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गणेशीलाल व्यास ‘उस्ताद’ की रचनाएँ कविताएँ : Ganeshilal Vyas Poems

 गणेशीलाल व्यास ‘उस्ताद’ (1907–1965) जोधपुर के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार थे। वे राजस्थानी और हिंदी साहित्य से जुड़े हुए थे तथा अपनी काव्य-रचनाओं के लिए प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं में राजस्थान की संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक चेतना के विविध स्वर दिखाई देते हैं। राजस्थानी साहित्य के आधुनिक दौर के कवियों में उनका उल्लेख किया जाता है।

Ganeshilal Vyas
Ganeshilal Vyas 


अरे बुझागड़!

अरे बुझागड़!
थारा जंतर जोतस अणुबम
कोरी फाड़-उधेड़ बैंतणी, कम सीणौ है
जग लखग्यौ पिंडताई री परघै पोची, पींदै तीणौ है।
अरे मांनखा!
इण जुग जीवण री गत व्हेगी
पण क्यूं डिगमिग थारा पगल्या, मन हीणौ है
डरप मती, दो हाथ मजूरी कांमधेण, धरती धीणौ है।
अरे सूरमा!
जुग झाटक री धमक सुणी जद
घर क्यूं न्हाटै, कमर खुली क्यूं, रग खीणौ है
भिचक मती, जीवण सारू पग-पग लड़णौ, मरणौ जीणौ है।
अरे जवांनी!
नर-नारी री नस क्यूं निंवगी
लाल रगत री गरमी निठगी, सुर झीणौ है
भूल-मती, इमरत पैली सागर मथणौ है, विस पीणौ है।
अरे सुगायक!
नवै मिनख रै सादै सुर में
जन मैणत री राग सुणा, जद परवीणौ है
उळझ मती, जन रै जीवण में सांचौ धन, कपड़ौ कीणौ है।
अरे बुझागड़!

आ जन कवि री जुग वांणी

आ जन कवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी
कोई लाख जतन कर हारै, वा समझै साच सुणांणी॥
कोई मार कूट धमकाई, धन कुरब धांम ललचाई
सौ जुग रा जुलमी खपग्या, इण करी नहीं सुणवाई,
आखड़िया सौ आथड़िया, इण माथै धूंस जमांणी,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।
जद गोरी हुकमत अड़ती, सड़कां पर गोळ्यां झड़ती,
जेळां में चौखट चढ़ियां, मोरां री खाल उधड़ती,
पिण ‘जै भारत’ घुरराता, नरसिंह जुत्योड़ा घांणी,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।
तरवार चली इण लारै, उण जुग जुन री पौ'बारै,
जद इण पर जुलम जतायौ, पात्यां पिघळी फटकारै,
धन धरती रा धोड़ती, धींगाई धरी अड़ांणै,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।
आ चोट लग्यां चमकै है, निरणां पेटां दमकै है,
फाटा गाभां नै रण रा, झंड़ा गिणत गमकै है,
इण रा घण टाबर जांणै, विपतां माथै मुस्कांणी,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।
आ भूला समझावैला, ऊजड़ खड़तां पालैला,
पूठै इण घड़ी अगाड़ी, होळी, हालै, हालैला,
जुग-जुग इण री भावी है, सिलगांणी वळै बणांणी,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।
गायक इक दिन मिट जासी, पिण अेड़ा गीत बणासी,
जन जन रै कंठां रमसी, पीढ़ी दर पीढ़ी गासी,
आ काया तौ कवि री है, पिण जनता री जुग वांणी,
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी,
कोई लाख जतन कर हारै, आ समझै साच सुणांणी
आ जनकवि री जुग वांणी, आ कदै न चुप रह जांणी।

