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हिंदी कविता, ग़ज़ल और लोकगीत संग्रह | Hindi Kavita, Ghazal & Lokgeet Bhajan Lyrics

हिंदी कविता, ग़ज़ल, लोकगीत, दोहे, कहानियाँ और भजन का सम्पूर्ण संग्रह

ग़ालिब से गुलज़ार तक, कबीर से प्रेमचंद तक —  से अधिक सैकड़ों रचनाएँ, शायरी, लोकगीत, भजन, दोहे, हास्य-व्यंग्य और पुराने गीतों के लिरिक्स यहाँ उपलब्ध हैं।

Hindi Kavita, Ghazal, Lokgeet, Dohe, Bhajan, Nazm, Kahani aur Hasya-Vyangya — sab ek jagah.

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ग़ालिब, मीर, साहिर, गुलज़ार, फ़राज़ और 50+ शायरों की ग़ज़लें

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20 से अधिक भाषाओं और बोलियों के लोकगीत — भारत की सांस्कृतिक विरासत

🌾 सम्पूर्ण लोकगीत संग्रह — सभी राज्यों के लोकगीत Complete Lokgeet Hub — Bhojpuri, Rajasthani, Maithili, Awadhi, Bagheli, Garhwali...
भोजपुरी लोकगीत Sohar, Birha, Faag... मैथिली लोकगीत Barahmasa, Birha... राजस्थानी लोकगीत Bana, Banni, Vivah... अवधी लोकगीत Sohar, Kajri, Faag... बघेली लोकगीत Gaari, Vivah, Sohar... मगही लोकगीत Sohar, Vivah, Janeu... गढ़वाली लोकगीत Chounfala, Barahmasa... हरियाणवी लोकगीत Vivah, Sawan, Ram... छत्तीसगढ़ी लोकगीत Karma, Sua, Bihaav... गुजराती लोकगीत Garba, Raas Geet... मालवी लोकगीत Devi, Vivah, Ganesh... गोंड लोकगीत Tribal Folk Songs भील जनजाति लोकगीत Vivah, Faag, Bhajan... कोरकू लोकगीत Vivah, Sidoli Geet... पंजाबी लोकगीत Bhangra, Giddha... कुमाँऊनी लोकगीत Uttarakhand Folk निमाड़ी लोकगीत Nimar Folk Songs बांग्ला लोकगीत Bengali Folk Songs हिमाचली लोकगीत HP Folk Songs बैगा लोकगीत Tribal Folk Songs

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यह वेबसाइट हिंदी साहित्य के हर रसिक के लिए एक अनूठा खज़ाना है। यहाँ ग़ज़ल की दुनिया में ग़ालिब से गुलज़ार तक, लोकगीत में भोजपुरी से गढ़वाली तक और कविता में कबीर से अटल बिहारी वाजपेयी तक — सबकी रचनाएँ मिलती हैं।

हमारे पास 20 से अधिक भारतीय भाषाओं और बोलियों के लोकगीत हैं — भोजपुरी, मैथिली, राजस्थानी, अवधी, बघेली, मगही, छत्तीसगढ़ी, गढ़वाली, हरियाणवी, मालवी, गुजराती, पंजाबी, कोरकू, भील और कई अन्य। ये सभी लोकगीत विशेष श्रेणी-पृष्ठों (hub pages) पर उपलब्ध हैं।

भजन और भक्ति साहित्य में कबीर, मीराबाई, सूरदास, दादू दयाल, धरनीदास जैसे संतों की रचनाएँ, साथ ही स्तोत्र, अष्टक, सूक्तम् और सहस्त्रनामावली का विशाल संग्रह है। पुराने गीतों के लिरिक्स में शैलेंद्र, कवि प्रदीप, रविन्द्र जैन और इन्दीवर की रचनाएँ हैं। Aur agar aap humor dhundh rahe hain, to Harishankar Parsai ke vyangya aur Akbar-Birbal ki kahaniyan bhi hain.

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्र: इस वेबसाइट पर कितनी रचनाएँ उपलब्ध हैं?

hindikavi.in पर 3000 से अधिक पृष्ठ हैं जिनमें ग़ज़ल, लोकगीत, कविता, दोहे, भजन, कहानियाँ, हास्य-व्यंग्य और पुराने गीतों के लिरिक्स शामिल हैं। लोकगीत संग्रह में अकेले 20+ बोलियों और भाषाओं के गीत हैं।

प्र: भोजपुरी, राजस्थानी और मैथिली लोकगीत कहाँ मिलेंगे?

भोजपुरी, राजस्थानी और मैथिली लोकगीतों के अलग-अलग hub pages हैं। हर hub पर उस बोली के दर्जनों गीत उपलब्ध हैं — सोहर, विवाह गीत, बारहमासा, बिरहा, फाग आदि।

प्र: शैलेंद्र और कवि प्रदीप के पुराने गाने के लिरिक्स कहाँ पढ़ें?

शैलेंद्र के गीत और कवि प्रदीप के गीत यहाँ hub pages पर मिलेंगे। "ऐ मेरे वतन के लोगों", "मेरा जूता है जापानी", "प्यार हुआ इक़रार हुआ" जैसे सदाबहार गानों के बोल पढ़ें।

प्र: हिंदी में सबसे अच्छे व्यंग्य कहाँ पढ़ें?

हरिशंकर परसाई के व्यंग्य हिंदी व्यंग्य साहित्य का शीर्ष हैं। इसके अलावा हास्य-व्यंग्य लेख संग्रह में 50+ हास्य रचनाएँ हैं।

प्र: प्रेमचंद की कहानियाँ और उपन्यास कहाँ पढ़ें?

प्रेमचंद की कहानियाँ — कफ़न, बड़े भाई साहब, ईदगाह, नमक का दरोग़ा और 100+ कहानियाँ यहाँ उपलब्ध हैं। उनके उपन्यास गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन भी पढ़ सकते हैं।

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 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

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