटी लाचारी होगी।
मेरे फिकर म्हं मेरी बहू नै रोटी भी ना खाई : मेहर सिंह
बिस्तर बांध कै चाल पड़्या जब याद हाजरी आईमेरे फिकर म्हं मेरी बहू नै रोटी भी ना खाई।टेक
दो दिन रहैगे छुट्टी के मेरा घी पीपी म्हं घाल्या
छोटे भाई नैं ठाया बिस्तर मेरै आगै चाल्या
कुए पै मेरी बहू फेटगी सांस सबर का घाल्या
दरवाजे म्हं खड़े पिता जी मैं उनकी कान्हीं चाल्या
हालत देख कै वे न्यूं बोले हमनै चाहती नहीं कमाई।
टेशन उपर पहोंच गया सुसराड़ पड़ै थी जड़ म्हं
क्लाक रूम म्हं धर्या बिस्तरा पहोंचा बीच बगड़ म्हं
छोटी साली न्यूं बोलै जणू कोयल बोलै झड़ म्हं
आ जीता तूं बैठ पिलंग पै मैं बैठूं तेरी जड़ म्हं
घणे दिनां मैं आया जीजा के भूल गया था राही।
जब रोटियां का टेम हुअया आई बलावण साली
आलू टमाटर घी बूरा की ठाडी भारदी थाली
धोरै बैठ जिमावण लागी तिरछें घूंघट आली
मुंह बटुआ सा गोल गोल था होठां पर थी लाली
उस गोरी के संग मैं छोर्यो साबत रात बिताई।
जब चालण का टेम हूअया वा बोली साली आण
तू तो जीजा चाल पड़े म्हारी रोती छोड़ी बहाण
जाणा पड़ै जरूरी हमनैम्हारा करडा सै लदाण
जै नहीं आता यकीन तेरै तैं चाल गेल पाटज्या जाण
मेहरसिंह पहोंच गया पलटन म्हं जाते ए ड्यूटी लाई।
हो परदेशी गैल मेरे तूं बांध क्यूंना हाड लेग्या : मेहर सिंह
करकै घायल तड़फती छोड़ी तूं ज्यान क्यूंना काढ़ लेग्याहो परदेशी गैल मेरे तूं बांध क्यूंना हाड लेग्या।टेक
सारा कुणबा छोहमैं आवै सासू दे सै गाल मेरी
ओर किसे का दोष नहीं या छोटी नणद कराल मेरी
ओढण पहरण पीण खाण की कती छूटली ढाल मेरी
हो परदेशी तनै आकै नैं क्यूं ना लई सम्हाल मेरी
तूं चंदा बणकै दरस्या कोन्या क्यूं बादलां की आड़ लेग्या।
शक्कर पारे गिरी छुआरे और सुहाली देशी घी की
घर घर के म्हं चालू होरी लाड़ कोथली बेटी धी की
हे ईश्वर मेरी ज्यान बचादे दुनियां लख चौरासी जी की
सारा सामण उतरग्या खाली दुनिया बाट देखरी मीहं की
सूखी तीज मनाऊं क्युकर मींह का मौका साढ लेग्या।
परदेशों तैं चिट्ठी आई चिट्ठी तेरी फौज की थी
चिट्ठी के म्हां न्यूं लिख राखी छुट्टी बीस रोज की थी
चौदस पूर्णमासी पड़वा तेरी पक्की बाट दौज की थी
सब कुणबे कै चाव चढ़या मेरी वाहे रात मौज की थी
रंग चा हो सै गैल सजन की तूं घाल गोझ मैं लाड लेग्या।
भरती हूंगा भरती हूंगा या हे आस बदन में थी
और किसे का दोष नहीं सूरती गौरमन्ट के अन्न म्हं थी
कुछ तो जोर करया करमां नैं कुछ तेरै भी मन म्हं थी
भरती होण की तिथि पिया तेरी उस 37 के सन् म्हं थी
घर कुणबे तैं दूर मेहरसिंह तनैं भरती का चाढ़ लेग्या
जो कुछ बीती मेरे संग म्हं बता दियों समझा कै : मेहर सिंह
मरती बरियां न्यू बोल्या मेरी दियों नमस्ते जाकैजो कुछ बीती मेरे संग म्हं बता दियों समझा कै।टेक
सामण म्हं श्री दिल्ली के म्हं गाना गाया करता
चिट्ठी गेर सब छोर्यां नैं पास बुलाया करता
वे पीछे तै जाया करते मैं पहलम आया करता
नई रागनी तुरंत बणां कै फेर सुणाया करता
तड़कै नैं घर आया करता मैं जल जमना मैं न्हाकै।
कात्तक म्हं श्री गंगा जी पै न्हाणे जाया करते
तरहां तरहां के सीद्धे लेकै जाकै खाया करते
लोग लुगाई कट्ठे होकै मेरा जिक्र चलाया करते
डेरे के म्हं हम मिलकै सारे फेर बतलाया करते
सारे छोरे याद आवैं मैं बोलूं सूं घबराकै।
बरोणे के म्हं चाल्या जा वा तनैं बैठी पावैगी
तेरे आवण की सुणकै नैं वा भाजी आवैगी
इसी बावली ना सै स्याणी वां तनैं समझावैगी
रोटी पाणी करकै रसोई दूध तलक प्यावैगी
तावल करके चाल्या जाइये कदे मरज्या चक्कर खाकै।
कहै मेहरसिंह बसकी कोन्या या दई काल नैं घेरी
हाथ जोड़ कै मेरे भाईयां नै राम-राम दियो मेरी
मनैं लड़ाइयां म्हं रहणा कदे ज्यान चली जा मेरी
इतनी कहते मालिक नै करदी डुबा ढेरी
सारी पल्टन जड़ मैं बैठगी आंख्यां म्हं आसूं ल्याकै।
तेरे ऊपर मुश्ताक रहूं बणी बिजली घन के म्हां : मेहर सिंह
जाणे वाले चले गये मेरै उठै लौर बदन के म्हांतेरे ऊपर मुश्ताक रहूं बणी बिजली घन के म्हां।टेक
मेरी तेरी सुण कै लड़ाई हंसैगे न्यू नरनार जले
मेरी करदे माफ खता मैं रह लूंगी ताबेदार जले
तूं तो कहर्या एक ब्याह की मैं करवा द्यूं दो चार जले
मैं भाभी तूं देवर चाहिये ना हो तकरार जले