आजादी री जीत कठै है

सुख समता री रीत कठै है, आजादी री जीत कठै है,
तन रौ जळ आंसू बण बेहग्यौ, हलक सूखग्यौ गीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
कांन सुणै पिण निजर न आवै, वो वरदांन किसौ सुख लावै,
सुणतां मन बिखरै उण सुर में, जीवण रौ संगीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
जूंना आगीवांण बडेरा, खेतां छोड्या नवा बछेरा,
पिण सादा मिनखां रै मन में पागी री परतीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
ठग-राजी, जन रौ मन सीझै, लोक लड्यौ पिण जात पूजीजै,
जन खांधै पग मेल सिखर पर, चढ़ग्या बांरी नीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
जीवण ज्यांरी मैणत मांगै, दळ दाळद वांरा सिर भांगै,
पूत रमै कादै सूं होळी, सैंग लड़ै जद प्रीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
राड़ बधै है ध्यांन हटै है, भाव चढै है चीज घटै है,
जन हाकम आजाद मुलक रा, अटक करै बै मीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
उछळ-कूद नित करै बछेरा, पिण क्यूं उछळै आप बडेरा,
जुग मारग री चौपड़ माथै, रण रुळग्यौ रणजीत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।
हाकम हक सूं हेत बधावै, जन दिन दूणौ धन निपजावै,
अक मनै बधतै जन बळ रौ, पथ रूंधै बा भींत कठै है,
आजादी री जीत कठै है।

बंदा मैणत री जै बोल

बंदा हिम्मत री जय बोल, बंदा मैणत री जै बोल,
आ जमीं सिरां रै मोल, साथी इण रौ भारी तोल,
साथी हिम्मत री जै बोल, बंदा मैणत री जै बोल।
धर मजलां परदेसी आया, लीवी चाकरी चोखी,
सूतोड़ा री गरदन वाढ़ी, सरम पगांत्यै न्हांखी
औ रजवाड़ां रौ डोळ, साथ'ई कोरी छोरा रोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बंदा मैणत री जै बोल।
पाळी ऊपर अैक डोकरौ, सौ जुग पैली मरग्यौ,
पूत मोल में धरती दाबी, नवौ रावळौ बणग्यौ,
आ जागीरां री पोल, साथी निरभै हुयनै खोल,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
दादौसा सायब रा चाकर, मरजी रा चपड़ासी,
पासवांन रा गाभा धोया, कटगी भव री पासी,
अे हाकम हिवड़ै हौल, साथी सारा अणघड़ टोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
सेठ गिया परदेस कमावण, संग लै लोटौ डोरी,
दीवी धरम नै गोडां लकड़ी, सड़पै संतप बोरी,
अब सेठ बध्या बेडोळ, साथी पेट हुवा है ढोल,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
राजा ठाकर सेठ अलमद, निरभै मोजां मांणै,
मुलक मुलक में अकण ढाळै, कमतरियां नै तांणै,
थूं मन में मत कर मोळ, साथी सारी दुनिया गोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
मैणत सूं थै धन निपजावौ, पिण अकल रौ घाटौ,
अफसर सेठ सिपाई ठाकर, सगळा चाटै चाटौ,
जद थें उतरौ खम खोळ, साथी यांनै दो रगदोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
धूधूकारौ मच्यौ जगत में, जूंना भाखर धूजै,
मोट्यारी घर मच्यौ उछाळौ, बूढ़ां नै कुण बूझै
ओ परिंडै घुळग्यौ घोळ, साथी काचौ टिकै न झोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।
थै गिणती में घणा भायलां, हाकै सूं क्यूं डरपौ,
गिणती रा तिणका है चुगलौ, वाढ़ेती ले झड़पौ,
थें धरौ धमक नै ढोल, साथी करदौ बींटा गोळ,
साथी हिम्मत री जै बोल, बन्दा मैणत री जै बोल।

दीवट

ओ रै भाया, रुक मत भाई, झुक मत भाई
ऊजड़ खड़ती आंधी आई
दो झटका दे आ ढळ जासी,
आ गळ जासी रेत चढाही
रुकतां पैली आप मरैली,
जीव जठै तक आगै जाही
ओ रे बेली, काया कंवळाई
अड़ब रंगीला, काळा, भूरा, पीळा जागै, बाट बटाही
तूं सागै आगै बध जुग रै
जीवण दे, जीवण रै तांही
ओ रे सुगणा, छक मत भाई, तक मत भाई
नवी कटै है बरग लड़ाई
धर मजलां जीवण जोड़ै बध
दीवट लेले पंथ बताही
ओ रे उरजन, डर मत भाई, मर मत भाई
दिन-दिन दीसै मजल सवाई
आ थारी काया पड़ जासी
पिण दे जीवण चाल गटाही
नित आगै बधती जिंदगानी
आ दीवट आगै ले जाही!

