फौजी मेहर सिंह की रागनियां भजन व मुक्तक : Fauji Mehar Singh Ki Ragini Likhit 2
फौजी मेहर सिंह हरियाणवी लोकसाहित्य और रागनी परंपरा के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनका संबंध हरियाणा की लोकभाषा और ग्रामीण जीवन से था। उनकी रचनाओं में सामाजिक जीवन, देशभक्ति, वीरता, नीति, प्रेम और आम लोगों से जुड़े विषय देखने को मिलते हैं। उन्होंने रागनी और मुक्तक जैसी लोकविधाओं के माध्यम से अपनी बात सरल और प्रभावशाली ढंग से लोगों तक पहुँचाई। लोकभाषा में लिखी उनकी रचनाएं आज भी हरियाणवी लोकसाहित्य की परंपरा में याद की जाती हैं।
फोटू ले लो फोटू ले लो न्यू कानां मैं भनक पड़ी : मेहर सिंह
तलै महल कै दूर सड़क तै रूकके दे री खड़ी खड़ीफोटू ले लो फोटू ले लो न्यू कानां मैं भनक पड़ी
इक फोटू पै शिबजी भोला पार्वती भी गैल रही
एक फोटू पै पूर्णमल नूणादे भी खड़ी सही
एक फोटू पै हरिश्चन्द्र लाला कै रहे खुलवा बही
एक फोटू पै नल-दमयन्ती जित देवतां नै बात कही
एक फोटू पै पांचो देवता इन्द्र बरसै लगा झड़ी।
एक फोटू था राधा कृष्ण का फोटू खास दिख्या राख्या
एक फोटू पै गोपनियां में करता रास दिख्या राख्या
एक फोटू पै कंस पापी का करता नाश दिख्या राख्या
एक फोटू पै राजा रामचन्द्र कै हनमत पास दिख्या राख्या
एक फोटू पै राजा रावण जित सीताजी गई हड़ी।
एक फोटू पै कैरूं पांडु खेल रहे चौपड़ सार
एक फोटू पै कर्ण बली महाभार में रहे ललकार
एक फोटू पै गुरू द्रोणाचार्य भीष्मजी भी करैं बिचार
एक फोटू पै कैरूआं की महाभारत में हो री हार
एक फोटू पै कांटा टंगरा कित पासंग कित एक धड़ी।
एक फोटू पै हूरे मेनका देवतां में रहने आली
एक फोटू पै हीर खड़ी एक पै बैठया रांझा पाली
एक फोटू पै बाग-बगीचे फूल सींच रहा था माली
एक फोटू पै चन्द किरण का मोटी आंख पूतली काली
जाट मेहर सिंह पागल होंगे जब फोटू में आंख लड़ी।
रै गया बिगड़ जमाना ल्याज शर्म सब तारी : मेहर सिंह
रै गया बिगड़ जमाना ल्याज शर्म सब तारी।मात पिता और भाई बन्ध सब की गैल्या बैर हो गया
बैठना तै दूर रहा बोलणा भी जहर होग्या
अपणा सारा मित्र प्यारा धोखेबाज गैर होग्या
आज काल के छोरों देखे मां बाप पै मारै डाट
सुधी दे कै गाली बोलैं सुणले नै बुढ़े खुर्राट
ईब तेरा आड़ै नहीं ठिकाणा घर तै बाहर बिछा ले खाट
लाठी ले कै न्यूं भी कहै देचीज बाट दे म्हारी।
छोरां को भी दोष नहीं बुढ़ां का भी बिगड़ा ढंग
आछा आछा खावै भाई घर कुणबे ने राखै तंग
साठ साल के होकै ने ब्याह करवाणा चाहवै मलंग
धोले लते हाथ में डोगा बैठे-2 हुकम चलावै
सुलफा, और गांझा पीवैं ताशां की भी बाजी लावै
गालो की म्हां घुमें जा से बहु बेटी पै ध्यान डिगावै
मुछां पर कै हाथ फेर कै कुण सुणैगा म्हारी
ये बीर भी सतवन्ती कोन्या इन का भी मैं करूं ब्यान
गैर मर्द की गैल्या होले अपणे का ना राखै ध्यान
यारां सेती बात कर करके प्यारे के ले लै से प्रान
बहुत सी रुपये पैसे के लोभ में मनै ललचाती देखी
घर कुणबे की ईज्जत खौवै अपणी नै डुबाती देखी
रूपवान गुणवान छोड़ कै कंगले के संग जाती देखी
हर दम संकट जी नै रासा राखैं सै कलिहारी।
दुनियां में बेमारी फैली मोड्यां के भी बणगे पंथ
साधु और स्वादुओ के जगा जगा पै बैठे पंथ
गाम में भी घूणां उपर हमने देखे बैठे सन्त
बहुओं के काढ़े से ये बहुत से कनपाड़े फिरै
घर कुणबे तै लड़ कै भाई घी दुधों के लाड़े फिरै
म्हारे भारत में भोडे नागे 60 लाख उघाड़े फिरै
साधु थोड़े घणे रै स्वादु कोण कहै तपधारी।
भजनी सांगी गाम कै म्हां आकै नै बजावै ढोल
कच्ची मन्दी बाणी बोलै लुगांड़ा के फिरै टोल
सुण सुण कै ने राग रागनी माणस होज्या डावा डोल
कोए कहै बात ठेस की कोए कहै सौ का जोड़
रुपयो की बरसात करदे ना सुल्फे का कोए ओड़