मैं हांसी ठट्ठा कर रही थी तू बुरा मान ग्या मन के म्हां।
देवर भाभी का हुआ करै घर मैं घना मजाक जले
तूं एक बोल म्हं छोह म्हं भरग्या क्यूं हो रह्या सै राख जले
समझदार तूं स्याणा सै मैं तेरी भाभी नालायक जले
तेरी ओड़ की मेरे दिल मैं सै महोब्बत पाक जले
मैं बाहर रहूं तूं भीतर रहिये करिये मौज भवन के म्हां।
दो बासण जब आपस म्हं भिड़ज्यां होज्या घर म्हं राड जले
सिर म्हं जूत मारले बेसक मैं पकड़ा द्यूंगी झाड़ जले
तनै तेग सूत कै पकड़ा द्यूंगी चाहे तारले नाड़ जले
क्यूंकर दिल तैं दूर करूं मनैं छोटे से के करे थे लाड़ जले
परी पदमनी ब्याह द्यूंगी म्हारै घाटा कोन्या धन के म्हां।
तूं छोटा मैं बड़ी तेरे तैं ले मेरी बात नै मान जले
होश जवानी का चढ़ रह्या सै नहीं ठीकाणै ध्यान जले
बिना गुरु के मेहरसिंह नै भी पा लिया था ज्ञान जले
कहे सुणे बिन सरै नहीं तेरी छोटी उम्र नादान जले
फौजी के म्हां करै नौकरी तूं रहता रोज चमन के म्हां।
टोटा नफा और लाभ हाणी आदम देह खातर तारी : मेहर सिंह
पांच तत्व का शरीर बना नौ गिरह टेक दी भारीटोटा नफा और लाभ हाणी आदम देह खातर तारी।टेक
कोए दिशा धनवान बणादे कोए करै कंगाली
कोए दिशा धन तै भरदे कोए रखदे खाली
कोए दिशा रजगार चलादे कोए बिठादे ठाली
किसे दिशा म्हं शरीर सुकज्या कोए बणा दे लाली
किसे दिशा निर्धन बन्दा करै जगहां सर यारी।
किसै दिशा म्हं जहमत झगड़ा किसे दिशा म्हं शादी
किसै दिशा म्हं माणस का तोड़ा कोए करै आबादी
किसै दिशा म्हं धन आले नैं मिलै ना खाण नै आधी
किसै दिशा म्हं राजा नल नै गद्दी तलक जिता दी
किसै दिशा म्हं दमयन्ती भी गई पाट पति तैं न्यारी।
किसै दिशा म्हं बन्धे आबरो किसे दिशा म्हं हाणी
किसै दिशा म्हं राज चाल्या जा छूटज्या चीज मिजानी
किसै दिशा म्हं साहूकार भी करते कार बिरानी
किसै दिशा म्हं हरिश्चन्द्र नै भर्या नीच घर पाणी
किसै दिशा म्हं उन बन्दयां की हुई सुरग की त्यारी।
किसै दिशा म्हं प्रेम कुटम्ब का किसै दिशा म्हं छुटज्या
किसै दिशा म्हं धन मुन्जी का जोड़या जाड़या छुटज्या
किसै दिशा म्हं दुश्मन गेल्यां प्यार मुलाहजा छुटज्या
किसै दिशा म्हं मोती चुगता हंस ताल तैं उड़ज्या
किसै दिशा म्हं मिलै मेहरसिंह हाथी की असवारी।
रणभूमि म्हं जां सूं गोरी मेरी राम राम लिए : मेहर सिंह
बज्र कैसा हृदय करकै पकड़ कालजा थाम लिएरणभूमि म्हं जां सूं गोरी मेरी राम राम लिए।टेक
देश प्रेम की आग बुरी मनैं पड़ै जरूरी जाणा
घर बैठे ना काम चलै मनैं जाकै देश बचाणा
तेरी नणद का भाई चाल्या पहर केसरी बाणा
मरणा जीणा देश की खातर यो मनैं फर्ज निभाणा
रखणी होगी लाज वतन की प्यारी रट घनश्याम लिए।
सिर फोडू और फुड़वा ल्यूंगा दुश्मन गल्यां भिड़कै
बेशक ज्यान चली जा गोरी ना शीश समझता धड़ पै
दो बट आली रफल कै आगै खड़या रहूंगा अड़कै
रहया जीवंता तो फेर मिलूंगा चाल्या आज बिछड़कै
कर कै याद पति नै गौरी मत रोवण का नाम लिए।
सीना ताण देश की खातिर जो हंस हंस प्राण गंवादे
सीधा रोड़ सुरग का मिलज्या सच्चा धाम दख्यादे
के जीणा सै जगम्हं उनका जो मां का दूध लज्जा दे
धन-धन सै वैं लाल देश पै जो अपणा खून बहादे
तन मन धन सब इसकै हाजर सुण मेरा पैगाम लिए।
कहै मेहरसिंह सब जाणें सैं अकलमंद घणी स्याणी
पतिरूप परमेश्वर हो सै या वेदां की बाणी
दुश्मन का दिया घटा मान थी चूड़ावत छत्राणी
देश की खातर कटा दिया सिर थी झांसी की राणी
कर कर याद कहाणी मतकर दिल नै कती मुलायम लिये।
दुःख का कैसे पता लगाऊं सुण प्रेमकौर मेरी प्यारी : मेहर सिंह
पीसण खातर चाकी झो दी फौजी की होगी त्यारीदुःख का कैसे पता लगाऊं सुण प्रेमकौर मेरी प्यारी।टेक
छः साल गालां म्हं हांडया आठ साल पढ़ाया
चार साल थारी भैंस चराई दो साल हल बहाया
फेर फौज मैं भर्ती होग्या कुछ ना खेल्या खाया
वो माणस ना किसे काम का जिसनै आगै की नहीं बिचारी।
कदे कदे तेरा त्यौर कुंढाला मेरी छाती म्हं आज्या सै
सुपने के म्हां दिल गोरी मेरा तेरे धौरे आज्या सै
सामण जैसी लौर चलै जब बादल सा छाज्या सै
होल्दार मेजर हुकम करैवो पाड़ पाड़ कै खाज्या सै
तूं तो सोवै पैर फैला मैं द्यूं ड्यूटी सरकारी।
एक दिन रोटी खाते खाते याद मेरै तूं आई
लंगर म्हां तैं चाल्या उठकै रोटी भी ना खाई