घरे आजा

आ रेत हुई रुतमाती, सांईणा थारी
धरण बुलावै घरे आजा!
आ बाय चलै बरसाती, रंगराजा थारी
कामण घबरावै घरे आजा!
नवी जोड़ थारी नै म्हारी, नवी जोड़ नारां री
आभै नवा बधाऊ दोड़ै, चढी उमंग सारां री
रुत हाळी थारा, बहल्या उकळावै घरे आजा!
इण जुग रा भागीरथ ल्यासी, सूखै थळ में पाणी
बाग-बगीचां सूं ढर जासी, खड़ै खेतड़ा ढाणी
मनमाळी थारी, क्यारयां कुमळावै, घरे आजा!
आठ मास परदेसां बीत्यां, अब बिरखा रुत आई
धण, धीणो, धरती सै तड़फै पुळ-पुळ तिरस बधाई
धनगोरी थारी, गायां रं भावै घरे आजा!
नगर, गांव, खेड़ां में लाग्या, जन-महनत रा मेळा
नर-नारी कमतर में कूदया, जन-कारज में भेळा
बळहाथी थारी, मरवण सरमावै, घरे आजा!

इण जुग रा इकबार

रण धूंसा रजथान रा, बै जूंना इकबार
इण जुग आडा पसरग्या, लोभ किया लाचार
रगत राळ नै राखता, कलम कह्यो री कांण
डूंम दलाली में दबी, इकबारां री आंण
जन-मन ज्यांनै जांणतौ, जुग-जीवण पतवार
पूंछ बंध्या गोडा घिसै, विग्यापन री लार
इकबारां रै आंगणै, नकटा बाजै नेक
अकल अडांणी रावळै, टुकड़ां टुळगी टेक
रूळै राज में रोवता, दर-दर देखै दांन
डर दळ-दळ में डूबगी, संपादक री स्यांन
खोटी खबरां नित घड़े, निसंग करै बोपार
आप कहौ ज्यूं छापदै, देखै दस कलदार

जन जन रै मन हेत चाहीजै

जन जन रै मन हेत चाहीजै
जुग सांधे संकट बेळा सगळा सुभट सचेत चाहीजै
जिण जनता में फूट फजीता, खुली किंवाड़्या लोग नचीता
तक मिळतां उण घर में बड़सी, लूंक सियाळ्या गंडक चीता
जन बळ भेळप बजर कटै, पण तन बळ तेज समेत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
धरम ढूंग रा मुळ्या खलीता, जात पांत रा जिग्या पलीता
जुग जीवन में लाय लगावण, पनप रह्या जन लोई पीता
फूट समंद री भंवरां तिरबा, जन मन भेळप सेत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
लिख्या लेख सूं लोक मुगत है, पण जीवण जंजाळ जुगत है
नवा राव ने नवा रावळा, कुण जांणै जन री हुकूमत है
राज करै वांरी रसना में, करी बात रो वैंत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
अेक चरै चौरासी पीसै, उण घर समता किण विध दीसै
जन रा खायक करै खंखारा, जन रा भीड़ू मुड़दा घींसै
धाड़वियां रै धूड़ माजनै न्हाकण मूठी रेत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
नेता हाकम ने इदकारी, हळधर-कळधर जनता सारी
अेकमना पुरसारथ कर नै, मुलक करै केसर री क्यारी
भुज मैणत रा सखरा सीरी, खरौ कमायौ खेत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
धर खेंचण दुसमण सींवाड़ै, दो चीता दोनूं दिस दाड़ै
अेकमनौ जाग्यां जन जोबन, अेक भिड़ै इक्कीस पछाड़ै
बजरबळी भारत रै रथ रा, सगळा तुरंग कुमेत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै
रजथांनी कसमीर बंगाली, पंजाबी उड़िया मळिपाली
करणाटक गुजरात मराठा, केरल उतराखंड रा हाळी
वां में भुज मैणत भेळप री, नव जीवण री नैंत चाहीजै
जन जन रै मन हेत चाहीजै