कोए कहै बात काट दी लखमी चन्द नै कर दिया तोड़
कह मेहर सिंह समझणीयां ने सब तरियां लाचारी।
इस एमटी. के दुःख घने किस ढ़ाल गिणऊ मैं : मेहर सिंह
हो हो रे गौरी के बात बताऊ मैंइस एमटी. के दुःख घने किस ढ़ाल गिणऊ मैं।टेक
पहला दुःख गार्ड बूट पहर कैनै सौणां पड़ै
सीओ परेड की चिन्ता भारी एतबार भी खोणा पड़ै
बराबर की या नफरी ज्यादा सिंगल फाईल होना पड़ै
गाड़ी पै डिटेल हो ज्या सारी चिन्ता साथ हो ज्यां
सीएमई की इन्सपैक्सन हो ज्या बहुत बड़ी सुबात हो ज्या
काला मुंह और काले कपड़े काला सारा गात हो ज्या
रोज आना गाड़ी ले कै ड्यूटी पै जाऊं मैं।
कान-बाई मैं नम्बर पड़ग्या मेरी गाड़ी संग होगी
पहाड़ी ऊपर चढ़ती कौन्या गैयर नोट पुलिंग होगी
पास कर नै पिछली दूनिया सारी तंग होगी
अस टेरंग भी टाईट होरी आयल लिक सम्प करै
पैट्रोल की कमी घणी दुखी एसी पम्प करै
रोड है खराब गोरी गाड़ी घणी जम्प करै
कलच (किलच) दबा कै अगले पाछले गेर लगाऊं मैं।
फिटर भी सिर मार गए बोल कै देती रानी
रेडिएटर भी गर्म होरया गर्म तो बणावै पानी
सीएमई की चैकिंग वाले करते फिरते खैंचा तानी
गाड़ी में लोह-लकड़ गौरी बैठण की त ठौड़ कौन्या
लाईट जिस की ठीक प्यारी दिखता यो रोड़ कौन्या
अस्टेरंग भी टाईट गोरी कटता कितअ मौड़ कौन्या
तारीख 31 जेब खाली के लै कै खांऊ मैं।
टोचन कर कै र्स्टाट करी फैन बैल्ट टूट गया
ऊतराई मैं बरैक मारे पिछला टैर फूट गया
जल्दी कर कै टायर बदल्या जैक वहीं छूट गया
यूनिट के मैं पेसी होगी साथियों से मिलाप हुआ
28 दिन क्वार्ट गार्ड कोरट मार्सल माफ हुया
टुल बाक्स की चैकिंग होगी पैमेंट अपने आप हुया
कहे जाट मेहर सिंह जैक बता इब कित तै लाऊं मैं।
सुणो सबक उस्ताज जी द्यूं साराए सुणा जुबानी : मेहर सिंह
सुणो सबक उस्ताज जी द्यूं साराए सुणा जुबानी।टेकअलीफ से अजमेर, अटावा, आगरा अम्बाला हो सै
बे से बम्बई बणैं बड़ोदा और बरनाला हो सै
पे से पूना पालमपूर पंजाब और पटियाला हो से
त से तख्ती तीतर तरकश तमाशा तमाम देखो
टे से टेबल टाईम होता टांगा और ट्राम देखो
स से हो सलाद साबुत समर सरे आम देखो
जिम से जिमला जहाज जी जहाँ बतावैं पाणी।
च से चिड़िया चावल चाकू चमचा और चिनाव कहैं
ह से हिस्सा होलिया हाजिर और हबाब कहैं
ख से हो खरगोश खचर, खालीफा खवाब कहैं
दाल से दरमान दस्ता दरवाजा दीवार बनैं
डाल से हो डोल डिब्बा डलिया डोली तैयार बनैं
जाल से जखीरा जर्रा जिगर जमेवार बनैं
रे से राम रह याद जी रग रग में बसी है भवानी।
जे से जुल्फ जेब जेवर जर जबान मैं
सीन से सिलाम सितारे चमकैं जो असमान मैं
सीन से हो शिमला शायद शमां जलती है मकान मैं
स्वाद से सन्दूक साबुन सफाई सदा कथ सही
तोए से हो तो आन तानक तानक और तमीज कहीं
तोए से तोआ ताकर तबला तरज नई-नई
जोए से जुल्म करै कोए बाध जी दे जानत की छोड़ निशानी।
मीम से मदरसा मुल्ला मस्जिद में अजान करै
नून से नजम तैयार नई तो नादान करैं
वाव से हो वेव विधा औलाद इन्सान करै
हे से हिम्मत हारै मत, हाथ से कमाई कर
ये से यारी याद रख यारों की भलाई कर
सोच के नै जाट मेहर सिंह ठीक कविताई कर
रैह सब धन्धों से आजाद जी ये धन धन है जिन्दगानी।
काला सूं तै के होग्या दुनियां में मेरा उजाला : मेहर सिंह
सोना कहण लगा लोहे तै तू सब धातां में कालाकाला सूं तै के होग्या दुनियां में मेरा उजाला।टेक
गुट्ठी छल्ले बणैं मेरे मेरी फरकै मोर नाथ कै म्हा
रण कै म्हां तलवार चालती रहती मूठ हाथ कै म्हा
कठला कंठी मेख बणैं मेरी धरी जा चौंप दांत कै म्हा
बरमा मेरा मेरी हथोड़ी रहती उड़े साथ कै म्हां
हार मेरा सिंगार मेरा मेरी गल में मोहन माला
अड्डा कैंची बणै मेरे मेरा कठला बल वाला।
नई बहु नै टूम पहरादे बणज्या नार छबीली
राखड़ी कै म्हां छल्ला पड़ै बणज्या नार रंगीली