खाट म्हं जा कै मुंधा पड़ग्या रो कै नाड झुकाई
फेर उठकै देखण लाग्या चोगरदे खड़े सिपाही
कदे नौकरी कदे सैल्यूट करूं कदे चलाऊं लारी।
इबकै नाम लोट म्हं आग्या तैं पड़ै मिश्र म्हं जाणा
ऊपर तैं हों हवाई हमले पाहड़ां मैं ल्युक जाणा
बैठ जहाज म्हं सफर करै उड़ै चाय बिस्कुट का खाणा
मरने म्हं कुछ कसर रही ना वापिस मुश्किल आणा
कहै मेहरसिंह उल्टे आग्ये तै सोवैंगे महल अटारी।
पत्ते चुगती फिरो बणा म्हं श्यान शक्ल की प्यारी सो : मेहर सिंह
ढाई मील शहर तै उरे नै कडै अकेली जा रही सोपत्ते चुगती फिरो बणा म्हं श्यान शक्ल की प्यारी सो।टेक
तन्खा ले कै धन्धा करले बाकी का ईमान किसा
गर्मी नहीं लागती थमनै दोफैरी का घाम किसा
रूप दिया पर कर्म दिया ना थारा बैरी बणग्या राम किसा
किस दुःख म्हं तम पत्ते ढोवो श्याम सबेरी काम किसा
पत्ते बेचण खातर तम किसतैं आढल ला रही सो।
दुनियां धन्धा कर्या करै पर इज्जत का करणा चाहिये
बेइज्जत का धन्धा करकै ना पेट खड़ा भरना चाहिये
सुथरे-सुथरे मुंह की सो तम इज्जत तैं डरना चाहिये
कर कै ख्याल पाछला सारा चित म्हं धरना चाहिये
जात तैं कोए बेइज्जत करदे तम दोनूं बाहण कंवारी सो।
रोज अड़ै आ जाओगी तै थारी इज्जत का डर हो ज्यागा
दो आनां के पत्यां म्हं के थारा साहूकार घर हो ज्यागा
लोभ दुःखी करैगा तमनै दुःख जिन्दगी भर होज्याणा
कुछ सुथरी कुछ फिरो एकली कोए सहम थारै सिर हो ज्यागा
कुछ तम मारों कुछ वो मारै तम पैनी तेग दुधारी सो।
किसै शुभा के थारे मात पिता जो बेटी पर ना दया करैं
पत्ते चुगण चाली जाइयो किस मुंह तै वे कह्या करैं
कहै मेहरसिंह समझणियां माणस ऊंच नीच नै लहया करैं
थारे कैसी सुथरी छोरी रंग रूप लहकों कै रहया करैं
छाहली तक भी ना लागण दे तम बालक छोरी छारी सो।
न्यू नै लखा कै देख यार किसा चाला सा कठर्या सै : मेहर सिंह
जिन्दगी खोकै मरणा होगा मेरा अन्न जल हटर्या सैन्यू नै लखा कै देख यार किसा चाला सा कठर्या सै।टेक
छम छम छनननन करती चालै फली सिरस की होरी
दूर खड़ै नै फूकैगी किसी आग करस की होरी
एक बै मेरे तैं बोल गई ईब आस दरस की होरी
ईब लग बी ब्याही कोन्या या बीस बरस की होरी
आंवते ज्यात्यां नै दे काट गंडासा अहरण पै चंट रह्या सै।
भागा आला मृग चरैगा केसर क्यारी दिखै
भौंरा बणकै ल्यूं खसबोई यो फूल हजारी दिखै
सो हूरां म्हं खड़ी करें तैं एक या न्यारी दिखै
ईब तलक बी ब्याही कोन्या कती कंवारी दिखै
उस तरिया की काया का सही मेला सा लुट रह्या से।
इस तरियां परी पडै भूल म्हं जणूं मृग चौकड़ी चुक्कै
हट कै काम बणै वारी जो सही टेम नै उक्कै
काम देव की ऐसी माया चोट जिगर म्हं दूखै
उस तरिया का के जीणा जो पीहर के म्हां सूखै
मरद मिलै वा आनन्द लूटै सही जोबन छंट रह्या सै।
भूरे-भूरे मुख पै लागूं मर्द बण्या चाहूं सूं
कामदेव नै बस मैं करूं ईसा जर्द बण्या चाहूं सूं
उसकी अग्नि तुरत बुझाउं पाणी शरद बण्या चाहू सूं
वा त्रिया जै बहु बणै मैं अह का मर्द बणया चाहूं सूं
कहै मेहरसिंह मिलण की खातर न्यू माला रट रह्या सै।
बिन बालम तेरी उम्र कटै ना या अरजी सै मेरी : मेहर सिंह
आधी उम्र बाप कै खो दी के जिन्दगानी लेहरीबिन बालम तेरी उम्र कटै ना या अरजी सै मेरी।टेक
जिस बन्दे के भाग फूटज्यां, जा सांड शेर कै आगै
बिन परां का मन पंछी सै जी चाहवै जित भागै
भजन का करणा पार उतरणा जो बूरे काम नै त्यागै
जैसे कर्म करैगा बन्दे वैसे आज्यांगे तेरे आगै
तू खड़ी ठाण पै भूण्डी लागै बिन असवार बछेरी।
जै किमै ऊक चूक होगी तो होज्यागा मुंह काला
दुनियां के म्हां बांस उठज्या होज्या जातक बाला
शीशे कैसा यो पाणी सै बिल्कुल ठीक बिचाला
तेरी श्यान नै देख कै माणस खाकै पड़ै तिवाला
तेरे नाम की फेरूं माला तू गंगा पर की ढेरी।
उस माणस नैं किसका डर जो प्रेम का लाड्डू बांटै
पीहर के म्हां पड़े रहण तैं यो किसका पूरा पाटै
पीहर के म्हां पड़ी रहै सै गुण औगुण नै छांटै
पति बिना या उमर कटे नां क्यों शादी नैं नाटै
तूं क्युंकर दिल नै डाटै या हद छाती सै तेरी।
उसका होज्या सुरग म्हं बासा जिस छैल गेल्यां जागी
बिजली जैसे चमके लागैं जब मटना मल कै न्हागी
कोयल तै भी मीठा बोलै चूंट कालजा खागी
नरक सुरग का बेरा पटज्या जब हंस हंसकै बतलागी
कहै मेहरसिंह गस आगी मनैं जब आंख्या की ली फेरी।