करमां री लकीरां नै

करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी,
पिण सुळझ्या सबळां नै सुभ मारग मिळ जासी।
रीत-भांत रौ डर कर्‌यां सूं जनम अकारथ जावै छै,
खूंटै बंधिया ढोरां रै ज्यूं निकमा चक्कर खावै छै,
कूवै पड़िया हीरां नै कुण मूरख परखासी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
भाभौसा री भोळावण सूं पूंछ पकड़ली पाडै री,
मारग काटण आस राखणी पूठी टूटै गाडै री,
हाथ बिखेर्‌यां हीरां नै दूजा कुण सिरकासी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
पिंडतजी रा पोथी-पांना ठग विद्या रा ठागा है,
साधू पंडा जग गाडै में जुतिया माठा ढागा है,
अै ओझा अक्कल री सीरां नै खाडै में खड़कासी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
मैल-माळिया मोटर वाळा बिना कांम रा ठाटा है,
कमतरियां री छाती ऊपर अै चुणियोड़ा भाटा है,
पोखौ मत यां खीरां नै झूंपां लाय लगासी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
उण जूंनै मारग क्यूं जावो जो ले डूबै खाडै मैं,
कूद्यां तिरस बुझैला कीकर कादै भर्‌यै नाडै में,
पोहरौ सूंप्यौ अमीरां नै सूतौड़ां नै खासी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
लारै जोता मारग चालै वांरा दांत रंगीजैला,
मूवा बाप रै करै छतरियां वांरा टाबर भीजैला,
मांग्या ढोल मंजीरां नै गीतड़ला कद आसी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।
सोच समझनै मारग लेणौ फेर चालणौ हिम्मत कर,
धन माया अर कुटंब कबीलौ रीत-भांत दुनिया रौ डर,
तोड़ौ सब जंजीरां नै कटै गळै री फांसी,
करमां री लकीरां नै कायर सीस निंवासी।

लाल धजा री आंण फिरै

आ लाल धजा री आंण फिरै, जद कमतरियां री दसा घिरै।
बीत्या जुग मैनत करतां नै, धरती धन निपजातां नै,
माखण लाल मुफत में जातां, छाछ मलीचो खातां नै,
अबै हथोड़ौ-दांतड़ली, धन धरती री धणियाप करै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।
डिगमिग डोल रया रजवाड़ा, बड़ै राज रौ जोर गयौ,
ठाकर फिरै ठोकरां खाता, बडो रावळौ बिगड़ रयौ,
जाग गया धरती रा धायल, हुळस धारिये हाथ धरै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।
सेठां री सैणप सड़ चाली, बात बिगड़गी बोहरां री,
चाल उकीली चवड़ै हुयगी, पोल खुली सा चोरां री,
अणभणिया आथड़बा ढूकै, धरती धूजै सूम डरै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।
जूंझ रया अणगिणिया जुगां सूं, जग रा करसा और मजूर,
सींच धरा रातै लोही सूं, रंग दियौ धज नै भरपूर,
बंध काट परबस कमतरियां रै हिवड़ै में जोस भरै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।
दूजा रंग बिणज रा बांना, रातौ रंग मजूरां रौ,
हाथ हथोड़ै-दांतड़ली में, बसियौ काळ हजूरां रौ,
निसंक चरै हळवांणी वाळा, दुसमण दळ भय खाय मरै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।
हळवाळा तरवारां झेली, कळवाळा तोपां दागै,
दाव भूलग्या दळ-बळ वाळा, जीव छोड़ नै पड़ भागै,
धूड़ माजनौ धाड़वियां रौ, कमतरियां रौ काज सरै,
आ लाल धजा री आंण फिरै।