हंसला हंसली बर्ण मरे मेरी बणै नाक की तीली
अैहरण मेरी हथौड़ा मेरा नश पीट बणा दुं ढीली
घुंघट कै म्हा मेरा आवै बोरला न्यूं कटज्या सै चाला
तनै राखूं कैद अपणी में लगै ट्रंक कै ताला।
मामा नाना भात भरै दें नथनी चून्नी चोला
मेरी सूई टंगै मोड़ पै पड़ज्या रूक्का रोला
ईब जंग की तेजी हुई बिका एक सौ बीस का तोला
जहाज बर्ण मेरे टैंक बणै बणै बम्ब का गोला
तेरे बम्ब के गोलां नै मर्दां का कर दिया घाला
जित तूं कठा होज्या सै उड़ै डाका पड़ै सुखाला।
जिस घर में बास मेरा उस में घी का दीपक बलता
मेरे तवै बिन सारा कुणबा हांडै पेट मशलता
चुपका होज्या सोने मैं कहें बिना ना टलता
खुरपी दांती फाली बणै मेरे बिन हल ना चलता
तूं थोथा चना बाजै घणा कर दे बोलण का टाला
कहै जाट मेहर सिंह हुया फैंसला लोहा जीतग्या पाला।
चोर जार नशे बाज जुआरी खड़े पाप हत्थे पै : मेहर सिंह
चार जणां की लिखूं कहाणी कागज के गत्ते पै।चोर जार नशे बाज जुआरी खड़े पाप हत्थे पै।टेक
पहले वर्णन करूं चोर का ठा रहा हाथ कबाहड़ा
दुष्ट कमा कै खाते कोन्या फिरैं गेरते दाड़ा
घिटी कै म्हां गुठा दे दें ना देखैं ठाडा माड़ा
रस्ते क में कोए मिलै मुसाफिर तै लें हांगे तै झाड़ा
चोर दुष्ट ना बैठे देखे कदे माया के खते पै
धर्मराज घर-जूड़े जांगे पापी खम्बे तते कै।
जार आदमी का मेरे भाई पर त्रिया मैं मोह सै
सब कै इज्जत एक ढ़ाल की ना न्यारी न्यारी दो सै
वैश्या रांड़ का कुछ ना बिगड़ै समझणियों का खो सै
पकड़या जा जब जुत लगैं बता या के इज्जत हो सै
जार आदमी मरया करै काले पीले लत्ते पै
खीर खांड का भोजन तज कै डूबै गुड़ भत्ते पै।
नशे बाज तेरा हाल देख कै पाट्या घासी रह्या सूं
तर तर तर तर जुबान चलै शराब घणी पी रह्या सूं
सुलफा गांजा भांग धतूरा इन कै ताण जी रह्या सूं
खांसी खुरे के बस का कोन्या काफी खा घी रह्या सूं
फिलहाल तै मैं लाट सूं साबत कलकत्ते पै
नशा उतर ज्या जब डंड पेलै इमली के पतै पै।
चोर जार नशे बाज जुआरी सब तै भूंडे नर सैं
ओढ़ण पहरण नाहण खाण तै इन के बालक तरसैं
घाघरी तक भी छोड़ै कोन्या ऊत बेच दें घर सैं
मेहर सिंह भाई तेरे भजनां की सामण की जू बर सैं
सारा माल जिता कै घर दे छक्के और सतै पै
दाव हार ज्यां जब दे दे मारै हाथां नै मत्थे पै।
उमर कैद हो माणस की मैं न्यूं ना ब्याह करवाता : मेहर सिंह
मात पिता और कुटुम्ब कबीला सब झूठ जगत का नाताउमर कैद हो माणस की मैं न्यूं ना ब्याह करवाता।टेक
शेष नाग भी जती रहा जो विष्णु का प्यारा था
एक बणया राम एक बणया लछमन जब मनूष्य रूप धारया था
चौदह साल जती रह कै नै मेघनाथ मार्या था
युद्ध कर कै नै ब्याही सुलोचना वो बदला तारया था
जती रह्या और असुर मार दिया ना तै खुद आपै मर जाता।
शील गंगे भी जती रहा जो भीष्म था ब्रह्मचारी
उतरान को प्राण गये हुई स्वर्ग लोक की त्यारी
अपणे हाथां मौत बता दी पड़े धरण बलकारी
दुनिया कै म्हां रुका पड़ग्या पड़गी थी किलकारी
बड़े देवता फूल बगावैं खुश हुई गंगे माता।
वो हनुमान भी जती रहा जो जन्म जती कहलाया
जुल्म हुया जब रोक सुरज लिया दिन ना लिकड़न पाया
एक हाथ पै पहाड़ उठा सजीवन बूटी ल्याया
सोने की लंका फूंक दी भारी जंग मचाया
हनुमान बिन इस दुनियां में लछमन नै कोण बचाता।
रावण का भी जिक्र सुनांे पंडित था वेदाचारी
बेमाता पीसै पीसणा देती पवन बुहारी
इन्द्र देवता छिड़का करते देश राज बलकारी
उसी गर्वी ने जुल्म करा जा हड़ी रामचन्द्र की नारी
गर्व करणीयां इस दुनियां मैं पल छन मैं मर जाता।
पुरनमल का दोष नहीं नूनादे तेरा ताली
पुरनमल नै जगत सराहवै नूनां नै दे गाली
जो मां बेटे पै जुल्म करै वा मां हो सै चन्डाली
पुर्शामल का जिक्र सुणो जिस नै 360 सगाई टाली
स्वर्ग नरक का पता उड़ै जड़ै छन्द मेहरसिंह गाता।