सपना ऊत निराला रै मेरी रे-रे माटी करग्या : मेहर सिंह
आज रात का जिकर राहण द्यो कती ज्यान तैं मरग्यासपना ऊत निराला रै मेरी रे-रे माटी करग्या।टेक
सपने आली बात सुणण का करद्यों रै तम टाला
सपने कै म्हैं मनै दिखै था धौले के म्हं काला
सुपना बैरी मारग्या मनैं ज्यूं खेती नै पाला
जीवण जोगा छोड़्या कोन्या रोप्या मोटा चाला
सुपने म्हं ईसा देख्या वो खाट खड़ी मेरी कर ग्या।
सोली करवट सोया था मैं जड़ म्हं होक्का धरकै
आधी रात नै इसा दिख्या जणूं ल्याई जाटणी भरकै
बैठ कै धोरै लागी जगावण थोड़ी थोड़ी डरकै
बैठा होकै घूंट मारले बोली इशारा करकै
सारै दिन तूं बोल्या कोन्या के मेरे बिन सरग्या।
मैं उठकै बैठ्या होग्या जब हूर खड़ी थी जड़ म्हं
धन धन उस मालिक नैं जिनै मोती पोया लड़ म्हं
मीठी-मीठी बोली इसी जणूं कोयल बोलै झड़ म्हं
आता जाता सांस दीखता भूरे-भूरे धड़ म्हं।
उस हूर परी के देखें तैं मेरा प्रेम उसी म्हं भरग्या।
कहै मेहरसिंह मनैं बता दो यो सपना हो जंजाल
सपने आली बणती कोन्या दिखै अपणा काल
माणस बेरा नैं के बणज्या इसा सुपने का हाल
जै सुपणे आली मिलज्या तै हो ज्यां माला माल
सुपने आली हूर देखकै मेरा सारा पेटा भरज्या।
सुपने म्हं सुसराड़ डिगर ग्या बांध कै साफा खाकी : मेहर सिंह
के बातां का जिक्र करूं बस कोन्या तन म्हं बाकी।सुपने म्हं सुसराड़ डिगर ग्या बांध कै साफा खाकी।टेक
दिन छीपणे नैं होर्या था जाणू दीखैं दिवे चसते
गाम कै गोरै पहोंच गया मैं बुझण लाग्या रस्ते
आगै सी नै साला मिलग्या भाजकै करी नमस्ते
घर कै बारणें पहोंच गये हम दोनूं हंसते हंसते
साली पाणी ल्याण लागरी अदा दिखारी बांकी।
सालै नै मेरा बिस्तर लाया कर दिया ठाठ निराला
जुती काढ़ कै बैठग्या मैं खाट का देख बिचाला
इन्डीदार गिलास दूध का मोटा रोप्या चाला
हूर परी की एक नजर पड़ी मैं खाकै पड़या तिवाला
दूध म्हं मीठा कम लाग्या मनैं खाण्ड की मारी फांकी।
रोटीयां तांई आया बुलावण नाई तावल करकै
सासू जी तै स्याहमी बैठी थाली म्हं रोटी धरकै
घाल दिया घी बूरा साली नै आगे कै फिरकै
सहज सहज मैं लाग्या खावण थोड़ा थोड़ा डरकै
ठेक्यां पाछै झांक रही थी मेवा ईब तलक ना चाखी।
छोटी साली धोरेकै लिकड़ी करगी हेरा फेरी
ऊंट मटिला मेरा करगी कुदण लायक बछेरी
न्यून पडूं तै कुआ दिखै न्यून पडूं तै झेरी
आंख मारकै न्यूं कहगी मैं बहू बणुगी तेरी
कहै मेहरसिंह तनैं पड़ै काटणी खेती खड़ी जो पाकी।
पिलंग की जड़ म्हं आकै डटगी ज्यान काढ ली मेरी : मेहर सिंह
के सुपने का जिक्र करूं वा करगी डूबा ढेरीपिलंग की जड़ म्हं आकै डटगी ज्यान काढ ली मेरी।टेक
पकड़ हाथ तैं खींच लई मेरी ताजी भरी रजाई
कहण लगी तूं बैठा होले मेरी ननदी के भाई
चुपका रह गया बोल्या कौन्या लेता रहया जम्हाई
क्यूना उठता बाट देखरी कद की तेरी लुगाई
मेरी रजाई दूर बगादी झट खींच कै निचै गेरी।
पलंग की जड़ म्हं खड़ी हुई थी वा मसतानी हूर
माथे बिन्दी आंख्यां म्हं स्याही नैना की पैनी घूर
बिजली कैसा बल्ब चासरी थी नूरां की नूर
इसी कटीली गौरी देखी जोबन म्हं भी भरपूर
बैठा होकै देखन लाग्या ना इसी देखी खाण्ड की ढेरी।
सोच फिकर म्हं खून सूख्ग्या नागन सी लड़गी
इधर उधर मैं देखण लाग्या बेरा ना कित बड़गी
उस गौरी का के बिगड़्या मेरी बण कै बात बिगड़गी
घर घाट का छोड़्या कोन्या चेहरे की लाली झड़गी
दूर मिली ना धौरै पाई हूर ढूंढी मनै भतेरी।
दीदे पाड़-पाड़ कै देख्या पाया घोर अंधेरा
मन म्हं आई जाकै देखूं कोए कुआ झेरा
रे-रे माटी मेरी करगी इश्क जाल नै घेरा
मेहरसिंह नहीं कोए अपना दुनिया रैन बसेरा
रंज फिकर म्हं रोता रहग्या किस्मत सोगी मेरी।
लत्ते बढ़िया ओढ़ पहर कै देखी एक लुगाई : मेहर सिंह
आधी रात शिखर तै ढलगी सुपना दिया दिखाईलत्ते बढ़िया ओढ़ पहर कै देखी एक लुगाई।टेक
रिम झिम रिमझिम होरी थी गहणा पहर री एक धड़ी
ऊंची एडी बूट बिलायती बांधरी हाथ घड़ी
काली चोटी ईंच ब्यालीस नागनी की ढाल पड़ी
जोबन की मस्ती म्हं जलती जैसे छूटै फूलझड़ी
हाथ पकड़ कै पास बैठगी हंस हंस कै बतलाई।
मनैं बुझी ना न्यूं बोली मनैं नर की चाहना सै
जोड़ी का भरतार मिल्या ना मेल मिलाना सै
मेरा बालम मनै ले ज्यागा जड़ै पानी दाना सै
