संत कमाल के सबद : Sant Kamal Ke Sabad
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पीर पैगंबर की बानी
पीर पैगंबर की बानी, यारो बस्त भयो निर्बानी॥ध्रु.॥
राजा रंक दोनों बराबर, जैसे गंगाजल पानी।
मार करो कुई मूपर मारो, दोनों मीठा बानी॥
कांचन नारी ज़हर सम देखे, न पसरे ह्वा पानी।
साधु संत से शीश नमावे, हाथ जोरकर निर्बानी॥
कहत कमाल सुनो भाई साधू, ये ही हमारी बानी।
ये ही ग्यान मन मो राखो, और कछू न जानी॥
आसरा एक करतार का रख तू
आसरा एक करतार का रख तू,
बीच मैदान के बाँध ताटी।
रहेगा वही जिन्हें खलक पैदा किया,
और सब होयगा ख़ाक माटी॥
अमीर उमराव दिन चार के पाहुने,
घूमता है दरबार हाथी।
कहत कमाल कबीर का बालक,
राम नाम तेरा संग साथी॥
इतना जोग कमाय के साधू
इतना जोग कमाय के साधू, क्या तूने फल पाया।
जंगल जाके ख़ाक लगाये, फेर चौरासी आया॥
राम भजन है अच्छा रे, दिल मों रखो सच्चा रे॥ध्रुव॥
जोग जगत की गत है न्यारी, जोग ज़हर का प्याला।
जीने पावे उने छुपावे, वोही रहे मतवाला॥
जोग कमाया के बाबू होना, ये तो बड़ा मुष्कल है।
दोनों हात जब निकल गये, फ़ेर सुधरन भी मुष्कल है॥
सुख से बैठो आपने मेहलमो, राम भजन अच्छा है।
कछु काया झीजे नहीं खरचे, ध्यान धरो सोइ सच्चा है॥
कहत कमाल सुनो भाई साधू, सब से पंथ न्यारा है।
वेद शास्तर की बात ये ही, जमके माथा फत्तर है॥
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