मैं तेरी गैल चलूंगी हो जै मेरा कहण पुगावै : मेहर सिंह
मैं तेरी गैल चलूंगी हो जै मेरा कहण पुगावै।टेकगैल चलूंगी मेरे पिया करती कती समाई कोन्या
मेरे केसी दुनियां कै म्हां दुखिया और लुगाई कोन्या
मोड़ बांध कै ब्याह कै ल्याया करां कितै तै आई कोन्या।
देवर देवरानी जेठ जेठानी सब मारैं मेरे पै डाट
धरती कै म्हां क्यूकर सोज्यां सोवण नै ना मिलती खाट
दस सेर पक्का पड़ै पीसणा थारी चाकी के भार्या पाट
तेरी मां नै कोड करी सै हो मनै आधी रात जगावै।
मेरी दुरानी ऊत घणी वा हरदम राड जगावै सै
बात बात मैं हो मेरे पिया तेरा भाई लाठी ठावै सै
तेरा छोटा भाई आड़ै मनै कुछ भी कहकै बुलावै सै
सारे घर का काम करूं वा बैठी घरा पटरानी हो
फिर भी डाण टिकण ना देती भाई भतीजे खाणी हो
पायां कै म्हां जुती कोन्या फिरती कती उभाणी हो
इसा के खोट बता दे नै हो क्यूं माटी मेरी पिटवावै।
बरोणे कै म्हां आण कै बहोत घंणी दुःख पागी हो
सारा कुणबा मारै सै मेरी ज्यान मरण में आगी हो
तेरे छोटे भाई पै मारी थी वा चोट कसूती लागी हो
भका सिखा कै मनें पिटवावै देशां की बदकार हो
जै तू क्यांहे जोगा हो तै क्यूकर खा ल्यूं मार हो
मेरे करमां में कड़ै धरा था अनपढ़ मूढ़ ग्वार हो
जिस नै मिल्जया मूढ़ पति वा जीवते जी मर जावै।
हाथ जोड़ कै कहरी सूं एक मेरा कहण पुगाईये हो
तनै आछी नहीं लागती धड़ तै शीश उड़ाईये हो
इस कुकर्म तै आछी पिया न्यारी मनै बठाईये हो
देवर देवरानी जेठ जेठानी सब का कहण पुगाऊं मैं
तेरी माता के चरणां कै म्हां हरदम शीश झुकाऊं मैं
इस मैं मेरी गलती हो तै माफी तक भी चाहुं मैं
मेहर सिंह नगर बरोणा हो जिला रोहतक खास बतावै।
दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं : मेहर सिंह
पूत सुपात्र सपुत एक भतेरा चाहिएं बीस कुजाम नहीं।दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं।टेक
बाप और बेटा सास बहु के काण अर कादे भंग होगे
बहू भी जणै सास भी जणे पशुओं आले ढंग होगे
घर में पड़दा तण्या रहै ठारा बीस मलंग होगे।
कोये लिकड़ै कोये बड़े और दलिया ऊपर जंग होगे
जामण आले भी तंग होगे ठावे इनको राम नहीं।
किसे कै बैल किसे कै भैंस घर आ ग्या बंट वारे मैं।
कोये कोये बरतन भाण्डे ठाके जा बैठा पथवारे मैं।
बूढ़ा बुढ़िया दोनों रोवैं घर..............उसारे मैं
बुढ़िया फिरै जिडाई मरती मैं रात काट रही हारे मैं
इस कुन्बे कै बारे मैं रहया शरीर पै चाम नहीं।
घणा के जिकर करें इन दुनिया की राहियां का
किले पांच हकीकी ठारा संग मैं हक जमाइयां का
धरती बांटैं न्यारे हो ज्यां बांगड़ बाजै भईयां का
एक ओर नै बूढ़ा खड़या लखावै तोड़या औड़ तगाईयां का
समझणियां की मर हो गई मानै कोई गुलाम नहीं।
बुढ़ा बुढ़िया न्यों बतलाये के सुख हुआ पूतां का
जामे और पढ़ाये लिखाए गुह मूत कर्या ऊतां का
इस तै अच्छा तै बांझ भली थी यो लहन्डा ना होता कुतां का
बुढ़ा बुढ़िया दोनों चाल पड़े यो कुनबा छोड़ दिया सूतां का
कहैं मेहर सिंह जाट कपूतां का रहना चाहिये नाम नहीं।
बैहरा क्यूं बणै सै सुण ले खोल कै नै कान : मेहर सिंह
औम नाम भूल गया तूं कैसा इन्सान।बैहरा क्यूं बणै सै सुण ले खोल कै नै कान।टेक
समझण सोचण लायक हुया जब आंख मीच ली
भजन की आण खींच ली डूबग्या कार नीच ली
आग ली ना पीछली बीचली स्थान।
बहुत सा कमाया फिर भी पूरा ना पट्या
क्यों कि औम ना रट्या दिन दिन जा है घट्या
आज डट्या कल चाल्या जागा दो दिन का मेहमान।
के धन ले कै जागा बन्दे के ले कै आया
भूलग्या औम ना गाया देख कै रूप गर्भाया
सपनै कैसी काया माया झूठा है तूफान।
हो सकती ना टाल काल तेरे सिर पै घोरै
तूं बंधज्या चित कै डोरै, चाल जाटी कै गोरै
गुरु लखमीचन्द कै धौरे मेहर सिंह सीखले नै ज्ञान।
अपने रहन सहन की खातिर मनै ऐसा संविधान बनाया है : मेहर सिंह