आम सरोली पके पकाए भाग म्हं खाना सै
गात मुलायम मलमल कैसा पतली नरम कलाई।
आज मनैं तूं फेटया बनड़ा जिसा मैं चाहूं थी
तूं मेरा बालम मैं तेरी गोरी तनै मनाऊं थी
सुरखी बिंदी पोडर लाकै रूप बनाऊं थी
सारा हरियाणा टोहती फिरती तनैं पांऊ थी
मेहरसिंह कहै और पसन्द ना इसी चकोरी आई।
छाती धड़कै ईब तलक वा ज्यान का गाला करगी : मेहर सिंह
सुपने के म्हां हूर परी ढंग कुढाला करगीछाती धड़कै ईब तलक वा ज्यान का गाला करगी।टेक
मनैं कह्या तूं बैठ पिलंग पै बार करै ना गोरी
मन की चाही हो ज्यागी तूं अजब श्यान की छोरी
रंग छांटरी रूप गजब का अब तक रहरी कोरी
ओड़ सुवासण हुई मस्तानी न्यूएं रूप नैं खोरी
ओढ पहर सिंगर रही गारी बेढब चाला करगी।
फेरैं बैठी चीज अनूठी मेरा हरद्या हाल्या
रोम रोम म्हं खुशी हुई जब हाथ गले म्हं घाल्या
चांद चकोरी मिलैंगे दोनूं ताली म्हं मिलग्या ताला
प्यार के रस म्हं भरे हुए रांझा हीर की ढाला
बटन दबा बिजली कैसा सहम उजाला करगी।
बैठी हूर पलंग के ऊपर पैर दबावण लागी
भर चोंटकी देखै धर कै नजर मिलावण लागी
नजर फेरले हसैं जोर तैं हाथ हिलावण लागी
कौली भरली जब मनैं दाब कै बात बनावण लागी
छाती तैं छाती मिलेंगी वा रूप निराला करगी।
हांगा करकै प्यार किया जब दिया भगवान दिखाई
मध्य लोक को छोड़ स्वर्ग की होगी सैर हवाई
हरियाणे म्हं इसे गजब की देखी ना और लुगाई
मेहरसिंह नै जोड़ जाड़ कै कविता खास बनाई
एक छोरी नैं किवाड़ खोल दिये खाण्ड का राला करगी।
नखरा करकै मनैं जगागी सुते का हाथ पकड़ कै : मेहर सिंह
सुपने के म्हां बहु मेरी गई लिकड़ पिलंग कै जड़कैनखरा करकै मनैं जगागी सुते का हाथ पकड़ कै।टेक
सुपने के म्हां घरां डिगरग्या ले दस दिन की छुट्टी
फेर बहू मनैं देख की झट पीढे पर तै उठ्ठी
भूरी-भूरी आंगलियां म्हं पहर रही थी गुठ्ठी
चार पहर तक हम बतलाए एक बुक्कल म्हं बड़कै।
सुपने के म्हां आज रात मनैं आगया ख्याल बहू का
जड़ म्हं बैठ कै बूझ लिया मन सारा हाल बहू का
गोल-गोल मुखचन्दा कैसा मुखड़ा लाल बहू का
आज तलक ना ठीक हो लिया कर्या हुअया घायल बहू का
के तो आज्या नाम कटा कै ना मरूं कुए म्हं पड़कै।
तेरे तैं तेरा छोटा भाई कमरे बीच बुलावै
मैं पहलां चली जां तो वो पाच्छे तैं आवै
ओढूं पहरूं सिंगरू तो या दुनियां बुरी बतावै
अपणी ब्याही की तिरयां वो सारे हुक्म चलावै
जिसा सुपना मनैं आज आया इसा बेशक आइयो तड़कै।
कहै मेहरसिंह सुपने म्हं ढंग होग्या चाप सिंह आला,
इसा महोब्बत नैं घेर लिया ज्यूं मकड़ी नै जाला
भूरी-भूरी ढोड़ी पै तिल खिण्वारी थी काला
जै छोरा ले देख बहू नैं खाकै पड़ै तिवाला
कित बरेली कित बरोणा मेरी सुते की छाती धड़कै।
भीतरले का भेद नहीं दे मिठे बोलैं सारे : मेहर सिंह
बीर बाणियां पुलिस डरेवर नहीं किसे के प्यारेभीतरले का भेद नहीं दे मिठे बोलैं सारे।टेक
इन बीरां के कारण लोगो आग लंक म्हं लागी
गौतम के घर गया चन्द्रमां बण्या दुष्ट निर्भागी
बाली और सुग्रीव चले गये राड़ बीर पै जागी
बड़े बड़े ऋषि मुनि हुए त्यागी और बैरागी
जिसनै करया प्रेम वीर तै वैं नर धोखे म्हं मारे।
जिसतै ज्ञान राम नैं दिया वो नादान नहीं सै।
मित्र का कुछ ख्याल करै इतना ज्ञान नहीं सै
इन चारों तै बढ़कै नैं कोए बेईमान नहीं सै
शीश काटकै आगै धरदे पर बणीये कै स्यान नहीं सै
बेशक बालक भूखे मरज्यां पर मेरे दे दे दाम करारे।
जितणी पुलिस की बेईमानी म्हं ईब गिणा द्यूं सारी
देहली भीतर पां धरते ही तकैं यार की नारी
मिठै बोलै राजी होकै करवा कै खातिरदारी
फेर चलती बरियां न्यू सोचैं यो यार मिलै चोर जुवारी
घाल हथकड़ी आगैं करले दीखैं दिन म्हं तारे।
अन्तकर्ण तै न्यूं बोले भाई नहीं प्रण तैं हालैंगे
मेरे यार तूं कद कद आवै तेरे ब्याह म्हं मोटर ले चालैंगे
तेरे पीस्यां का मोटर म्हं तेल तलक ना घालैंगे
पर छोरे नैं न्युं जाण नहीं थी ये मौके पै टालैंगे
इन यारों की संगत तज दे मेहरसिंह ये चारो लाजमारे।
मेहरसिंह से रागनी सुनने वाले कुछ ड्राइवर उनकी शादी में अपनी मोटर लेकर चलने की कहते थे। जब शादी की तिथि आई उन्होंने मोटर समेत आने की हामी भर ली, परन्तु समय पर नहीं आए। जब बैलगाड़ी में बारात गई तथा रास्ते में यह रागणी जोड़ी।
पीसण खातर चाक्की झो दी फौजी की होगी त्यारी : मेहर सिंह
