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संत लालदास के सबद : Sant Laldas Ke Sabad

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हर गुनगावो हरजस रे साधो

हर गुनगावो हरजस रे साधो।

पार उतारै सयां मारग लावै, वाही कै रस मोहि रस रै॥

साधो भाई प्रेम प्रीत राखो विधना सु, भौर भय अब निसरै।

निसदिन राम नांव हीरदै लिख राखो, जौ कागद पर मीसरे॥

साधो बड़े-बड़े भवन भवेपत राजा, तेउ किये आप बस रे।

करोनै कुला सुमरन साहिब का, मेरे हर जी के नाव सहंसरे॥

भरम भुला रे बंदा

भरम भुला रे बंदा।

रैन गंवाई सोई-सोई, दौस कीया धंधा॥

देव ढोका साव तोड़ा, काम किया गंदा।

साधोजी आओ, सीख पावो, लाल हुवा चंदा॥

जल-थल में जोति जाहर, जीव जानत संधा।

लाल वंदो कलि में औतारी, जिन जाण जप्यो गोविंदा॥

राम हम बंदे औगुण भरे

राम हम बंदे औगुण भरे, गुणवंता साहिब।

पैदा किया की सरम गहोजी, हम ते काज कोई नाई सरै।

ईहै दुनिया देवन कूं ढोकै, तो साहिब सूं नाहिं डरै॥

सैहंस नाव पेदागर जी के सुमरो जासु ईह तेरो तन तीरै।

लालबंदो कलि में औतारी राम भजे गोविंद भजे वही तीरे॥

आछी राम सुमर लेरै मन मेरा

आछी राम सुमर लेरै मन मेरा।

अब तुम घड़ी घड़ी पल पल हरजी कौ सुमरो, जै कोई सुधा दिन तेरा।

आगै जावो कहा कहै छूटो, हंतौ पाप कीयो बहोतेरो।

लष चौरासी जीया जौन में, सभ घट पूर रहो चहुँफेरा।

लाल बंदो कल मै औतारी, कलिजुग मै आछौ न्याव निवेड़ो॥

आछी पीत लगई हो लाल

आछी पीत लगई हो लाल, हरि पीत लगाई हो।

लाल’र हर ऐसै मिले, बीच राईहू न समाई हो।

येक माया और मोहनी, दोऊ संग न लाई हो।

लाल राम जी के लाडले, भूलि कलि समझाई हो।

लालबंदे की रै वीनती, राम राखि ले हर सरनाई हो॥

अगम अगोचर सांई सब बुध तेरी

अगम अगोचर सांई सब बुध तेरी।

भाव भजे न भगवंत जी, भजन बिन का विध होय तिरगत मेरी॥

हरजन होय सो हरजस गावै, पीन हरजस फीरै कल हेरी।

नेकी नासि गई या कलि ते, औतारी लालन आये फेरी॥

या माया कु राम ईह कल डौलै, सो माया लालन घर चेरी।

गावै लाल निरंजन प्यारो, रहै लाल लागि अपने राम जी की डोरी॥

सब जुग सोवै सैंया मेरो जागै

सब जुग सोवै सैंया मेरो जागै।

पानी सौ जिन कीयो है पसारो, आपन माली सींचै बाड़ी बागो॥

काया के तुम कौतिग देखो, यामै मेरे करता को कर लागै।

सुमरन करो हर की सरन रहो रे, जासुं तेरो पाप कटै भौ भागै॥

माया ममता लोभ और लालच, अंतरजामी लाल बिना कौण त्यागै।

गावै लाल निरंजन प्यारो, लाल रहैत राम जी कै आगै॥

हरि चरनन जिनको मन लोचै

हरि चरनन जिनको मन लोचै।

जेई-जेई अमल कमाये जिन बंदा, जानि-जानि साहिब मेरो सोचै॥

षुदी गरुरो भागी जाई सब, ज़ोरावर जम आणि दबोचै।

लालवंदो कलि में औतारी, निरख-निरख सारी जुमल कौ जोखै॥

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