परिक्षित से कलयुग न्यूं बोल्या ईब राज मेरा आया हैअपने रहन सहन की खातिर मनै ऐसा संविधान बनाया है।टेक
सोने कै तै काई लाद्यूं आंच साच कै कर द्यूंगा
वेद शास्त्र उपनिषदां नै सतयुग खातिर धर द्यूंगा
सत्पुरुषां नै नहीं ठिकाणा चोर उचक्के भर द्यूंगा
राह सर चालणियां माणस की तै रे रे माटी कर द्यूंगा
धड़ तै नाड़ कतर द्यूंगा जिन्हें गुण प्रभु का गाया है।
मेरे राज मौज करेंगे ठग डाकु चोर लुटेरे
हरि ओम का नाम हो उड़ै उजड़ कर द्यूं डेरे
ले कै दे ना कर कै खाना वे सेवक होंगे मेरे
पापी माणस की अर्थी पै जांगे फुल बखेरे
उनके कर द्यूं गहरे जिस नै बेहद पाप कमाया है।
साच बोलणिया मेरे राज मैं जीवण का हकदार नहीं
दा पै दा और पेट का काला उस माणस की हार नहीं
जै कोए साचा साची कहै दे उस पै सोच विचार नहीं
गरीब आदमी सच्चे सेवक की किते बसावै पार नहीं
उस कै लागै लार नहीं वो धर्म कर्म पै छाया है।
राह सर चालै तै ऐंठ काढ़ द्यूं ये कलयुग का ब्यान होगा
छल नीति से बात करै उसका आदर मान होगा
उतनी इज्जत चढ़ै शिखर जितना बेईमान होगा
गुरु लखमीचन्द गरीब आदमी का साथी ना भगवान होगा
कह मेहर सिंह वो धनवान होगा जिन्है बेइमाने का खाया है।
भई मतना लावै हाथ मेरै मैं सूं पति भरता नारी : मेहर सिंह
देसां के बेइमान डिगरजा क्यों अकल राम नै मारीभई मतना लावै हाथ मेरै मैं सूं पति भरता नारी।टेक
भई पतिभरता का धर्म यों सै देखैं नहीं घर समय पति नै
रावण सरीख मरै थे देख कर अपनी कर्म गती नै
एक दिन कीचक मरवाये थे रै द्रौपद नार सति नै
ओला सौला मतना बोले कर लें ठीक मति नै
भई बुरे काम का दण्ड मिलै गा जब पड़ेगी मुसीबत भारी।
भई थी गौतम की नारी चन्द्रमा नै छेड़ी
पीछे पिछताया जब घली पाप की बेड़ी
क्यों तेरे उलटे दिन आ रे सैं रे हट जा खोहा खेड़ी
भई जान पूछ कै मृग नहीं चैंर जेड़ें काल खड़ा हो होड़ी
भई तेरे कैसे न्योंवे भुगता करते जो करते चोरी जारी।
जान पूछ कर पाप करै वो घरै बुराई सिर पै
जी तूं कहै रया वो बनती कोना मेरै लागै चोट जिगर कै
मेरा तेरा फैसला होगा धर्मराज के घर पै
ओले ओले कर्म करन लागज्या जिब गिरदूस आवै सै नर पै
ले ज्यांगे जलाद पकड़ कै ते अरे चालै नागी होंश्यारी।
भई थोड़े दिन तनै जीना पड़ ग्या खोटे कुकर्म करकै
देख लिये चाहे चौकस फूटै घड़ा पाप का भर कै
इस मैं कैह रही हूं तूं बात करै न डर कै
भसमासुर भी मरे थे हाथ शीश पै धर कै
भई बाली सत तोड़े था तारा का जिस नै जीती बाजी हारी।
बड़े-बड़े ऋषि महात्मा ना धरती पै ठहरे
नारद नै भी मुक्ति खातर भजन करे थे बड़े गहरे
ईसक रूप का जहर रह सै इतने ले सै लहरे
भाई सोच समझ कर चलना चाहिये
जाट मेहर सिंह न्यों कह रे
कभी न कभी धर्मराज के होंगे वारन्ट जारी।
देखे नकली महाशय भाई : मेहर सिंह
वैदिक धर्म जाण्ते कोन्या झूठी करैं सफाईदेखे नकली महाशय भाई।टेक
जितने हैं महाशय भाई सभी हाहाकार करते
तुम ही तो सुनने वाले कितनी मारा मार करते
ज्ञान की कोए बात नहीं अवगुण को इजहार करते
जितने है महाशय भाई सब पेट का रोजगार करते
पाछे तै मे काट करैं आगे से प्यार करते
जितने भाई सूनने वाले क्यों नहीं विचार करते
ये तै अपणी करैं बड़ाई।
उन ही का काम भाई उन ही कै सिर पाड़ै रोट
महाशय जी का काम देखो कितनी गहरी मारैं चोट
उन ही का काम भाई उन ही के सिर काढ़ैं खोट
असली थे महाशय भाई नकली बनाने लगे
महाशय जी का काम देखो कैसा गाना गाने लगे
बड़े बड़ों की धूल को खुद आप ही उड़ाने लगे
स्वामी जी कै भी बट्टा ला दिया जिसने या कौम बचाई।
ईब कै बताऊंगा कुछ सांगियां के काम भाई
सांगियां नै खो दिया बाहमणां का नाम भाई
वेदाचारी रहे कोन्या हो गये गुलाम भाई
आप ही तो पढ़्या करते औरों को पढ़ाया करते
ब्राह्मणों की मान थी ब्राह्मण पुजे जाया करते