पीसण खातर चाक्की झो दी फौजी की होगी त्यारीदुख का कैसे पता लगाऊं सुण धर्मकौर मेरी प्यारी
छ साल गाळां में हांड्या आठ साल पढ़ाया
चार साल थारी म्हैंस चराई दो साळ हळ बाह्मा
फेर फौज म्हं भरती होग्या कुछ ना खेल्या खाया
वो माणस ना किसे काम का जिसने आगै की नहीं बिचारी
कदे कदे तेरा त्योर कुढाळा मेरी छाती म्हं आज्या सै
सुपने के म्हं दिल गोरी मेरा तेरै धोरै आज्या सै
सामण जैसी लौर चलें जब बादळ सा छाज्या सै
होल्दार मेजर हुक करै वो पाड़ पाड़ कै खाज्या सै
तूं तो सोवै फैला कै मैं द्यूं ड्यूटी सरकारी
एक दिन रोटी खाते खाते याद मेरै तूं आई
लंगर म्हं तै चाल्या उठकै रोटी भी ना खाई
खाट म्हं जाकै मुंधा पड़ग्या रो कै नाड़ झुकाई
फेर उठकै देखण लाग्या चोगरदे खड़े सिपाई
कदे नौकरी कदे सैल्यूट करूं कदे चलाऊं लारी
इबकै नाम ड्रम म्हं आग्या तै पड़ै मिश्र म्हं जाणा
उपर तैं हो हवाई हमले पहाड़ां म्हं ल्हुक जाणा
बैठ जहाज म्हं सफर करैं उड़ै चाय बिस्कुट का खाणा
मरणे म्हं कुछ कसर रही ना वापस मुशकल आणा
कहै मेहरसिंह उल्टे आगै तै सोवैंगें महल अटारी
मैं कदकी रूक्के दे रही : मेहर सिंह
मैं कदकी रूक्के दे रही तूं रोटी खा लिए हाळीदिल ढळज्या जब फेर खेत नै बाह लिए हाळी
बोल दिए जब बोल्या कोन्या दे लिए बोल हजार मनैं
रोटी पाणी भरया छाबड़ा मुश्किल तारया न्यार मनैं
बारा बज कै दो बजग्ये जाण नै हो सै वार मनैं
सारे पड़ोसी जा लिए ई ब तूं भी चालिए हाळी
एक मील तैं रोटी ले कै बड़ी मुश्किल तैं आई मैं
हाळी गेल्यां ब्याह करवा कै बहोत घणी दु:ख पाई मैं
मत रेते बीच रळावे पिया पन्नेदार मिठाई मैं
तेरे मरते बैल तिसाये तूं पाणी प्या लिए हाळी
बैठ आम कै नीचै पिया मैं तेरी सेवा कर दयूंगी
मिट्ठी-मिट्ठी बातां तै मेरा सारा पेटा भर दयूंगी
मनैं जी तैं प्यारा लागै सै मैं गात तोड़ कै धर दयूंगी
तेरी हूर खड़ी मटकै सै तूं गळ कै ला लिए हाळी
गरमी पड़ती लू चालै सैं पड़ै कसाई घाम किसा
दोफारी म्हं भी टिकता कोन्या जुल्मी सै तेरा चाम किसा
फूंक दिया सै गात मेरा जुल्मी सै यो राम किसा
तूं “मेहर सिंह” की सीख रागनी गा लिए हाळी
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छुट्टी के दिन पूरे होग्ये : मेहर सिंह
छुट्टी के दिन पूरे होग्ये न्यू सोचण लाग्या मन म्हंबांध बिस्तरा चाल पड्या कुछ बाकी रही ना तन म्हं
छाती कै ला कै माता रोई जिसनै पाळया पोष्या जाम्यां था
बुआ बाहण पुचकारण लागी भाई भी रोया राम्भा था
दरिया केसी झाल उठती मनैं कालजा थांब्या था
छोटे भाई नै घी पीपी म्हं गूंद खाण का बांध्या था
न्यूं बोले दिए छोड़ नौकरी के दब कै मरैगा धन म्हं
पिता जी खड़े दरवाजे म्हं उनकी कान्ही चाल्या था
कोळै लागी मेरी बहू रोवै थी सांस सबर का घाल्या था
आंख्यां के म्हं नीर देख कै मेरा काळजा हाल्या था
न्यूं बोली पिया मेरे नाम का किसतैं दिया हवाला था
गश खाकै नै पड़ी घर आळी होश रही ना तन म्हं
हाथ फेर कै पुचकार दई कुछ ना चाल्या जोर मेरा
छ: महीने म्हं आल्यूंगा जै ना आया तो चोर तेरा
रस्ते म्हं सुसराड़ पड़ै थी उड़ै बी लाग्या दौर मेरा
जीजा आया जीजा आया साळा करता आया शोर मेरा
सासू नैं पुचकार दिया मेरै सीळक हुई बदन म्हं
उड़ै रोटी तक अभी खाई कोन्या करी चलण की त्यारी
जीजा जी क्सद आओगे न्यू बूझै साळी प्यारी
म्हारे आवण का बेरा ना तुम आस छोड़ दियो म्हारी
इतने ए दिन की जोड़ी थी या थारे तैं रिश्तेदारी
मेरी लियो आखरी राम राम थारे कर चाल्या दर्शन मैं
टेशन ऊपर छोड़ण खातर साळा संग म्हं आया था
बाबू जी तैं करी नमस्ते वारंट चेंज कराया था
गाड़ी के म्हं बैठग्या मनै पाला गस का खाया था
सिंगापुर म्हं जा पहोंच्या डांगर ज्यूं डकराया था
कर बदली मैं भेज दिया उस केहरी बबरी बण म्हं
यूनिट म्हं दई हाजरी मनैं पक्का देणा पहरा हो
घर की याद बहू की चिंटा यो भी दुख गहरा हो
फौज के म्हां वो जाइयो जो बिन ब्याहा रह रहया हो
फौजियों तैं बूझ लियो जो मेहर सिंह गलत कह रहया हो
कोए बहुआं आळा सुणता हो तो मत दियो पैर बिघन म्हं
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जब इकतालीस के सन म्हं : मेहर सिंह