मत जा साथी

मत जा साथी पंथ पुराणै
मत रण-तुरगां रा असवारां नैं मोटर अंजन में तांणै
जिण मारग परताप पधार्या, जिण हळ दुरगै काज संवार्या
उण जूनै मारग सूं साथी, पोंच न पासी आज ठिकाणै
मत जा...
उण जुग धरती ही महाराणी, धाय नहीं घर री धणियाणी
तरवारां री धाक दब्योड़ी, धरण दाब ली राजघराणै
मत जा...
किण रो मुलक, कठै ही जनता, जन सूं बधक कुळां री ममता
मुगलां रा सांवत रण-बांका, कुळ पर कटग्या, जगती जाणै
मत जा...
आज मुलक आजाद एक है, कुळ सूं इधक मसीनमेक है
बरस-गांठ, जळ-बांध, बीजळी, गळां बंधै जद लोक उजाणै
मत जा...
पूज बडेरा सीस झुकाले, टेम मिलै वांरां जस गा लै
पण तूं क्यूं दिल्ली सूं लड़ रे, चढै कटक ले क्यूं उभराणै
मत जा...
च्यारूं देख मंड्या पग ताजा, हिल-मिल मिनख मजूरी राजा
हुनर हेत सूं बदळै जीवण, जीवै सो जूगत गत जाणै
मत जा...
उण जुग धरती ही महाराणी, धाय नहीं घर री धणियाणी
तरवारां री धाक दब्योड़ी, धरण दाब ली राजघराणै
मत जा...
किण रो मुलक, कठै ही जनता, जन सूं बधक कुळां री ममता
मुगलां रा सांवत रण-बांका, कुळ पर कटग्या, जगती जाणै
मत जा...
आज मुलक आजाद एक है, कुळ सूं इधक मसीनमेक है
बरस-गांठ, जळ-बांध, बीजळी, गळां बंधै जद लोक उजाणै
मत जा...
पूज बडेरा सीस झुकाले, टेम मिलै वांरां जस गा लै
पण तूं क्यूं दिल्ली सूं लड़ रे, चढै कटक ले क्यूं उभराणै
मत जा...
च्यारूं कूंटां चिलक घणी है, तनैं दबावण भींत बणी है
इण जुग रो अग्यान छिपावण, क्यूं जूना जूंझार बखाणै
मत जा...
आगै देख मंडया पग ताजा, हिल-मिल मिनख मजूरी राजा
हुनर हेत सूं बदळै जीवण, जीवै सो जूगत गत जाणै
मत जा...
उण जुग धरती ही महाराणी, धाय नहीं घर री धणियाणी
तरवारां री धाक दब्योड़ी, धरण दाब ली राजघराणै
मत जा...
किण रो मुलक, कठै ही जनता, जन सूं बधक कुळां री ममता
मुगलां रा सांवत रण-बांका, कुळ पर कटग्या, जगती जाणै
मत जा...
आज मुलक आजाद एक है, कुळ सूं इधक मसीनमेक है
बरस-गांठ, जळ-बांध, बीजळी, गळां बंधै जद लोक उजाणै
मत जा...
पूज बडेरा सीस झुकाले, टेम मिलै वांरां जस गा लै
पण तूं क्यूं दिल्ली सूं लड़ रे, चढै कटक ले क्यूं उभराणै
मत जा...
च्यारूं कूंटा चिलक घणी है, तनैं दबावण भींत बणी है
इण जुग रो अग्यान छिपावण, क्यूं जूना जूंढार बखाणै
मत जा...
आगै देख मंड्या पग ताजा, हिल-मिल मिनख मजूरी राजा
हुनर हेत सूं बदळै जीवण, जीवै सो जूगत गत जाणै
मत जा...