बेदों के भण्डार थे औरों को सिखाया करते
आज बणगे लोग लुगाई।
एक बै तै देखते ही आगे से प्रेम कितना
घर में मुस्के कला करैं नखरा करते मेम कितना
दो घड़ी रैं रैं करकें खो दे सै टेम कितना
म्हारे तै के जिद लाओ हम तैं सां उता कै ऊत
जो कोए म्हारी काट करै वे नर जागे ऊत न पूत
के तै राजी खुशी मान जावैं ना तें बाद में बजा द्यां जूत
कहै मेहर सिंह छन्द गा कै बता कुणसी झूठ बहकाई।
कोए रहया ना सब नै जाणा दो दिन आगै और पिछै : मेहर सिंह
जीव अमानत खुद ईश्वर की हंस कै दे मत मुट्ठी भिंचैकोए रहया ना सब नै जाणा दो दिन आगै और पिछै।टेक
इसे इसे भी नहीं रहै जगत में दुनिया का रासा सुण कै
जीव पिंजरा बन्द भौरे मैं रावण का बासा सुण कै
श्री रामचन्द्र तै करी लड़ाई तकदीरी पासा सुण कै
आप मर्या और कुटम्ब खपाया तोड़ कती खासा सुण कै
गगन चढ़ी फर्राट करै थी टूट धजा गिरगी नीचै।
आए थे कुछ ठहरण खातिर करा वापसी वेट चले
टेशन पर तै टिकट कटा कै गाड़ी कै म्हां बैठ चले
कोए उत्तर नै कोए दक्षिण नै पूर्व पछम गेट चले
बड़े बड़े अमरावत तज कै ऐश अमीरी सेठ चले
बिन पहिया बिन चैन लैन मौत रेल सबनै खिंचै।
जोरा सिंह शिशपाल कंस जिनसे सभी लोग कांप्या करते
इसे इसे भी नहीं रहे जगत में जो दुजा ना थाप्या करते
हिरणाकुश से पापी होंगे जो भगत मार धाप्या करते
वो पांडो भी कित चले गये जो डंगा धरती नाप्या करते
किस किस के इतिहास सुणाऊं आंख खोल मतना मिंचै।
सतगुरु के परखे बिन तिन चेला खोटा रहै खर्या हो ना
मेहर सिंह वो गाणा किसा जिस छन्द में रस भर्या हो ना
ऐसा कोण होया जगत में जो पैदा हुया भरा हो ना
सूखा वृक्ष बाग मैं पौधा हट कै फेर हर्या हो ना
जिस कै फल लागण की आश नहीं क्यूं लाकड़ मैं पाणी सींचै।
करकै कौल करार बखत पै नाटणियां रैहरे सैंटैक : मेहर सिंह
आग्या बुरा जमाना मत लब गाठणियां रैहरे सैंकरकै कौल करार बखत पै नाटणियां रैहरे सैं।टैक
झूठ बराबर पाप नहीं बिन बोले सरता कोन्या रै
लोभ बराबर नहीं नीचता पर पेटा भरता कोन्या रै
परत्रिया हौं नागिण काली नर फिर भी डरता कोन्या रै
ये तै हौं सैं लाड करण की पर कोए भी करता कोन्या रै
आज काल भाई के सिर नै काटणियां रैहरे सैं।
अगड़ पड़ौसी न्यूं सोचें जां ना क्यांहे का चा हो रै
घर का होज्या उट मटीला ना छोरयां का ब्याह हो रै
मीठा बोल कालजा खा जा ना दुखै ना घा हो रै
अपणा मारै उड़ै गेरै धूप नहीं जित छां हो रै
गैरां की बहू बेटी नै घर पै डाटणियां रैहरे सैं।
मनै थोड़े माणस धर्म की खेती बोवण ओले देखे रै
मनै थोड़े माणस बात कान में चोवण आले देखे रै
थोड़े प्यारे ज्यान बखत पै खोवण आले देखे रै
बीस ऊत मनै धुम्मे के मिस रोवण आले देखे रै
ब्याह की जगह मौत पै लाडू बांटणियां रैहरे सैं।
के जीण्यां मैं जीवै सैं ये दुखी सैं गरीब बेचारे
धोखा दे कै मरवा दे सैं आज काल के प्यारे
कोण सै अपणा कुण पराया मनै पड़ते ला लिए सारे
बहुत से माणस रोवै सैं इस मेहर सिंह के मारे
मैं जाणूं सूं नीचें तै जड़ काटणियां रैहरे सैं।
देख देख ढंग दुनिया कर मनै अचरज सा आवै सै : मेहर सिंह
न्यारे न्यारे ख्याल जमाना के सुणना चाहवै सैदेख देख ढंग दुनिया कर मनै अचरज सा आवै सै।टेक
कोए कैह सै लखमीचन्द के गीत पुराने गा दे
कोए कैह सै नौटंकी के दो एक टूक पकड़ा दे
कोए कैह सै पूर्णमल की सारी कथा सुणा दे
कोए कैह मनै हरिश्चन्द्र का सारा हाल बता दे
बेरा ना लोगां नै इन बातां मैं के थ्यावै सै।
कोए कैह सै तर्ज फिल्म की बढ़िया गादे गाणा
कोए कैह सही शब्द बोल कोए सुण ले बड्डा स्याणा
कोए कैह सै बता हीर नै क्यें ब्याह कै लेग्या काणा
कोए कैह सै पद्मावत का चाहिए हाल बताणा
कोए कैह सै यो रोट पाड़ सै कई बै आ जावै सै।
कोए कैह गोपी चन्द मैं कै बोल्या बाजे नाई