जब इकतालीस के सन म्हं सिंगापुर की त्यारी होग्यीप्रेम कौर मनैं तेरे ओड़ की चिंता भारी होग्यी
डीपू म्हं तै चाल पड़े हम टेशन ऊपर आग्ये
एक गोरा एक मेम मिली वे दो दो हार पहराग्ये
कड़ थेपड़ कै दी शाबासी गाड़ी बीच बैठाग्ये
अठारहा दिन के अरसे म्हं म्हारी तबीयत खारी होग्यी
एक जहाज मनैं इसा देख्या जिस म्हं बसता गाम
एक ओड़ नैं टट्टू घोड़े रंगरूटा का काम
एक ओड नैं बिस्तर पेटी माहें माल गोदाम
जहाज के ऊपर चढ़कै देख्या सिर पै दिख्या राम
बैठे बैठे बतलावैं थे घरां रोवती नारी होग्यी
इसे देश म्हं जा छोड़े जड़ै मोटार रेल नहीं सै
कई किस्म के मिलैं आदमी मिलता मेळ नहीं सै
ब्याह करवा कै देख लियो जिसनै देखी जेळ नहीं सै
नौकरी का करणा छोरयो हांसी खेल नहीं सै
साढ़े तीन हाथ की काया थी या भी सरकारी होग्यी
हम आये थे लड़न की खातर पहाड़ी ऊपर चढ़ग्ये
दम दम करकै हुई छमा छम आगै सी नै बढ़ग्ये
सी.ओ साहब नैं सीटी मारी हम मोर्चा म्हं बड़ग्ये
और किसे का दोष नहीं करमां के नक्से झड़ग्ये
घर कुणबे तैं दूर “मेहर सिंह” मोटी लाचारी होग्यी
बज्जर कैसा ह्र्दय करकै : मेहर सिंह
बज्जर कैसा ह्र्दय करकै पकड़ काळजा थाम लिएरणभूमि म्हं जां सूं गोरी मेरी राम राम लिए
देश प्रेम की आग बुरी मनैं पड़ै जरूरी जाणा
घर बैठे ना काम चलै मनैं जाकै देश बचाणा
तेरी नणद का भाई चाल्या पहर केसरी बाणा
मरणा जीणा देश की खातर यो मनैं फर्ज निभाया
रखणी होगी लाज वतन की प्यारी रट घनश्याम लिए
सिर फोड़ूं और फुड़वा ल्यूंगा दुशमन गेल्यां भिड़कै
बेशक जान चली जा गोरी ना शीश समझता धड़ पै
दो बट आली रफल कै आगै खड़या रहूंगा अड़कै
रहया जींवता तो फेर मिलूंगा चाल्या आज बिछड़कै
कर कै याद पति नै गौरी मत रोवण का नाम लिए
सीना ताण देश की खातिर जो हंस हंस प्राण गंवादें
सीधा रोड सुरण का मिलज्या सच्चा धाम दिखा दे
के जीणा सै जग म्हं उनका जो मां का दूध लजा दें
धन धन सै वैं लाल देश पै जो अपणा खून बहा दें
तन मन धन सब इसकै हाजर सुण पैगाम लिए
कहै “मेहर सिंह” सब जाणैं सैं अकलमंद घणी स्याणी
पतिरूप परमेश्वर हो सै या वेदां की बाणी
दुश्मन का दिया घटा मान थी चूडावत छत्राणी
देश की खातर कटा दिया सिर थी झांसी की राणी
कर कर याद कहाणी मतकर दिल नै कती मुलायम लिये
के बातां का जिक्र करूं बस : मेहर सिंह
के बातां का जिक्र करूं बस कोन्या तन म्हं बाकीसुपने म्हं सुसराड़ डिगरग्या बांध कै साफा खाकी
दिन छिपणे नैं होरया था जणू दीखैं दीवे चसते
गाम कै गोरै पहोंच गया मैं बूझण लाग्या रस्ते
आगै सी नै साला मिलग्या भाजकै करी नमस्ते
घरकै बारणें पहोंच गये हम दोनूं हंस्ते हंस्ते साळी पाणी ल्याण लागरी अदा दिखारी बांकी
साळै नै मेरा बिस्तर लाया कर दिया ठाठ निराळा
जूती काढ कै बैठ गया मैं खाट का देख बिचाळा
इंडीदार गिलास दूध का मोटा रोप्या चाळा
हूर परी की एक नजर पड़ी मैं खाकै पड्या तिवाळा
दूध म्हं मीठा कम लाग्या मनैं खाण्ड की मारी फांकी
रोटियां तांई आया बुलावण नाई तावळ करकै
सासू जी तै स्याहमी बैठी थाळी म्हं रोटी धरकै
घाल दिया घी बूरा साळी नै आगै कै फिरकै
सहज सहज मैं लाग्या खावण थोड़ा थोड़ा डरकै
ठेक्या पाछै झांक रही थी मेवा ईब तलक ना चाखी
छोटी साळी धोरै कै लिकड़ी करगी हेरा फेरी
ऊट मटीला मेरा करग्यी कूदण लायक बछेरी
न्यून पडूं तै कुआ दिखै न्यून पडूं बणूंगी तेरी
आंख मारकै न्यूं कहग्यी मैं बहू बणूंगी तेरी
कहै “मेहर सिंह” तनैं पड़ै काटणी खेती खड़ी जो पाकी
परदेशां म्हं चाल दिया दिल : मेहर सिंह
परदेशां म्हं चाल दिया दिल तोड़ कै नार नवेली कातेरे बिना भरतार अड़ै जी लागै नहीं अकेली का
हो चाहे कितना ए खेद बीर नै मरदां नै के बेरा
तारे गिण गिण रात चली जा होज्या न्यूएं सवेरा
बिना पति के ओड हवेली हो भूतां का डेरा
तेरे बिना रहै घोर अंधेरा तू दीपक महल हवेली का
दिल की दिल म्हं रहै पति बिना होता ना मन चाहया
ओड़ उम्र म्हं छोड़ चल्या तूं कुछ ना खेल्या खाया
कुछ भी अच्छा लागै कोन्या धन दौलत और माया
तीज ज्यौहार चले जां सुक्के मन लागै नहीं उनम्हाया
मद जौबन म्हं भरी सै काया मद पै फूल चमेली का
हाळी बिन धरती सुन्नी और बिना सवार के घोड़ी
बिना मेल के कलह रहै नित घणी नहीं तो थोड़ी
जल बिन मीन तड़फ कै मरज्या न्यूए बीर मर्द की जोड़ी