म्हे आया अकल बतावा नै

म्हे आया अकल बतावा नै, जनता रौ राज जमाबा नै,
राजा देख समझली सगळी, रीत-भांत रजवाड़ां री,
सैंग ढोल में पोल भरी है, धूम मची है धाड़ां री,
धाड़ेत्यां नै धमकाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
बड़ा ठिकांणा जोर जतावै, करै होड़ रजवाड़ां री,
माडांणी महाराजा बणग्या, चाल-ढाल सब भांड़ा री,
बड़पण रौ बैम मिटाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
मोटा अफसर लिवी मोटरां, अधबिचला घोड़ा राखै,
छोटां रै आटै रौ घाटौ, रिसवत खाय धांन चाखै,
भवसागर भेद मिटाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
कांमेती, कणवार्‌या, भांबी, राखै ठाट नबाबां रा,
चवड़ै चालै, चाल मुसद्दी, पड़दै किरतब काबां रा,
पड़दां नै परा हटाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
सूम सेठिया बण्या सयांणा, लोई चूस मजूरां रौ,
अेक अेक रा कर इक्यावन, सार सूत ले सूरां रौ,
बोहराजी नै भिड़काबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
जोसी, पंडा और पुजारी, पीर पादरी साध जती,
नित-नेमां रा नखरा राखै, फूट-झूठ सूं फिरी मती,
अणभणियां अकल उपाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।
खेड़ा सै खड़वा वाळां रा, संपत सैंग मजूरां री,
राज हथोड़ै दांतड़ली रौ, बीती बात हजूरां री,
सूतोड़ा सेर जगाबा नै, म्हे आया अकल बतावा नै।

पिण आगै आगै हालौ

भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ।
आगै हाल्यौ मिनख जिनावर, पगां ऊभ हाथां खातौ।
आगै हाल्यौ मूढ़ सिकारी, गिंडकां पर लाठी वातौ।
औ जुग जुग हालै मांनखौ, जीवन रौ नांव उछालौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
आगै हाल्यौ वौ नर राकस, मिनख-मिनख नै जिण खायौ।
आगै हाल्यौ वौ खेती खड़, मिनख जोतनै हळ बायौ।
औ पग-पग कांटा भांगतौ, मारग नै कियौ संवाळौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
आगै हाल्यौ भोपौ प्रोयत, कांमण सीख वेद भणनै।
आगै हाल्यौ सूर सिपाई, धाड़ छोड़ राजा बणनै।
ओ जीवै सौ आगै बधसी, मरतोड़ा खावै टालौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
आगै हाल्यौ ब्याज बांणियौ, नाथ घाल राजा खड़नै।
आगै हाल्यौ भील-मुसायब, राज लियौ सस्तर घड़नै।
सगळौ धन भेळौ कीन्हौ, दे अन गाभां रै ताळौ।
भई धीमा मधुरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
अब करसा कारीगर चेत्या, जूथ बांथ आगै बधसी।
अटक करै यारै मारग में, वारां धड़ पल में पड़सी।
इण नित री हळचळ मांयनै, जीवण रौ सार संभाळौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
जनम लियौ सौ डीगौ बधसी, कद ओछौ पड़ पाय नहीं।
बंध तोड़ धरसी सूं निकळै, बीज पताळां जाय नहीं।
औ गयौ रूप कद आवै, रुक जांणै जम रौ जाळौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥
पाछौ पग कुदरत सूं अंवळौ, रुक जावै सौ मरै परौ।
जग जीवत नित आगै हालै, औ कुदरत रौ नेम खरौ।
बीती कद पाछल फोरै, कद बिरखा करै कसालौ।
भई धीमा मुधरा चालौ, पिण आगै आगै हालौ॥