कोए कैह तूं ठीक बोल आड़ै बैठे लोग लुगाई
कोए कैह तारा चन्द गादे गादे मीरा बाई
कोए कैह दिये छोड़ कथा ना म्हारी समझ मैं आई
कोए कैह ईह नै कुछ ना आता व्यर्था मुंह बावै सै।
कोए कैह सै सुणा रागनी बहोत फिरै सै मरते
कोए कैह छोरे आज रात नै रांद काट कै धर दे
कोए कैह तूं बणा कै देवी खड़ी सामनै कर दे
जाट मेहर सिंह गावणियां बता किस किस का पेटा भर दे
एक ऊत आण कै न्यूं बोल्या तूं के घंटा गावै सै।
इसी रकम की चाहना कोन्या मत जाणे का नाम लिए : मेहर सिंह
छुट्टी के दिन पूरे होगे दिल आपणे नै थाम लिएइसी रकम की चाहना कोन्या मत जाणे का नाम लिए।टेक
इस पेट की खातिर सब कुछ करणा के धिगताणा चालै सै
मेरी याणी उम्र अकेली रैहगी क्यूं गल मैं फांसी घालै सै
तूं सुबक सुबक कै रोवै मतना मेरा का लजा हालै सै
तूं ठुकरा कै चाल पड़्या मेरी जिन्दगी राम हवालै सै
तेरी जिन्दगी राम हवाले कोन्या चाहिए जितने दाम लिए
दामां नै के फूकूंगी जिब खिंड जोबन के आम लिए।
क्यूंकर आम खिंड़ें जोबन के महीने भीतर आल्यूं मैं
जै ना आया तै भईयां की सूं जहर मंगा कै खाल्यूं मैं
जै ना आया तै चिट्ठी गेरूं अपणे पास बुलाल्यूं मैं
सारी रात एकली सोऊं क्यूं कर दिल समझाल्यूं मैं
जै दिल भी ना समझाया जा तै आपै हो बदनाम लिए
जै मेरी बात मैं फर्क लिकड़या जा तार बदन का चाम लिए।
घणी देर का कैह र्या सूं तेरी नहीं समझ मैं आई
पिया बड़े बडेरे कैहते आए मर्दा गैल लुगाई
डाट लिए तूं झाल बदन की इस मैं तेरी भलाई
गोडे दे छाती पै चढ़ज्या पापी ईश्क कसाई
जै इज्जत का ख्याल करै तै ईश्क कै घाल लगाम लिए
किस नै ले कौली मैं सोज्यां के मनै बेटा बेटी जाम लिए।
तुरन्त का लिप्या दिखै सै आगे का ख्याल करया कोन्या
तेरे प्रेम मैं मरी पड़ी सुं इस मैं खोट मेरा कोन्या
तूं घरां बैठ कै खा लेगी ईसा धन का कुंआ भर्या कोन्या
कह नै मेहर सिंह ख्याल बीर नै मर्दां बिना सर्या कोन्या
दुख हो कै सुख होया करै तूं भोग सभी आराम लिए
जै ब्याही बीर का सुख चाहवै तै छोड़ दूसरा काम दिये।
इन उतां का सांग देख थरी क्यूं अकल बैहरी सै : मेहर सिंह
खामखां क्यूं खर्चा ठाओ थारै के फैहरी सै।इन उतां का सांग देख थरी क्यूं अकल बैहरी सै।टेक
बीस घरां तै चून मांग कै दस का ढे़ड बुलाए
फलसे कै म्हां बालक बोले देखो सांगी आए
ताता पाणी कर्या डेग मैं अपणे हाथ न्हवाऐं
करी कुशामंद खातिरदारी भर भर होक्के प्याये
घी बूरा और चून साग की लगी झड़ी गैहरी सै।
मात पिता चाचा ताऊ से कती नहीं शर्माते
उल्टी सीधी कैहण लागज्यां कैह कै पोप ख्जिाते
वेदों के पढ़ने वाले आज टूक नाच कै खाते
टूम सजा दें स्याही घालैं तेलै नई तील पैहरी सै।
कपड़े पहर खड़या हुया तखत पै चौगरदै नाड़ घुमाई
पाच्छे सी नै बहाण बैठ जा आगे सी नै भाई
ऐड मार झट ढुंगा मार्या चारों आंख मिलाई
सारयां म्हां नै सैन मारज्यो जरा शर्म ना आई
एक बहाण की साहमी नाचै नाचणुआं तै शर्म कड़ै रैंहरी सै।
दादी चाची ताई की ये कोन्या छांट करैं सैं
ईज्जत और आबरू नै कती बारा बाट करैं सैं
इन ऊतां की कुशामन्द क्यूं ये डुबे जाट करै सैं
मेहर सिंह की सुणो रागणी पाछे तै काट करैं सैं
सांगी लुच्चें ऊत बताऐ या न्यूं पबलक कैहरी सैं।
देश के उपर ज्यान झोंक दी लिख चिठी मैं गेर दियो : मेहर सिंह
साथ रहणियां संग के साथी दया मेरे पै फेर दियोदेश के उपर ज्यान झोंक दी लिख चिठी मैं गेर दियो।टेक
सब तै पहलम मेरे मात पिता नै चरणां मैं प्रणाम लिखो
चाचा ताऊ बड़े बड़ों नै मेरी दुआ सलाम लिखो
साथ रहणियां संग के साथी सब को राम राम लिखो
मां के जाए भाईयां नै मेरा ऐक जरूरी काम लिखो
जिस रस्ते मेरी अर्थी जा उस रस्ते फूल बिखेर दियो।
मेरी लाजवन्ती कै धोरै लिख द्यो नहीं फिकर में गात करै
कोण किसै की गैल्यां आया कोण किसै का साथ करै