बिना पति के बीर की कीमत उठै ना धेला कोड़ी
बिन परखणियां लाल करोड़ी होज्या सस्ता धेली का
सारी उम्र बिता दयूं मैं पिया तेरे गुण गा कै
याद राखिए कदे भूलज्या प्रदेशां म्हं जा कै
राजी खुशी की चिट्ठी गेरिए खुश हो ज्यांगी पा कै
आवण की लिखैगा मैं तो गाऊं गीत उनम्हा कै
“मेहर सिंह” कद रंग लूटैगा मद जौबन अलबेली का
होए ससुर मेरा भी छोह मैं आवै : मेहर सिंह
होए ससुर मेरा भी छोह मैं आवै .... सासु दे सै गाऴ मेरी ...हो परदेसी तनै आण कै ....क्योना लई सम्भाऴ मेरी ...
ओढण-पेहरण और सिंगरण की ... कती छूटगी ढाऴ मेरी ...
मैं ओढूं-पहरूं तै ताने दे ... एक छोटी ननद चिंडाऴ मेरी ....
ओढूं-पहरूं तै ताने दे ... एक छोटी ननद चिंडाऴ मेरी ....
देखे रंग तैं हों सैं ... हो रंग तैं हों सैं ...
हां गैल पती के .. तूं घाल गोह्ज मैं लाड लेग्या
करकै घाल तडपती छोडी ... ज्यान क्योंना काढ लेग्या ...
हो परदेसी ... गैल मेरे भी, बांध क्योंना हाड लेग्या ...
करकै घाल तडपती छोडी ... ज्यान क्योंना काढ लेग्या ...
छ: मिहने मैं : मेहर सिंह
छ: मिहने मैं। छ: मिहने मैं तेरा बेरा पाटया। चिट्ठी मिली फौज़ की थी।चिट्ठी मैं न्यु लिख राखी। तेरी छुट्टी बीस रोह्ज की थी।
सभ कुणबे कै चाव चढ्या। मेरी उस दिन रात मौज की थी।
चौद्दस पुरणमासी पड्वा। तेरी पक्की बाट दौज की थी।
चौद्दस पुरणमासी पड्वा। तेरी पक्की बाट दौज की थी।
हां चंदा बणकै। हो चंदा बणकै। बरस्या कोन्या क्यूं बादऴां की आड लेग्या।
करकै घाल तडपती छोडी। ज्यान क्योंना काढ लेग्या।
हो परदेसी। गैल मेरे भी, बांध क्योंना हाड लेग्या।
करकै घाल तडपती छोडी। ज्यान क्योंना काढ लेग्या।
फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये : मेहर सिंह
फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये तू अपनी प्रेमकौर नै।डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥
अरै फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये अपनी प्रेमकौर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥
हाँ तेरे बिना पिया इस घर मै दिखे घोर अँधेरा।
गाम बरोड़े मै तेरे बिन दिखे उज्जड डेरा।
चंदा बिना चकोरी सुनी सबने हो श बेरा।
रही थान पै कूद बछेरी कित्त जा श छोड़ बछेरा।
और फीका पड़ गया चेहरा मेरा
फीका पड़ गया चेहरा मेरा कित्त लुट्टे मेरे त्योंर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥1॥
अर फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये तू अपनी प्रेमकौर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥
हाँ शाम सावेरी मन्ने एकली नै खेता मै जाणा हो।
बदमास्याँ की टोली घुमै मुश्किल गात बचाणा हो।
तेरी खातर रहूंगी जीवती जब तक पाणी दाणा हो।
नहीं मौत का कोई भरोसा कद हो ज्या माल बिराणा हो।
हाँ बिना मोरनी कौन नचावै
बिना मोरनी कौन नचावै रंग रंगीले मोर नै।
अरै डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥2॥
अर फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये तू अपनी प्रेमकौर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥
हाँ पतला गात बैद ज्यू लरजे पाड़ी खिली जोर की।
होठ गुलाबी चमकै श जणू बिजली पुरे पोर की।
काली गौ मै तेरी सु देखू सु बाँट खोर की।
पतले पतले होठ मेरे जैसे बिजली पूरे पोर की।
हाँ कठपुतली की तरियां नाचूँ
कठपुतली की तरियां नाचूँ जद तू हलावे डोर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥3॥
अर फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये तू अपनी प्रेमकौर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥
हाँ दरजी के तै सीमा दिए मेरा लेडी मिन्टन सूट पिया।
पायाँ के मा मन्ने पराह ऊँची एड्डी के बूट पिया।
छम छम कर कै चालूँगी जणू फौजी जा रंग रूट पिया।
तेरे बिना क्यूकर जीउ कैसे भरू सब्र की घूँट पिया।
हाँ मेहर सिंह तो भूल ना जाइये
मेहर सिंह तो भूल ना जाइये अपनी चित्त चोर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥4॥
फ़ौज मै जाकै भूल ना जाइये अपणी प्रेमकौर नै।
डर डर कै मर ज्यांगी पिया मै देख कै घटा घोर नै॥

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