राज बदळग्यौ म्हांनै कांई

इण दिस सुख री पड़ी न झांई,
राज बदळग्यौ म्हांनै कांई?
नेता कैवै राज आपणौ, अंगरेजां सूं लैर छूटगी,
साधक धोखै निमौ नारायण, दुख दाळद री नाड़ टूटगी।
बाण्यां रै पौबारां पड़गी, पौरायत री आंख फूटगी,
गोबरिया भांबी रै घर सूं, भर्‌या पेट री याद रूठगी।
साधक जीमै दूध मळाई, गोबर कूकै म्हांनै कांई?
भण्या-गुण्या भगतां में भिळग्या, बड़ौ हुकम खादी में बड़ग्यौ,
नेता री निबळाई लारै, मुजराखोर मुसायब पड़ग्यौ।
देसभगत चीराय आंगळी, बण जूंझार सिरां पर चढ़ग्यौ,
हळ-धण खड़तौ आडौ बेली, बोझौ झेल जमीं में गड़ग्यौ।
नवा साब नै खीर निंवाई, बढियौ झींकै म्हांनै कांई?
गांधीजी री फौज बिखरगी, तेरा तीन हुवा भायेला,
चंदा-चोर चढ्या सिर ऊपर, फन्दाखोर हुवा सब भैळा।
धंधाखोर धाड़वी बणग्या, सूदखोर नित करै झमेला,
रणबंका नर कियौ किनारौ, आगीवांण हुया मदगैला।
नेताजी रै मोटर आई, नूर्‌यो बांगै म्हांनै कांई?
जनसेवक मूरतियां बणग्या, निवड़्या ना'र जीव रा काचा,
खेत गमाय किया हाथां सूं, सिटपिटियां रा सपना सांचा।
गैणै पड़ी कमाऊ दुनियां, कलस सेठ रा खाय तमाचा,
बाबूजी दो दिन सूं निरणां, सूखौ पेट, बैठग्या बाचा।
कुंवर सेठ रा खाय मळाई, मुन्नौ रोवै म्हांनै कांई?
दस पीढ़ी री खरी कमाई, कांगरेस बांण्यां रै बिकगी,
धन-लालच सूं जन नेता री, मझ खेतां में गोडी टिकगी।
नकद नफै री भरम भाड़ में, कमतरियां री काया सिकगी,
पिंडतजी पोथी नै पटकै, बेमाता खत खोटा लिखगी।
आडम्बर नै भेंट सवाई, जनता जोवै म्हांनै कांई?
कूड़ कपट कण-कण में रमग्या, भली चाल भांडां में मिळगी,
कमतरियां री कठण कमाई, बाण्यां री डाढ़ां में झिळगी।
रुळता फिरै समझण सांवत, अणबूझां नै गादी मिळगी,
धन वाळां री धींग धाक सूं, बळवालां री जीभ निकळगी।
सेठां रै घर नकद कमाई, लोक उडीकै म्हांनै कांई?

उस्तादां री आंण

उडती बातां आपरी, सुणली इतरा मास
अबै उखड़गी भायलां, न्याव मिलण री आस
न्याव मिलण री आस, मेह सूं रही न बाकी
भीड़-पीड़ भेळप, बिटळ्यै सत सूं थाकी
उस्तादां री आंण, किरपा कोथळियै राखौ
बंद करौ परचार, करौ तौ साची भाखौ
आजादी रौ आयग्यौ, अणचींत्यौ वरदांन
सांकळ कटतां मोद में, जनता चूकी ध्यांन
जनता चूकी ध्यांन, गधेड़ा धांन खायग्या
जन समझ्यौ भगवांन, हाथ में कांन आयग्या
उस्तादां री आंण, पेट पर पड़ी दुलत्ती
गादी मिळतां, गुण ग्यांन री कटगी पत्ती
भलौ डुबोयौ देस नै, कायम कर जनराज
पूजा परमिट पंथ री, रिसवत रै सिरताज
रिसवत रै सिरताज, दाझगी जनता सारी
घर-घर मांडी हाट, दलाली ठेकेदारी
उस्तादां री आंण, कांण रा प्रांण सिकै है
पड़्या अडांणा राछ, नगद में काछ बिकै है
अणचींत्यौ ई आयग्यौ, गंजां रै घर राज
उघड़्या सगळा दूखणा, खिणतां-खिणतां खाज
खिणतां-खिणतां खाज, पड़्या चादर पर दागा
सड़ी टाकी नै रण रा घाव बतावण लागा
उस्तादां री आण, हाथ में कैंची धरलौ
माथौ खिणतां कीड़ां रा नख डंक कतरलौ।
रीवां गढ़ में निपजिया, दूधां वरणा सेर
रूड़ै राजस्थांन में, कुदरत करी न देर
कुदरत करी न देर, धवळ कर दियौ कागलौ
कांव-कांव कर बीटां सूं, भर दियौ डागळौ
उस्तादां री आण, गोठिया हंस बतावै
पण कुबधां री बांण, बापड़ौ कठै लुकावै
खातां-खातां खोपरा, पाडा गिया अधाय
लीलौ चारौ रोवता, टसका करता खाय
टसका करता खाय, मिनख तरसे टुकड़ां नै
रुळ्यै राज में रो न सकै, निबळा दुखड़ां नै
उस्तादां री आंण, अबै धरती धूजैला
लोक जागतां ठग ठाकर रा पग सूजैला

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