एक दिन सब नै जाणा होगा कदे चिन्ता दिन रात करै
या तै ईज्जत म्हारी रै करें मामुली सी बात करै
जिस की गैल्यां खाई खेली वा छोड़ सज्जन की मेर दियो।
अपणे दिल मैं, जिन्दा सोचै कदे खान दान मैं टुक होज्या
छोटी छोटी दो मूरत सैं कदे बालक पण मैं दुःख होज्या
पाल पोस कै बड़े करै तै जिन्दगी भर का सुख होज्या
जवान अवस्था बाप की तरियां देश धर्म मैं रूख होज्या
जै बाप का बदला लेणा हो तै उचे सुर मैं टेर दियो।
हाथ जोड़ कै कैहर्या सूं मेरा इतणा कहण पुगाईयो
जाट के घर मैं जन्म लिया मत उल्टा कदम हटाईयो
जिस जननी का दूध पिया मत रण मैं आण लजाईयो
भारत मां की सेवा कर कै देश की ज्यान बचाईयो
कैह जाट मेहर सिंह रण मैं जा कै कर दुश्मन का ढेर दियो।
छोड़ कै खाट खड़या होग्या : मेहर सिंह
बांच कै गोरमैन्ट का तार झड़गी चेहरे की लालीछोड़ कै खाट खड़या होग्या।टेक
ईब तै जाणा था कई दिन मैं
न्यूं वो फिकर करण लग्या तन मैं
मन मैं सौ सौ करै विचार, उड़दी गात मैं डाली
ला कै डाट खड़या हो ग्या।
मनै चलते नै बिस्तर धारे
जुड़गे अगड़ पड़ौसी सारे
मित्र प्यारे खड़या परिवार मां दामण आली
कालजा पाट खड़या हो ग्या।
सब बातों का छुटग्या भरम
करड़ा हिरदा हो ग्या नरम
होग्या देश धर्म मैं प्यार सुरती उस हर मैं लाली
मेहर सिंह जाट ख्ड़या होग्या।
मैं का बोल मर्द नै डोबै चोर नै डोबै खांसी : मेहर सिंह
आलकस नींद किसान नै डोबै बीर नै डोबै हांसीमैं का बोल मर्द नै डोबै चोर नै डोबै खांसी।टेक
साढ़ भादवा आसौज बरसै जमींदार पड़या सोवे
जमीन मैं डांगर ढोर चरै देख देख कै रोवै
सूकी करै शोकिनी बावला अपणा-ए धन खोबै
कर्मां के फल मिल्या करैं सैं काटै जिसा बोवै
सब तै आंख चुरावै उसने कहैं पुरा सत्यानाशी।
आपें मैं मजबूत रहैं वे गर्द आदमी हों सैं
जिन तै हर दम फिकरा चरा रहैं वे जर्द आदमी हों सैं
सबतै पाटा टुटी राखैं वे कर्द आदमी हों सैं
दुख दर्द आदमी हों सैं जिन कै घलै प्रेम की फांसी।
सांझै बिछड़ कुटम्ब तै चोर चोरी करने चाल्या
लगा विचारण सोण हुए जब कांप कालजा हाल्या
ठाडु ठाडु खांसण लाग्या जब काल गले मैं घाल्या
एक गरीब था निर्धन मनुष्य जिसका घर पाड़न का स्याला
ईश्वर का नाम लिया वो बणया नर्क का वासी।
मेहर सिंह ये त्रिया ना अपनी बिना नाथ की हों सैं
जो काम सोचैं वाहे कर दे बिना गात की हों सैं
आजमा कै देख लिया ये घड़ी स्यात की हों सैं
जैसे काल के मुख मैं आज्या माणस ये बिना जात की हों सैं
सच्चे पिता मात की हों सैं उन्हें मणी कहो चाहे अठमासी।
रट कै करतार की माला : मेहर सिंह
जीणा दिन चार होज्यागा पाररट कै करतार की माला।टेक
लाग्या था कुबद कमावण
बण मैं गया जानकी नै ठावण
उस रावण के शेर, चालै फैर, मत कर बैर, कापाला।
मुर्ख बात घड़ै क्यू ठाली
तेरी तै एक पेश ना चाली
उस बाली की ढाल, खाज्या काल, मतकरै आल, हो चाला
किचक था खोहा खेड़ी
घाल ली काल बली नै बेड़ी
छेड़ी द्रोपद नार, वो दिया मार, जो सरदार का साला।
मेहर सिंह भजन कर सूत
वे हों सैं देशां के ऊत
यम के दूत करोड़, दें सिर फोड़, ले ज्यांगे तोड़ कै ताला।
सोच समझ कै चाल गलती मैं बणी सो बणी : मेहर सिंह
सोच समझ कै चाल गलती मैं बणी सो बणी।चोरी जारी और बदमाशी की कहीं नहीं टकसाल
बिना पढ़ाया आपै पढ़गा ऐसे कर्म चण्डाल
बदी की पट्टी थी जितणी।
कान पकड़ कै आगै कर ले एक दिन तुझको काल
मात पिता बंधू सुत धारा जब कोण अड़ा लेगा ढ़ाल
अकेली जागी ज्यान अपणी।
धर्मराज तेरे कर्मां की एक दिन करै सम्भाल
चिमटे लाल करा कै खिंचवा देगा खाल
जिगर मैं चालैं सैलां की ऐणी।
बालकपण मैं भूल गया दुनिया दारी के खयाल
काट्या जा तै काट मेहर सिंह मोह ममता का जाल
गीता तै गाली बहुत घणी।

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